बच्चों को ऐसे सिखाएं पॉजिटिव सेल्फ टॉक, बढ़ेगा आत्मविश्वास और आएगी सही निर्णय लेने की समझदारी

पॉजिटिव सेल्फ टॉक के जरिए न सिर्फ बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ाया जा सकता है, बल्कि मुश्किल समय में उन्हें सही निर्णय लेना भी सिखाया जा सकता है।

Monika Agarwal
Written by: Monika AgarwalUpdated at: Aug 21, 2021 00:00 IST
बच्चों को ऐसे सिखाएं पॉजिटिव सेल्फ टॉक, बढ़ेगा आत्मविश्वास और आएगी सही निर्णय लेने की समझदारी

सेल्फ टॉक यानी कि अपने अंदर (मन) की आवाज, जिसे आप अपनी इनरवॉइस (Inner Voice) भी बोलते हैं। हमारे मन की आवाज का हम पर बहुत प्रभाव पड़ता है किसी भी कार्य को करने से पहले खुद से की बातें, खुद की सोच हमें एक दिशा देती हैं। जब भी हम किसी बुरी या मुसीबत वाली स्थिति में पहुंचते हैं तो हमें कुछ समझ नहीं आता। तब हमारे पास खुद के सिवा कोई नहीं होता। इस स्थिति में खुद का साथ देना बहुत जरूरी होता है। अब हमारे मन की आवाज हमें एक आश्वासन देती है कि "ऑल इज वेल"; हम इस स्थिति से निकल जायेंगे। हम अपने आप से अगर थोड़ी बहुत पॉजिटिव बातें करें तो किसी भी मुसीबत से बाहर आसानी से निकल सकते हैं। 

 

कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल के पीडियाट्रिशन डॉ सुमित गुप्ता का मानना है किआपको खुद को ही नहीं बल्कि अपने बच्चों को भी सेल्फ टॉक सिखानी चाहिए। इससे आपके बच्चों में आत्म विश्वास बढ़ता है। वह जीवन को एक सकारात्मक (Positive) नजरिए से देखने लगता है। वैसे भी सेल्फ टॉक (Self Talk) आपके चेतन और अवचेतन मन का मिक्सचर होती हैं। बच्चे जब सेल्फ टॉक करते हैं तो वे जीवन की चुनौतियों (Challenges) को और सकारात्मक रूप से सामना कर पाते हैं। जब जीवन कि इन चुनौतियों को बच्चा सकारात्मक रूप से देखेगा तो वह हर कठिनाई का सामना भी आसानी से कर पाएगा।" तो निम्न टिप्स अपनाकर आप अपने बच्चों को पॉजिटिव सेल्फ टॉक सिखा सकते हैं।

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सिखायें सेल्फ अवेयरनेस (Self Awareness) 

सेल्फ टॉक बच्चों के लिए एक अनोखा और नया कांसेप्ट हो सकता है। शुरू में उन्हें यह काफी कठिन भी लग सकता है। इसलिए उन्हें सबसे पहले इसके बारे में अवेयर यानि जागरूक करिए। उन्हें यह समझाइए की अलग अलग स्थितियों में अलग अलग विचार आने नॉर्मल होते हैं। यह हर व्यक्ति के साथ होता है। उन्हें यह समझाएं कि सेल्फ टॉक (Self Talk) किस तरह उनकी जिंदगी जीने का तरीका बदल सकता है और किस तरह से वह इस कॉन्सेप्ट के माध्यम से अपने विचारों को स्वयं तक ही सीमित रख सकते हैं। 

विचारों का विश्लेषण करना (View Analysis)  

उन्हें खुद के और खुद के विचारों के बारे में अगर आप जागरूक करते हैं तो उन्हें अपने विचारों के बारे में समझ आता है। इस दौरान उन्हें अपने विचारों को एनलाइज करना आता है। वह खुद को और अधिक अच्छे से जानते हैं। इस दौरान उन्हें उन विचारों के बारे में पता चलता है जो उन्हें अधिक चिंतित करते हैं। इस कारण वह खुद को इस स्थिति से बाहर निकालने का भी प्रयास खुद करेंगे।

निगेटिव सेल्फ टॉक का पता करें (They should not develop Negative Self talk)

पॉजिटिव सेल्फ टॉक (Self Talk) का सबसे पहला स्टेप यह होता है कि आपको अपने बच्चों को नेगेटिव सेल्फ टॉक पहचानना सिखाएं। क्योंकि अगर उनके साथ हर बार कुछ बुरा होगा तो केवल पॉजिटिव ही नहीं सबसे पहले नेगेटिव ख्याल ही उनके मन में आएंगे। हो सकता है वे हर चीज में अपना ही दोष समझने लगे। हो सकता है कोई मुश्किल होम वर्क देख कर उन्हें लग सकता है कि मुझसे यह नहीं होगा। इस स्थिति में उन्हें पॉजिटिव रहना सिखाएं।

उनके लिए खुद एक रोल मॉडल बनें (Be A Role Model)

बच्चे सिखाने से अधिक देखने से सीखते हैं। अगर आप उनके लिए एक मॉडल बन सकते हैं और खुद हर स्थिति में पॉजिटिव रह कर दिखाते हैं। तो आपके बच्चे भी ऐसा ही सीखेंगे। इसलिए उन्हें कुछ भी नया सीखाने से पहले पहले खुद उस नियम को अपनाएं।

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निगेटिव विचारों को पॉजिटिव में बदलना सिखाएं (Art Of Positivity) 

नेगेटिव विचारों का हमारे दिमाग में आना भी बहुत आम होता है। लेकिन असली काम होता है इन्हें निगेटिव से पॉजिटिव में बदलना। आप उन्हें यह बताएं कि जब भी कोई निगेटिव विचार आता है तो उसे तब तक पॉजिटिव में बदलें। जब तक वह एक आदत न बन जाए।

उन्हें पॉजिटिव सेल्फ टॉक के लाभों के बारे में सिखाएं (Advantages Of Positive Self Talk)

हो सकता है आपके बच्चों को यह बात बिल्कुल समझ ही न आए। इसलिए आप उन्हें इसकी प्रैक्टिस करवाने के लिए इसके लाभों के बारे में बताएं। अगर वह इनसे कुछ लाभ मिलता देखेंगे तो वह अपने आप ही सेल्फ टॉक में माहिर हो जायेंगे।

सेल्फ टॉक (Self Talk) अपने बच्चों को सिखाना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि इससे आपके बच्चे कठिन परिस्थितियों से भी आसानी से निकल सकते है। इससे आप के बच्चे अपनी कीमत (Value) समझ सकेंगे और वह किसी अन्य के कारण परेशान नहीं हो सकेंगे। इस कॉन्सेप्ट के जरिए वह आपसे खुलकर बात करना भी शुरू कर देंगे। इसमें थोड़ा समय लग सकता है।

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