COVID 19: साइंस ने माना सैनिटाइजर के बजाए साबुन का इस्तेमाल है कोरोना से बचाव का सबसे सही तरीका, जानें क्यों

COVID 19: साइंस का मानना है कि सैनिटाइजर के बजाए साबुन का इस्तेमाल कोरोना से बचाव का सबसे सही तरीका है। लेख में पढ़ें ऐसा क्यों है। 

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: Mar 18, 2020
COVID 19: साइंस ने माना सैनिटाइजर के बजाए साबुन का इस्तेमाल है कोरोना से बचाव का सबसे सही तरीका, जानें क्यों

देश में बढ़ते कोरोनावायरस (Coronavirus) के खतरे के बीच लोगों के लिए बचाव का सबसे सही तरीका है खुद को साफ रखना। लेकिन ज्यादातर लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि ये वायरस हमारे शरीर के बाहर घंटों से लेकर कई दिनों तक सक्रिय रह सकता है। एल्कोहल वाले डिसइंफेक्टेंट, लिक्विड, वाइप्स, जेल और क्रीम  वायरस से निजात पाने के लिए प्रयोग के लायक हैं लेकिन ये सभी सामान्य साबुन के मुकाबले अच्छे नहीं है।  कोरोना से निपटने के लिए स्वास्थ्य अधिकारी दो प्रकार के संदेश दे रहे हैं पहला ये है कि इस वायरस को खत्म करने या इससे निजात पाने के लिए कोई दवा नहीं है। लेकिन आप हाथ धोकर वायरस को फैलने से रोक सकते हैं। आपको ये सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि लाखों रुपये खर्च कर भी इस वायरस की दवा नहीं बनाई जा सकी है लेकिन आपके घर में रखा आम साबुन इस वायरस को खत्म कर सकता है।

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साबुन कैसे खत्म करता है वायरस

इस बात को सुनकर आपके दिमाग में ख्याल होगा कि कैसे एक साबुन कोरोना सहित ज्यादातर वायरस को खत्म कर सकता है? अगर आप भी सोच रहे हैं तो ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। दरअसल वायरस एक खुद से बनने वाला नैनपार्टिक्ल है, जिसकी सबसे कमजोर कड़ी है लिपिड (फैटी) बायलेयर। साबुन इस फैट मेंबरेन में घुल जाता है और वायरस टूटकर बिखर जाता है और खत्म हो जाता है। इसे हम यूं कह सकते हैं कि साबुन के प्रयोग से वायरस सक्रिय हो जाता है और जिंदा नहीं रहता है।

इन तीन चीजों से बनता है वायरस

ज्यादातर वायरस इन तीन प्रकार के कणों से मिलकर बनते हैं, रिबोनुसेलिक एसिड (आरएनए), प्रोटीन और लिपिड। वायरस से संक्रमित कोशिकाएं इन तीनों कणों को बहुत ज्यादा मात्रा में बनाना शुरू कर देती हैं, जिसके कारण अचानक वायरस खुद-ब-खुद बनने लगता है। अगर गंभीर रूप से देखा जाए तो इन सभी को एक साथ रखने वाले कोई मजबूत सहसंयोजक संबंध नहीं हैं, जिसका अर्थ ये है कि आपको इन सभी को अलग-अलग करने के लिए किसी प्रकार के कठोर रसायन की आवश्यकता नहीं है। जब एक संक्रमित कोशिका मर जाती है, तो ये सभी नए वायरस बच जाते हैं और अन्य कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं। कुछ जाकर फेफड़ों के वायुमार्ग में घुल जाते हैं और व्यक्ति सांस संबंधी समस्याओं का शिकार हो जाता है। और फिर जब आप खांसते या छींकते हैं तो आपके पानी की कुछ बूंदे हवा में 10 मीटर तक की दूरी तक जाती हैं। कोरोनावायरस संवाहक की सबसे ज्यादा दूरी कम से कम दो मीटर तक हो सकती है।

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तेजी से सूखती है आपके पानी की बूंदें

ये छोटी-छोटी बूंदे सतह पर गिरकर बेहद तेजी से सूख जाती हैं। लेकिन वायरस फिर भी सक्रिय रहता है। वहीं मानव की त्वचा वायरस के लिए सबसे आदर्श सतह है। ये एक प्रकार से ऑर्गेनिक है और सतह पर मौजूद मृत कोशिकाओं में प्रोटीन व फैटी एसिड वायरस के साथ संपर्क में आ जाता है। कहते हैं जब किसी वायरस वाली सतह को स्पर्श करते हैं तो वायरस कण आपकी त्वचा से चिपक जाते हैं और आपके हाथों पर आ जाते हैं। जिसके बाद बहुत से लोग अपने चेहरे को छूते हैं, विशेष रूप से आपकी आंखें, नाक या मुंह तो संक्रमित हो सकते हैं। और कई शोध से यह पता चला है कि ज्यादातर लोग हर दो से पांच मिनट में एक बार अपना चेहरा छूते हैं।

बचाव का सही तरीका क्या है?

सिर्फ और सिर्फ पानी से ही वायरस को खत्म करने में मदद मिल सकती है। लेकिन पानी त्वचा और वायरस के बीच मजबूत संबंध के साथ लड़ने में पर्याप्त नहीं है। साबुन का पानी बिल्कुल अलग है। साबुन में एम्फीफाइल नाम का फैट जैसा पदार्थ होता हैं, जो वायरस की मेंबरेन में  मौजूद लिपिड के साथ लड़ता है। यही कारण है कि साबुन हमारी त्वचा से सामान्य गंदगी को हटाने का काम करता है। साबुन न केवल वायरस और त्वचा के बीच संबंध को कमजोर करने का काम करता है बल्कि वेल्क्रो जैसे संबंध, जो वायरस में प्रोटीन, लिपिड और आरएनए को एक साथ रखता है उसे भी खत्म करने का काम करता है।

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साबुन ही अच्छा क्यों

एल्कोहल बेस्ड उत्पाद, जिसमें बहुत अधिक "कीटाणुनाशक" उत्पाद शामिल हैं, इनमें उच्च-प्रतिशत एल्कोहल (आमतौर पर 60-80% इथेनॉल) होता है और एक समान तरीके से वायरस को खत्म करने का काम करता है। लेकिन साबुन बेहतर है क्योंकि आपको केवल साबुन के पानी की काफी कम मात्रा की आवश्यकता होती है, जो कि रगड़ने पर आपके पूरे हाथ को आसानी से कवर करती है। आपको सिर्फ थोड़ी देर के लिए इथेनॉल को हाथ पर रखने की जरूरत होती है। इसके साथ ही ये बात ध्यान रखने की आवश्यकता है कि हाथों पर जेल लगाने या रगड़ने की यह गारंटी नहीं है कि आप अपने हाथ की पूरी त्वचा पर प्रभावी रूप से हैंड रब का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए साबुन सबसे अच्छा है, लेकिन कृपया साबुन या व्यावहारिक नहीं होने पर एल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइज़र का उपयोग करें।

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