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प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो चेक करें इन 10 हार्मोन्स का संतुलन, गर्भधारण के लिए हैं जरूरी

Hormones For Pregnancy In Hindi: प्रेग्नेंसी के लिए शरीर में कुछ हार्मोन्स के संतुलन को बनाए रखना बहुत जरूरी है, जानें ऐसे 10 हार्मोन्स के बारे में।

Vineet Kumar
Written by: Vineet KumarUpdated at: Apr 19, 2023 19:42 IST
प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो चेक करें इन 10 हार्मोन्स का संतुलन, गर्भधारण के लिए हैं जरूरी

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Hormones For Pregnancy In Hindi: अक्सर लोगों के साथ यह समस्या देखने को मिलती है, कि वे लगातार गर्भधारण की कोशिश में लगे रहे हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी नहीं होती है। क्या आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है? डायटीशियन मनप्रीत कालरा की मानें, तो इस तरह की स्थित हार्मोन्स के अंसुलन के कारण देखने को मिलती है। प्रेग्नेंसी के लिए महिलाओं में कई हार्मोन्स का संतुलित होना बहुत जरूरी है। इसलिए, जब भी आप प्रेगनेंसी प्लान करने की कोशिश कर रहे हों, तो आपको इन हार्मोन्स के संतुलन को पहले चेक जरूर करना चाहिए। डायटीशियन मनप्रीत कालरा ने अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट में ऐसे 10 हार्मोन के बारे में बताया है, जो गर्भधारण के लिए बहुत जरूरी हैं और आपको इन्हें चेक जरूर करना चाहिए। इस लेख में हम आपको इनके बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

प्रेगनेंसी के लिए जरूरी हार्मोन्स- Important Hormones For Pregnancy In Hindi

1. फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH)

यह गर्भाशय के फोकस का पता लगाने में मदद करता है। इसके साथ ही यह मेनोपोज के निदान और प्रजनन क्षमता नहीं होने वाला है। इसे आपको अपने पीरियड्स के तीसरे दिन चेक करना चाहिए। इसकी रेंज 3 और 10 mIU/ ml होनी चाहिए।

Important Hormones For Pregnancy In Hindi

2. ल्यूटिनजिंक हार्मोन (LH)

यह ओव्यूलेशन और ओवेरियन फंक्शन का पता लगाने में मदद करता है। इसका टेस्ट आपको पीरियड्स के तीसरे दिन या ल्यूटियल फेज (7-10 दिन) में करना होता है। इसकी नॉर्मल रेंज तीसरे दिन 7 mIU/ml से कम होनी चाहिए।

3. एस्ट्राडियोल (Estradiol)

ओवेरियन फंक्शन का पता लगाने और प्रजनन स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग में मदद करता है। इसकी जांच पीरियड्स के तीसरे दिन की जानी चाहिए। नॉर्मल रेंज- 25 और 75 पिको ग्राम प्रति मिलीलीटर (pg/ml)

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4. प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)

ओव्यूलेशन की पुष्टि करने में मदद करता है और बांझपन या अनियमित मासिक धर्म के कारणों के बारे में बताता है। इसकी जांच ल्यूटियल चरण (28-दिन के चक्र के लगभग 21 दिन) के बीच में कर सकते हैं। नॉर्मल रेंज 21वें दिन - 10ng/mkl या उससे अधिक हो सकती है।

5. टेस्टोस्टेरोन (Testosterone)

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) और एण्ड्रोजन स्तर को प्रभावित करने वाली अन्य स्थितियों का निदान करने में मदद करता है। इसकी जांच ल्यूटियल चरण (28-दिन के चक्र के लगभग 21 दिन) के आसपास कर सकते हैं। नॉर्मल रेंज- 1.97nmol/L

6. प्रोलैक्टिन (Prolactin)

ऊंचा प्रोलैक्टिन का अधिक स्तर बांझपन और अनियमित पीरियड्स का कारण बन सकता है। इसकी जांच पीरियड्स के किसी भी दिन की जा सकती है। सामान्य सीमा- 8-800 mIU1

7. डिहाइड्रोएपियनड्रोस्टेरोन सल्फेट (DHESS)

एण्ड्रोजन का उच्च स्तर प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसकी जांच पीरियड्स के किसी भी दिन की जा सकती है। नॉर्मल रेंज- 35-430 ug/dl

8. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (TSH)

थायराइड डिसफंक्शन का निदान और मॉनिटरिंग में मदद करता है, जो प्रजनन क्षमता और पीरियड साइकिल को प्रभावित कर सकता है। इसकी जांच पीरियड्स के किसी भी दिन हो सकी है। नॉर्मल रेंज- 0.5-5.0 mIU/L)

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9. इन्हीबीन बी (Inhibin B)

ओवेरियन रिजर्व, अंडे की गुणवत्ता और अंडे की मात्रा का अनुमान लगाने में मदद करता है। इसकी जांच पीरियड्स के तीसरे दिन की जाती है।

10. पूल्ड प्रोजेस्टेरोन (Pooled Progesterone)

ओव्यूलेशन की गुणवत्ता और सफल गर्भाधान की क्षमता का आकलन करने में मदद करता है। इसकी जांच वैकल्पिक दिन पर की जानी चाहिए जैसे, 2,4,6,8,10।

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