वायरल इंफेक्‍शन से ग्रसित बच्‍चे की देखभाल कैसे करें, जानें ये 5 नुस्‍खे

आप कीटाणुओं को फैलने से रोकने में कामयाब हो सकते हैं लेकिन हमेशा अपने बच्‍चे को बीमार होने से नहीं रोक पाते। इसलिए माता-पिता के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि वायरल इंफेक्‍शन होने पर बच्‍चों की देखभाल

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Dec 17, 2018
वायरल इंफेक्‍शन से ग्रसित बच्‍चे की देखभाल कैसे करें, जानें ये 5 नुस्‍खे

कीटाणुओं से होने वाले ज्‍यादातर इंफेक्‍शन वायरस और बैक्‍टीरिया के कारण होते हैं। हालांकि आप कीटाणुओं को फैलने से रोकने में कामयाब हो सकते हैं लेकिन हमेशा अपने बच्‍चे को बीमार होने से नहीं रोक पाते। इसलिए माता-पिता के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि वायरल इंफेक्‍शन होने पर बच्‍चों की देखभाल कैसे की जायें। आइए जानें कि बच्‍चे के वायरल इंफेक्‍शन से ग्रस्‍त होने पर क्‍या करना चाहिए।

 

भरी हुई नाक के लिए नमक पानी

नेसल कन्जेस्चन के लिए नमक का पानी बहुत ही शानदार उपाय है। नाक को नमक और पानी के घोल से धोने पर बैक्‍टीरिया और वायरस खत्‍म होते हैं। इसलिए अगर आपके बच्‍चे की नाक भरी हुई है तो यह नुस्‍खा जरुर आजमाएं। एक गिलास पानी में एक चम्मच नमक डाल कर उबाल लें। फिर उसे ठंडा होने दें। बस हो गई तैयार आप के बच्‍चे के नाक में डालने की दवा। आवश्यकतानुसार इस की 3-4 बूंदें बच्‍चे के नाक में डालते रहें जिससे उसके नाक में जमा हुया रेशा नर्म होकर छींक के साथ बाहर आ जाएगा और शिशु का नाक खुल जाएगी। वैसे तो नाक में डालने के लिए सेलाइन नेजल ड्राप्स आपको केमिस्ट की दुकान से भी आसानी से मिल सकते हैं। 

खांसी के लिए शहद

बच्‍चे को खांसी से राहत देने के लिए आप उसे शहद भी दे सकते हैं। 2 से 5 आयु वर्ग के बच्‍चे को आधा चम्‍मच और 6 से 11 आयु वर्ग के बच्‍चे को पूरा चम्‍मच शहद देना चाहिए। सोते समय शहद देने पर आपके बच्‍चे को सुबह राहत मिल सकती है।

बुखार के ओवर-द-काउंटर दवाएं

महीने या उससे कम उम्र के बच्‍चे को बुखार के लिए ओवर-द-काउंटर दवा दी जा सकती है। हालांकि इसे देने के लिए और सही खुराक के बारे में जानने के लिए अपने डॉक्‍टर से जांच करवाना बेहतर रहता है।

सांस का ख्याल रखें

वायरल इंफेक्‍शन के दौरान सांस लेने में तकलीफ होना सबसे आम जटिलताओं में से एक है। बच्‍चे को ठीक से सांस लेने में मदद करने के लिए कमरे को नमी होना  बहुत जरूरी होता है। इसलिए नमी बनाये रखने के लिए बच्‍चे के कमरे में ह्यूमिडिफायर और वेपोराइजर का इस्‍तेमाल करें।

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एंटीबायोटिक दवाओं के लिए डॉक्टर से पूछें

वैसे तो एंटीबायोटिक्‍स वायरल संक्रमण के लिए काम नही करती, लेकिन डॉक्‍टर कुछ मामलों में इंफ्लूएंजा के लिए एंटीवायरल दवाओं को लेने के लिए कहते हैं। अगर आवश्‍यक हो तो अपने डॉक्‍टर से इस विषय में सलाह लें। 

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नवजात शिशु का कैसे रखें ख्‍याल 

नवजात बहुत नाजुक होते हैं। डिलीवरी के बाद उनके अभिभावकों को सबसे अधिक चिंता इसी बात की होती है कि बच्चे का ध्यान किस तरह रखा जाए। शिशु को क्या दिया जाए और किन चीजों से उसकी रक्षा की जाए। इस बारे में तीन बिंदु महत्वपूर्ण होते हैं जिनका ध्यान रखा जाना चाहिए। पहला बिंदु ये कि बच्चे को इन्फेक्शन बहुत जल्दी हो जाती है। ऐसा इस कारण होता है क्योंकि नवजात के शरीर में इन्फेक्शन से लड़ने की अधिक ताकत नहीं होती। शिशु को छूने व चूमने से उसे ये इन्फेक्शन होता है। शिशु को इन्फेक्शन से बचाना जरूरी होता है। दूसरी चीज है स्तनपान।

शिशु का पेट छोटा होता है इसलिए उसे बार-बार स्तनपान कराए जाने की जरूरत होती है। शिशु की मां उसे स्तनपान करा पाए, इसके लिए विशेष प्रयत्न किये जाने चाहिए। बच्चों से संबंधित तीसरी चीज जिसका ध्यान रखा जाना जरूरी है वो है उसे गर्माहट देना। इसकी जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि नवजात को बहुत जल्दी ठंड लग जाती है। शिशु को ठंड से बचाना बहुत जरूरी है।

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