जानें, क्या होती है स्लिप डिस्क और क्या है इसका घरेलू उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 09, 2018
Quick Bites

  • स्लिप डिस्क को जानने के लिए रीढ़ की बनावट को समझना जरूरी है।
  • क्रंचेज करने के लिए पेट के बल चटाई बिछाकर लेट जायें।
  • स्पाइन कॉर्ड की हड्डियों के बीच कुशन जैसी एक मुलायम चीज होती है।

स्लिप डिस्क कोई बीमारी नहीं, शरीर की मशीनरी में तकनीकी खराबी है। वास्तव में डिस्क स्लिप नहीं होती, बल्कि स्पाइनल कॉर्ड से कुछ बाहर को आ जाती है। डिस्क का बाहरी हिस्सा एक मजबूत झिल्ली से बना होता है और बीच में तरल जैलीनुमा पदार्थ होता है। डिस्क में मौजूद जैली या कुशन जैसा हिस्सा कनेक्टिव टिश्यूज के सर्कल से बाहर की ओर निकल आता है और आगे बढ़ा हुआ हिस्सा स्पाइन कॉर्ड पर दबाव बनाता है। कई बार उम्र के साथ-साथ यह तरल पदार्थ सूखने लगता है या फिर अचानक झटके या दबाव से झिल्ली फट जाती है या कमजोर हो जाती है तो जैलीनुमा पदार्थ निकल कर नसों पर दबाव बनाने लगता है, जिसकी वजह से पैरों में दर्द या सुन्न होने की समस्या होती है।

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गर्दन या सर्वाइकल वर्टिब्रा

स्लिप डिस्क को जानने के लिए रीढ़ की बनावट को समझना जरूरी है। स्पाइनल कॉर्ड या रीढ़ की हड्डी पर शरीर का पूरा वजन होता है। यह शरीर को गतिमान रखता है साथ ही इससे पेट, गर्दन, छाती और नसों की सुरक्षा भी होती है। स्पाइन वर्टिब्रा से मिलकर बनती है। यह सिर के निचले हिस्से से शुरू होकर टेल बोन तक होती है। स्पाइन को तीन भागों में बंटा है- गर्दन या सर्वाइकल वर्टिब्रा, छाती (थोरेसिक वर्टिब्रा) और लोअर बैक (लंबर वर्टिब्रा)। स्पाइन कॉर्ड की हड्डियों के बीच कुशन जैसी एक मुलायम चीज होती है, जिसे डिस्क कहा जाता है। ये डिस्क एक-दूसरे से जुड़ी होती है और वर्टिब्रा के बिल्कुल बीच में स्थित होती हैं। गलत तरीके से काम करने, पढ़ने, उठने-बैठने या झुकने से डिस्क पर लगातार जोर पड़ता है। इससे स्पाइन के न‌र्व्स पर दबाव आ जाता है जो कमर में लगातार होने वाले दर्द का कारण बनता है।

स्लिप डिस्क के लिए घरेलू उपचार

इस रोग के लिए अक्सर बैड रैस्ट, इंजैक्शन, शल्य चिकित्सा, स्पाइनल फ्यूजन, डिस्क प्रत्यारोपण, वर्टिब्रोप्लास्टी, पिन होल सर्जरी और मिनिमल इन्वेसिव सर्जरी को कराने की सलाह दी जाती है। लेकिन हर उपचार को स्थिति के हिसाब से करने की सलाह दी जाती है। रीढ़ की हड्डी में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो एक्स-रे या एमआरआइ माइलोग्राफी (स्पाइनल कॉर्ड कैनाल में एक इंजेक्शन के जरिये) के जरिये इस समस्या का निदान होता है। जांच के दौरान स्पॉन्डलाइटिस, डिजेनरेशन, ट्यूमर, मेटास्टेज जैसी समस्या का भी पता चल जाता है। स्लिप्ड डिस्क के ज्यादातर मरीजों को आराम करने और फिजियोथेरेपी से राहत मिल जाती है। इसमें दो से तीन हफ्ते तक पूरा आराम करना चाहिए। 

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अन्य उपचार

  • स्लिप डिस्क वालों के लिए एब्डोमिनल आइसोमेट्रिक करना अच्छा माना जाता है। यह व्यायाम जमीन पर, चटाई पर या बेड पर किया जा सकता है। इसमें पैरों के जरिये पेट और कमर की मांसपेशियों पर खिंचाव आता है जिससे दर्द से राहत मिलती है।
  • क्रंचेज करने के लिए पेट के बल चटाई बिछाकर लेट जायें। फिर टखनों पर अपने शरीर के हिस्से को ऊपर की तरफ उठायें, पैरों की उंगलियों और कोहनी पर आपके शरीर का भार होना चाहिए। इसे आराम से करें। शुरूआत में 5-10 सेकेंड ही करें, बाद में समय को बढ़ा सकते हैं।
  • लुंबर रोल एक्सरसाइज करने के लिए चटाई पर सीधे लेट जायें। अपने घुटनों को मोड़ लीजिए, फिर हाथों को दोनों तरफ सीधा फैला लें। उसके बाद पैरों को बायें और दायें दोनों तरफ घुमायें। प्रत्येक तरफ 5-5 बार यह प्रक्रिया दोहरायें।

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