सोरायसिस में मरीजों को स्किन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इस ऑटोइम्यून बीमारी में घुटनों, कोहनियों और सिर की स्किन यानी स्कैल्प पर खुजलीदार, लाल और पपड़ीदार चकत्ते या रैशेज हो सकते हैं। सोरायसिस एक आम और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है। फिलहाल इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे मैनेज किया जा सकता है सोरायसिस से पीड़ित मरीजों को बहुत तेज दर्द होता है, जिस वजह से मरीज की नींद भी प्रभावित हो सकती है। सोरायसिस होने में जेनेटिक कारणों की भूमिका हो सकती है। जब इसके लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
सोरायसिस के लक्षण क्या हैं?
Cleveland Clinic के मुताबिक, सोरायसिस के शुरुआती लक्षणों में छोटे-छोटे दाने उभर सकते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे इनके ऊपर पपड़ी जमने लगती है और प्लाक की ऊपरी सतह झड़ सकती है। इससे खुजली हो सकती है और खुजलाने पर खून भी निकल सकता है। सोरायसिस के लक्षणों में प्लाक बनना सबसे आम लक्षण है।
सोरायसिस के आम लक्षण
- स्किन पर उभरे हुए मोटे चकत्ते या रैशेज
- प्लाक वाली स्किन का रंग आस-पास की त्वचा से अलग दिखाई देना
- प्लाक पर बनी पपड़ी की ऊपरी परत झड़ना
सोरायसिस के अन्य लक्षण
- त्वचा में तेज खुजली होना
- त्वचा का सूखा होना या दरारें पड़ना
- स्किन में दर्द होना
- नाखूनों का खुरदरा हो जाना
- नाखूनों में गड्ढे पड़ना या दरारें आना
- जोड़ों में दर्द होना
सोरायसिस के लक्षण बढ़ने के कारण क्या हैं?
NHS के अनुसार, सोरायसिस तब होता है, जब स्किन सामान्य से ज्यादा तेजी से बनने लगती है, जिससे स्किन पर पैच या चकत्ते बन सकते हैं। हालांकि, इसके सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन माना जाता है कि ऑटोइम्यून सिस्टम की वजह से यह समस्या हो सकती है। इसके और भी कई कारण हो सकते हैं।
- स्ट्रेस
- ज्यादा शराब पीना या स्मोक ज्यादा करना
- मोटापा होना
- प्रेग्नेंसी
- कुछ खास दवाएं
- इंफेक्शन
- स्किन पर चोट लगना
- बहुत तेज धूप में ज्यादा समय तक रहना
सोरायसिस कितनी तरह का होता है?
National Psoriasis Foundation ने सोरायिसस के पांच प्रकार बताए हैं।
प्लाक सोरायसिस
इस बीमारी से पीड़ित करीब 80 से 90 फीसदी लोगों में प्लाक सोरायसिस पाया जाता है। इसमें स्किन पर चकत्ते बन सकते हैं, त्वचा का रंग बदल सकता है और नाखून भी प्रभावित हो सकते हैं। प्लाक सोरायसिस में स्किन की कोशिकाएं बनने और फिर ऊपरी सतह पर आने में लगभग एक महीना लग सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोरायसिस में यह प्रक्रिया बहुत तेजी से होती है और कोशिकाएं सतह पर जमा होने लगती हैं। इसके ट्रिगर्स में स्ट्रेस, स्किन पर चोट, संक्रमण, तंबाकू या शराब पीना और कुछ दवाएं शामिल हैं, जो लक्षणों को बढ़ा सकती है।
इनवर्स सोरायसिस
इसे इंटरट्रिजिनस सोरायसिस या फ्लेक्सुरल सोरायसिस भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें सोरायसिस बगल (अंडरआर्म), स्तनों के नीचे, जननांग और नितंबों के बीच हो सकता है। ये त्वचा पर घाव, लाल चमकदार चकत्ते की तरह दिखाई दे सकते हैं।
सोरायसिस से पीड़ित करीब 21 से 30 फीसदी लोगों में इनवर्स सोरायसिस होने का रिस्क हो सकता है। यह शिशुओं में सोरियाटिक डायपर रैश से शुरू हो सकता है और ज्यादा वजन वाले लोगों में भी इनवर्स सोरायसिस दिखाई दे सकता है। इसके होने का कारण बहुत ज्यादा एक्टिव इम्यून सिस्टम होता है।
गुटेट सोरायसिस
गुटेट सोरायसिस से करीब 8% लोग प्रभावित हो सकते हैं। इसमें आमतौर पर बांहों, टांगों और धड़ पर छोटे-छोटे गोल, लाल या गुलाबी धब्बे दिखाई देते हैं। यह चेहरे, कान और स्कैल्प पर भी हो सकते हैं। ओवरएक्टिव इम्यून सिस्टम के कारण स्किन की कोशिकाएं एक महीने के बजाय सिर्फ तीन से चार दिनों में बढ़ने लगती हैं और स्किन की सतह पर जमा हो सकती हैं। सोरायसिस का यह प्रकार काफी तेजी से बढ़ता है।
पुस्टुलर सोरायसिस
यह दुर्लभ प्रकार का सोरायसिस है, जो करीब 3% लोगों को प्रभावित करता है। पुस्टुलर सोरायसिस में शरीर में सूजन के कारण होने वाली लंबी बीमारी है। इसमें स्किन में सफेद या पीले रंग के मवाद से भरे दाने बन सकते हैं, जो दर्दनाक या सूजन वाले हो सकते हैं। हालांकि, ये दाने संक्रामक नहीं होते हैं। इसके लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, तेज खुजली, थकान और मांसपेशियों में कमजोरी शामिल हो सकती है।
सोरायिसस होने पर क्या रिस्क हो सकते हैं?
Cleveland Clinic के मुताबिक, सोरायसिस की बीमारी सिर्फ स्किन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह जोड़ों में सूजन और दर्द का कारण भी बन सकती है। जिन लोगों को सोरायसिस है, उन्हें ये गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
- डायबिटीज
- मोटापा
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- स्ट्रोक
- हार्ट अटैक
- सोरायसिस से कुछ लोगों में जोड़ों की समस्या हो सकती है। इसमें जोड़ों में अकड़न, सूजन और दर्द रह सकता है।
- इसके अलावा, सोरायसिस का असर नाखूनों पर भी पड़ सकता है। इसमें मरीजों के नाखून भी बहुत खुरदरे और गड्ढे वाले हो सकते हैं।
सोरायसिस शरीर के किन भागों पर हो सकता है?
Cleveland Clinic के अनुसार, सोरियसिस शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है। इसलिए इसके लक्षणों पर नजर रखने की खास जरूरत होती है।
- कोहनी और घुटने
- चेहरे और मुंह के अंदर
- सिर की त्वचा पर
- हाथों और पैरों की उंगलियों के बीच
- जनानांग
- पीठ पर
- हथेलियों और पैरों पर
सोरायसिस और फंगल इंफेक्शन में अंतर कैसे पहचानें?
सोरायसिस और फंगल इंफेक्शन दोनों ही स्किन से जुड़ी समस्याएं हैं। दोनों ही स्थितियों में स्किन पर लाल, खुजली वाले पैच हो सकते हैं। कई बार लोग सोरायसिस और फंगल इंफेक्शन की पहचान नहीं कर पाते। इस वजह से सोरायसिस के इलाज में देरी हो सकती है। दोनों बीमारियां लक्षण और संक्रामकता के आधार पर पहचानी जा सकती हैं।
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सोरायसिस |
फंगल इंफेक्शन |
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मुख्य कारण |
ऑटोइम्यून समस्या है, जो ओवरएक्टिव इम्यून सिस्टम के कारण हो सकती है। |
यह त्वचा या शरीर में फंगस के बढ़ने से होती है। |
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संक्रामकता |
यह छूने से नहीं फैलता है। |
यह छूने, कपड़े, तौलिया या जूते शेयर करने से फैल सकता है। |
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लक्षण |
त्वचा पर मोटी, लाल, चांदी जैसी पपड़ीदार और खुजलीदार परतें बनना |
त्वचा पर गोलाकार लाल चकत्ते, खुजली या नाखूनों का पीला और मोटा होकर टूटना |
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इलाज |
स्टेरॉयड या नॉन-स्टेरॉयड क्रीम |
एंटीफंगल क्रीम |
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बचाव के उपाय |
स्ट्रेस मैनेजमेंट |
नहाने के बाद त्वचा को सूखा रखना |
सोरायसिस की जांच कैसे होती है?
National Institute of Arthritis and Musculoskeletal and Skin Diseases (NIAMS) के मुताबिक, सोरायसिस की जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर स्किन, स्कैल्प और नाखूनों में हुए बदलावों को चेक करते हैं। सोरायसिस में मरीजों के चकत्ते पर चांदी जैसी सतह बन सकती है। इसमें मरीज की मेडिकल कंडीशन से जुड़े कुछ सवाल किए जाते हैं।
- क्या स्किन पर खुजली या जलन जैसे लक्षण महसूस होते हैं?
- क्या हाल ही में स्ट्रेस या किसी बीमारी से गुजरे हैं?
- क्या खास तरह की दवाएं ली जा रही हैं?
- क्या परिवार में किसी को ये बीमारी है?
- क्या जोड़ों में सूजन होती है?
सोरायसिस का इलाज कैसे होता है?
Cleveland Clinic के मुताबिक, सोरायसिस के लक्षणों से राहत दिलाने के लिए कई तरीकों से इलाज किया जा सकता है। हालांकि, इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है। इसमें मरीज की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, शरीर किस हिस्से में चकत्ते हुए हैं और मरीज की मेडिकल कंडीशन क्या है?
- स्टेरॉयड क्रीम लगाने की सलाह दी जा सकती है।
- सूखी त्वचा के लिए मॉइश्चराइजर लगाने की सलाह दी जा सकती है।
- त्वचा की कोशिकाओं की ग्रोथ को धीमा करने के लिए दवाएं दी जा सकती हैं।
- मेडिकेटेड लोशन या शैम्पू लगाया जा सकता है।
- विटामिन D3 क्रीम लगाई जा सकती है।
- विटामिन A या रेटिनोइड क्रीम लगाने की सलाह दी जा सकती है।
अगर सामान्य इलाज से आराम नहीं मिलता, तो इलाज के ये तरीके अपनाए जा सकते हैं।
- लाइट थेरेपी - खासतौर वाली LED लाइटें स्किन की सूजन को कम कर सकती हैं और स्किन टिश्यू की ग्रोथ को धीमा कर सकता है।
- PUVA थेरेपी - इसमें सोरालेन दवा का इस्तेमाल करने के साथ अल्ट्रावॉयलेट रे भी दी जा सकती है।
- इम्यून थेरेपी - इसमें नई इम्यून थेरेपी से जुड़ी दवाएं दी जाती हैं, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को ब्लॉक करती हैं।
- मेथोट्रेक्सेट - यह इलाज सोरायसिस के गंभीर मामलों में किया जाता है। इसमें लिवर से जुड़ी बीमारी हो सकती है। अगर इसे मरीज को दिया जाता है, तो समय-समय पर बायोप्सी भी कराई जाती है।
- साइक्लोस्पोरिन - यह इलाज भी गंभीर सोरायसिस में किया जाता है। इसमें दी जाने वाली दवा हाई ब्लड प्रेशर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है।
सोरायसिस में किन बातों का ध्यान रखें?
NIAMS के अनुसार, सोरायसिस की वजह से मरीज की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है। इससे उसकी नींद और काम दोनों पर असर पड़ सकता है। इसलिए सोरायसिस के मरीजों को अपने लक्षण कम करने या मैनेज करने की कोशिश करनी चाहिए।
- गुनगुने पानी से जरूर नहाएं।
- माइल्ड साबुन का इस्तेमाल करें।
- स्किन को नमी देने के लिए हैवी मॉइश्चराइजर लगाएं।
- वजन को कंट्रोल में रखें।
- बैलेंस्ड डाइट लेना बहुत जरूरी है।
- स्मोकिंग बिल्कुल न करें।
- बहुत ज्यादा शराब पीना सोरायसिस के लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है।
- सीमित मात्रा में धूप लेनी चाहिए।
- जिन ट्रिगर्स जैसे स्ट्रेस, ठंडा मौसम, स्किन पर चोट, दवाएं और इंफेक्शन से बचने की कोशिश करें।
सोरायसिस से जुड़े सवाल और जवाब
लोग सोरायसिस को छुआछूत की बीमारी समझने लगते हैं और इस वजह से उनके कई सवाल होते हैं। ऐसे सभी सवालों के जवाब नीचे दिए गए हैं।
1. क्या सोरायसिस छूने से फैलती है?
जवाब - बिल्कुल नहीं। सोरायसिस कोई संक्रामक रोग नहीं है। यह हाथ मिलाने, गले मिलने, कपड़े शेयर करने, साथ में रहने या खाने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कभी नहीं फैलता।
2. क्या सोरायसिस पूरी तरह जड़ से ठीक हो सकता है?
जवाब - फिलहाल सोरायसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है। हालांकि, सही दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव करके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है।
3. क्या सोरायसिस केवल वयस्कों को होता है या बच्चों में भी हो सकता है?
जवाब - सोरायसिस किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है, लेकिन यह ज्यादातर 15 से 35 वर्ष की आयु के बीच पहली बार उभरता है। बच्चों में गटेट सोरायसिस ज्यादा देखा जाता है, जो अक्सर गले के संक्रमण के बाद छोटे-छोटे बूंदों जैसे निशानों के रूप में दिखाई देता है।
4. क्या सोरायसिस के दौरान गर्भवती होना सुरक्षित है?
जवाब - गर्भवती होना पूरी तरह सुरक्षित है। प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से लगभग 40-50% महिलाओं में सोरायसिस के लक्षण काफी हद तक कम हो जाते हैं। हालांकि, गर्भधारण से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें, क्योंकि सोरायसिस की कुछ दवाएं भ्रूण के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
5. सोरायसिस के मरीज को कपड़े पहनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब - सोरायसिस के मरीजों को सूती और ढीले कपड़े पहनने चाहिए। सिंथेटिक, नायलॉन और ऊनी कपड़े स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, कपड़ों को माइल्ड डिटर्जेंट में धोना बेहतर रहता है, ताकि केमिकल्स से स्किन पर जलन न हो।
निष्कर्ष
अगर सोरायसिस के लक्षण दिखने लगते हैं, तो शुरुआत में ही डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि शुरुआत में ही लक्षणों को मैनेज या कंट्रोल करना जरूरी है। अगर समय पर सोरायसिस का इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर हो सकता है और इससे जुड़ी बीमारियों के बढ़ने का रिस्क भी हो सकता है। इसलिए समय रहते सोरायसिस का इलाज कराएं और इसके ट्रिगर्स से बचाव करें।
