आज के समय में अनहेल्दी खानपान, वजन बढ़ने, एक्सरसाइज न करने और लंबे समय तक बैठक कर काम करने जैसी कई आदतों के कारण अक्सर लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी किसी न किसी समस्या का सामना करना पड़ जाता है। इन्हीं में से एक है हाई यूरिक एसिड की समस्या, जिसके कारण बहुत से लोग परेशान रहते हैं। रिपोर्ट में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर अक्सर लोग घबरा जाते हैं और कई लोग तो ये मान लेते हैं कि उनको गाउट (Gout) की समस्या हो गई है, लेकिन क्या ऐसा वाकई में है? ये सवाल भी कई लोगों के मन में आता है। VNA Hospital के यूरोलॉजी, सेक्सोलॉजी और इनफर्टिलिटी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट के डॉ. विनीत मल्होत्रा कहते हैं कि जोड़ों में क्रिस्टल के जमा होने पर गाउट की समस्या होती है।
क्या हाई यूरिक एसिड का मतलब गाउट होता है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, "हर हाई यूरिक एसिड का मरीज गाउट का शिकार नहीं होता है। मेडिकल भाषा में इस समस्या को हाइपरयूरिसीमिया (Hyperuricemia) कहा जाता है। लेकिन गाउट की समस्या को तभी माना जाता है, जब यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में जमा होकर दर्द और सूजन जैसे समस्याओं को पैदा करें।"
2021 की Biomolecules की रिसर्च के अनुसार, हाइपरयूरिसीमिया (यूरिक एसिड का स्तर बढ़ना) गाउट के मुख्य खतरों में से एक है, लेकिन एकमात्र कारण नहीं है। कई लोगों में हाई यूरिक एसिड के कारण भी गाउट की समस्या नहीं होती है। वहीं, कुछ लोगों में यूरिक एसिड का स्तर नॉर्मल होने पर भी इसके लक्षण दिखते हैं। गाउट की समस्या में सूजन, मेटाबॉलिक और क्रिस्टल के जमाव जैसे कारक जिम्मेदार होते हैं।
यूरिक एसिड क्या है और ये क्यों बढ़ता है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा कहते हैं, "यूरिक एसिड शरीर में मौजूद एक तरह का वेस्ट प्रोडक्ट है, जो शरीर में प्यूरीन (Purine) नामक तत्व के टूटने से बनता है। बता दें, रेड मीट, सीफूड, अल्कोहल और कुछ प्रोसेस्ड फूड जैसे खाने में प्यूरिन अधिक मात्रा में पाया जाता है। नॉर्मल स्थिति में किडनी यूरिक एसिड को यूरिन के जरिए बाहर निकाल देती है, लेकिन जब इसका स्तर ज्यादा हो जाता है या किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो यह शरीर में जमा होने लगता है।"
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कब होती है गाउट की समस्या?
डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, "गाउट एक क्लिनिकल कंडीशन है, जो सिर्फ ब्लड टेस्ट से नहीं बल्कि लक्षणों के आधार पर पहचानी जाती है। जब यूरिक एसिड के क्रिस्टल जोड़ों में खासतौर पर पैर के अंगूठे, घुटने या टखने में जमा हो जाते हैं। तब व्यक्ति को तेज दर्द, सूजन और लालिमा यानी रेडनेस होती है, जिसे गाउट अटैक कहा जाता है।"
Clinical Methods के अध्ययन के अनुसार, यूरिक एसिड शरीर में प्यूरिन नामक तत्व के पचने के बाद बचने वाला लास्ट वेस्ट प्रोडक्ट है। यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर यानी हाइपरयूरिसीमिया, ये गाउट, किडनी में पथरी और किडनी से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है।

हाई यूरिक एसिड में भी नहीं दिखते लक्षण
डॉ. विनीत बताते हैं कि, "कुछ लोगों में यूरिक एसिड का लेवल तो बढ़ा होता है, लेकिन उन्हें जोड़ों में किसी तरह के दर्द या सूजन की समस्या नहीं होती है। इस स्थिति को asymptomatic hyperuricemia कहा जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को गाउट नहीं होता है, लेकिन ये गाउट होने के खतरे का संकेत हो सकता है।"
गाउट का खतरा किन कारणों से बनता है?
डॉ. विनीत कहते हैं कि, "व्यक्ति को गाउट की समस्या मोटापे, अनहेल्दी लाइफस्टाइल, किडनी से जुड़ी समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, अल्कोहल का अधिक सेवन करने और फैमिली हिस्ट्री के कारण हो सकती है। स्वास्थ्य की इन समस्याओं के कारण हाई यूरिक एसिड गाउट में बदल सकता है। ऐसे में गाउट से बचने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना जरूरी है, जिससे अन्य समस्याओं से भी बचाव हो सकता है।"
हाई यूरिक एसिड को नजरअंदाज करने से क्या होता है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा कहते हैं, "व्यक्ति को गाउट के लक्षण नहीं भी दिखते हैं, लेकिन उनके शरीर में यूरिक एसिड का स्तर लगातार बढ़ा हुआ है, तो ये शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके कारण व्यक्ति को किडनी स्टोन, किडनी के डैमेज होने और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।"
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यूरिक एसिड के स्तर को कम करने के लिए क्या करें?
डॉ. विनीत बताते हैं कि, "यूरिक एसिड के स्तर को कम करने और गाउट की समस्या से बचने के लिए कुछ उपायों को अपनाया जा सकता है, साथ ही हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना भी जरूरी है। ऐसा करने से स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में भी मदद मिलती है।"
- नियमित रूप से यूरिक एसिड की जांच कराएं।
- वजन को नियंत्रित रखें।
- नियमित रूप से पूरे दिन में 2-3 लीटर पानी पिएं।
- रोज हल्की एक्सरसाइज करें।
- रेड मीट, सीफूड और अल्कोहल जैसी चीजों से दूरी बनाएं।
2015 की American Journal of Lifestyle Medicine की स्टडी के अनुसार, वजन कम करने, नियमित एक्सरसाइज करने और पर्याप्त पानी पीने से यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने के लिए फ्रुक्टोज युक्त मीठी ड्रिंक्स, जूस और अल्कोहल के सेवन को सीमित करने की सलाह देता है क्योंकि ये यूरिक एसिड के प्रोडक्शन को बढ़ाते हैं। वहीं, डेयरी प्रोडक्ट्स और विटामिन सी का सेवन करने से गाउट के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
किस स्तर के यूरिक एसिड को हाई माना जाता है?
पुरुषों में 7.0 mg/dL या इससे अधिक होने और महिलाओं में 6.0 mg/dL या इससे अधिक होने पर यूरिक एसिड के स्तर को हाई माना जाता है। यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने के कारण व्यक्ति को गंभीर समस्याएं हो सकती है।
हाई यूरिक एसिड में दवा लेना कब जरूरी होता है?
डॉ. विनीत आगे बताते हैं कि, "हाई यूरिक एसिड की स्थिति में व्यक्ति के लिए दवाई लेना जरूरी नहीं होता है। लेकिन अगर व्यक्ति को बार-बार गाउट अटैक आने, यूरिक एसिड का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने, किडनी स्टोन और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याएं होने पर डॉक्टर की सलाह के साथ दवाई ली जा सकती है। ध्यान रहे, डॉक्टर की सलाह के बिना दवाई न लें।"
डॉ. विनीत मल्होत्रा सलाह देते हैं, "बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है। सही इलाज के लिए पूरी जांच और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखना जरूरी होता है।"
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डॉक्टर से सलाह कब लें?
शरीर में हाई यूरिक एसिड के कारण अगर व्यक्ति को जोड़ों में तेज दर्द होने, अकड़न होने, यूरिन में झाग आने, किडनी में पथरी होने, स्किन में खुजली होने, जोड़ों में सूजन आने और चलने-फिरने में परेशानी होने पर इन लक्षणों को नजरअंदाज न करते हुए तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति से बचा जा सके। इसके अलावा, यूरिक एसिड के लक्षण न दिखने पर भी अधिक अनहेल्दी खानपान के बाद थोड़ी सी परेशानी होने पर भी तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
हाई यूरिक एसिड और गाउट एक-दूसरे से जुड़े जरूर हैं, लेकिन दोनों एक ही चीज नहीं हैं, लेकिन सिर्फ हाई यूरिक एसिड होने पर इस स्थिति को गाउट समझ लेना गलत हो सकता है। सही जानकारी, टाइम पर जांच और डॉक्टर की सलाह से इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए हाई यूरिक एसिड की स्थिति में घबराने की बजाय स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें। इसके अलावा, शरीर में हाई यूरिक एसिड या गाउट की समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति से बचा जा सके।
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FAQ
कैसे पता चलेगा कि यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है?
व्यक्ति के शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर जोड़ों में तेज दर्द होने (घुटने, टखने और अंगूठे), सूजन आने, लाल होने, किडनी में पथरी होने, किडनी में दर्द होने, अकड़न होने, चलने-फिरने में परेशानी होने और त्वचा के रंग में बदलाव आने जैसी परेशानियां होती हैं। ऐसे में इसके लक्षणों को नजरअंदाज न करें।यूरिक एसिड बढ़ने पर क्या नहीं खाना चाहिए?
यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर लोगों को रेड मीट, अल्कोहल, पालक, उड़द, चना, मशरूम जैसे फल, प्यूरिन युक्त फूड्स, अधिक तला-भूना और मसालेदार फूड्स को खाने से बचना चाहिए। इनका अधिक सेवन करने से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने और इसके कारण परेशानियां हो सकती हैं।यूरिक एसिड कितना होना चाहिए?
शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित रखना जरूरी होता है। ऐसे में पुरुषों में यूरिक एसिड 3.4 से 7.0 mg/dL, महिलाओं में 2.4 से 6.0 mg/dL के बीच होना चाहिए और बच्चों में यूरिक एसिड का नॉर्मल स्तर 2.0-5.5 mg/dL होता है।यूरिक एसिड कम करने के लिए क्या खाना चाहिए?
शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को कम करने के लिए डाइट में तुलसी के पत्ते, मेथी दाने, आंवला जूस, नारियल पानी, कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स, अलसी, ओट्स, ब्राउन राइस और रागी जैसे साबुत अनाज जैसे फूड्स को खाएं। इसके अलावा, शुगरी ड्रिंक्स और अनहेल्दी फूड्स को खाने से बचना चाहिए।यूरिक एसिड के नुकसान?
यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर व्यक्ति को चलने-फिरने में परेशानी होने, जोड़ों में सूजन आने, दर्द होने, किडनी के डैमेज होने, किडनी में पथरी, ब्लड शुगर हाई होने और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें और हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करने की कोशिश करें।
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Apr 20, 2026 16:09 IST
Modified By : Priyanka Sharma Apr 20, 2026 16:09 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra