जर्नल के मुताबिक, अध्‍ययन में पाया गया कि 195 देशों में ये अध्ययन किया गया था, जिसके मुताबिक आहार से संबंधित मौतों का अनुपात उज्बेकिस्तान में सबसे अधिक था और इज़राइल में सबसे कम। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका 43 वें स्थान पर था, जबकि ब्रिटेन 23 वें, चीन 140 वें और भारत 118 वें स्थान पर था।

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नमक और चीनी के सेवन से होने वाली मौतों में भारत का स्‍थान 118वां, गंभीर रोगों का कारण हैं ये

जर्नल के मुताबिक, अध्‍ययन में पाया गया कि 195 देशों में ये अध्ययन किया गया था, जिसके मुताबिक आहार से संबंधित मौतों का अनुपात उज्बेकिस्तान में सबसे अधिक था और इज़राइल में सबसे कम। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका 4

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Apr 05, 2019Updated at: Apr 05, 2019
नमक और चीनी के सेवन से होने वाली मौतों में भारत का स्‍थान 118वां, गंभीर रोगों का कारण हैं ये

एक वैश्विक अध्ययन में पाया गया कि 2017 में दुनिया भर में ग्यारह मिलियन मौतें खराब खानपान, अत्‍यधिक चीनी, नमक और प्रॉसेस्‍ड मीट से जुड़ी हैं, जोकि हृदय रोग, कैंसर और डायबिटीज का कारण हैं। यह अध्‍ययन एक ऑनलाइन जर्नल 'द लैंसेट' में प्रकाशित हुआ है। 

जर्नल के मुताबिक, अध्‍ययन में पाया गया कि 195 देशों में ये अध्ययन किया गया था, जिसके मुताबिक आहार से संबंधित मौतों का अनुपात उज्बेकिस्तान में सबसे अधिक था और इज़राइल में सबसे कम। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका 43 वें स्थान पर था, जबकि ब्रिटेन 23 वें, चीन 140 वें और भारत 118 वें स्थान पर था।

नट्स और सीड्स, दूध और साबुत अनाज जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों का सेवन औसतन बहुत कम था, और लोग बहुत अधिक मीठा पेय और बहुत अधिक प्रॉसेस्‍ड मांस और नमक का सेवन करते थे। इसके चलते 2017 में पांच में से एक की मौत खराब डाइट से हुई।

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी ने 15 आहार कारकों की खपत के 1990 से 2017 तक के रुझानों पर नज़र रखी। वाशिंगटन विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के निदेशक क्रिस मुर्रे, जिन्होंने इस कार्य का नेतृत्व किया, ने कहा कि जो लोग कई वर्षों से खानपान को लेकर सोचते आ रहे हैं उसकी पुष्टि यह शोध करता है।

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खराब आहार दुनिया में किसी भी अन्य जोखिम कारक की तुलना में मौतों के लिए अधिक जिम्मेदार है, "हमारे आकलन से पता चलता है कि मौत के जो प्रमुख जोखिम कारक हैं वह सोडियम का अधिक सेवन के अलावा होल ग्रेन, फल, नट्स, सीड्स और सब्जियों जैसे स्वस्थ खाद्य पदार्थों का कम सेवन करना।"

अध्ययन में पाया गया कि लोगों ने नट्स और बीजों की निर्धारित मात्रा का केवल 12 प्रतिशत ही खाया गया। इसमें अगर एक दिन की बात करें तो अनुशंसित 21 ग्राम की तुलना में महज 3 ग्राम की ही खपत हुई, जबकि शर्करा युक्त पेय की 10 गुना से अधिक मात्रा में खपत की गई। चीनी, नमक और खराब वसा का अधिक सेवन हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह और कई प्रकार के कैंसर के लिए जोखिम कारक हैं।

वैश्विक आहार में होल ग्रेन की अनुशंसित मात्रा का एक चौथाई से भी कम शामिल है यानी एक दिन में अनुशंसित 125 ग्राम की तुलना में औसतन 29 ग्राम होल ग्रेन का सेवन किया गया। और प्रॉसेस्‍ड मीट की अनुशंसित मात्रा को लगभग दोगुना यानी 2 ग्राम की तुलना में प्रति दिन लगभग 4 ग्राम औसत सेवन।

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जनवरी में प्रकाशित एक अध्ययन में लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक "आदर्श आहार" का सुझाव दिया गया था जिसमें नट्स, फलों, सब्जियों और फलियों की खपत को दोगुना और और मांस और चीनीयुक्‍त चीजों के सेवन को आधा कर देना चाहिए। 

अध्‍ययन में पाया गया कि आहार से संबंधित 2017 में हुई 11 मिलियन मौतों में, लगभग 10 मिलियन हृदय रोगों से, 913,000 कैंसर से, और टाइप 2 मधुमेह से लगभग 339,000 मौतें हुई थी। 1990 में आहार से संबंधित वार्षिक मौतों में 8 मिलियन की वृद्धि हुई है, लेकिन शोधकर्ताओं ने कहा कि यह बड़े पैमाने पर आबादी और बढ़ती उम्र के बढ़ने के कारण था।

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