शिशु को 6 माह की उम्र से पहले ठोस आहार देना ठीक नहीं, हो सकता है मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

शिशु के जन्म के बाद अगर आप उन्हें बहुत जल्दी ठोस आहार देने लगेंगी तो आगे चलकर उसे मोटापा और कई तरह की एलर्जी का खतरा हो सकता है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Apr 02, 2020
शिशु को 6 माह की उम्र से पहले ठोस आहार देना ठीक नहीं, हो सकता है मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स मानते हैं कि जन्म के बाद शिशु को कम से कम 6 माह तक मां का ही दूध पिलाना चाहिए। 6 माह की उम्र हो जाने पर उन्हें थोड़े-थोड़े से ठोस आहार (Solid Foods) खिलाना शुरू कर सकते हैं, लेकिन वो भी मां के दूध के साथ-साथ। आमतौर पर लोगों को लगता है कि ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि शिशु का पेट ठोस आहार को पचा नहीं पाएगा। मगर ऐसा नहीं है। हाल में हुई एक स्टडी के अनुसार अगर कोई माता-पिता अपने शिशु को 6 माह से पहले ठोस आहार खिलाने लगते हैं, तो उससे शिशु को भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

नहीं देना चाहिए जल्दी ठोस आहार

ये अध्ययन 'जॉन्स हॉप्किन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' (Johns Hopkins Bloomberg School of Public Health) के शोधकर्ताओं ने किया है। अध्ययन के मुताबिक शिशुओं को बहुत जल्दी ठोस आहार देने से उनके आंतों के बैक्टीरिया (गट बैक्टीरिया) और बैक्टीरियल बायप्रोडक्ट्स के लेवल में अंतर आता है। ये बैक्टीरियल बायप्रोडक्ट्स एक तरह के फैटी-एसिड की छोटी चेन होते हैं, जो शिशु के मल के साथ निकलते हैं। स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने ठोस आहार देने के बाद शिशुओं के मल का अध्ययन किया।

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क्यों होता है शिशु को मोटापा

ब्लूमबर्ग स्कूल के डिपार्टमेंट ऑफ एपिडेमोलॉडी (Department of Epidemiology) के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नोअल मुलर (Noel Mueller) बताते हैं, "बहुत जल्दी ठोस आहार देने से शिशु को आगे चलकर ओबीसिटी यानी मोटापे की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, ये बात पहले के अध्ययनों में भी कही गई है। मगर हमारे अध्ययन में हमने पता लगाया है कि ऐसा क्यों हो सकता है। इस अध्ययन के मुताबिक गट बैक्टीरिया इसका कारण हो सकते हैं।"

ठोस आहार बतौर सप्लीमेंट दें

आमतौर पर सभी शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिक्स) यही कहते हैं कि शिशुओं को सिर्फ ब्रेस्ट मिल्क या फार्मूला मिल्क दिया जा सकता है और 4 से 6 महीने बाद ही उन्हें ठोस आहार देना शुरू करना चाहिए। वो भी ब्रेस्ट मिल्क के साथ बतौर सप्लीमेंट। इसका मतलब है कि ऐसा भी नहीं है कि शिशु को 6 माह बाद आप पूरी तरह से ठोस आहार ही देने लगें।

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शिशु को हो सकती हैं कई समस्याएं

इसक पहले हुई एक रिसर्च में भी इस बात का दावा किया गया था कि शिशु को 6 माह की उम्र से पहले ठोस आहार देने से वो बचपन से ही मोटापे का शिकार हो सकता है। इसके अलावा इस अध्ययन में यह भी बताया गया था जल्दी ठोस आहार देने का उसकी सेहत पर असर पड़ सकता है। इसके कारण उन्हें एक्जीमा, फूल एलर्जी, अस्थमा, हे-फीवर (Hay Fever) और दूसरी कई तरह की एलर्जी हो सकती हैं।

क्यों होती हैं ये बीमारियां

शोधकर्ता यह भी बताते हैं कि इसके कारण शिशु के मेटाबॉलिज्म और इम्यूनिटी पर भी इसका असर पड़ता है। मेटाबॉलिज्म का शरीर के फैट बर्न करने की क्रिया में बड़ा योगदान होता है। इसलिए अगर किसी शिशु का मेटाबॉलिज्म ठीक नहीं है, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि उसे भविष्य में मोटापे की समस्या हो। वहीं दूसरी तरफ इम्यूनिटी की कमजोरी के कारण कई तरह के बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए शिशुओं को एलर्जी की समस्या जल्दी हो सकती है।

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