अब डेंगू फैलाने वाले मच्छरों पर लगेगी रोक, वैज्ञानिकों ने निकाला हल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 12, 2018

डेंगू और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों से छुटकारा पाने की दिशा में ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने एक प्रयोग के तहत क्वींसलैंड शहर के 80 फीसद मच्छरों का सफाया कर दिया। ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय विज्ञान संस्था सीएसआइआरओ के शोधकर्ताओं ने इसके लिए जेम्स कुक यूनिवर्सिटी (जेसीयू) की लैब में लाखों की संख्या में एडीज एजिप्टी प्रजाति के नर मच्छरों को पैदा किया। इन मच्छरों को वुल्बेशिया नामक बैक्टीरिया से संक्रमित किया गया जिससे उनकी प्रजनन क्षमता खत्म हो गई। इसके बाद उन्हें प्रयोग के लिए चुने गए इलाके में छोड़ दिया गया। वहां इनके संपर्क में आने से एडीज प्रजाति की जिन मादा मच्छरों ने अंडे दिए उनसे कोई बच्चा विकसित नहीं हुआ। नतीजतन, तीन महीने में उस क्षेत्र में मच्छरों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई।

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जेसीयू के शोधकर्ता कायरैन स्टानटन ने कहा, "हर साल लाखों लोगों को संक्रमित करने वाले इस खतरनाक मच्छर की आबादी को नियंत्रित करने की दिशा में हमारा यह प्रयोग महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना यह है कि विश्व के अन्य भागों में भी यह प्रयोग सफल हो पाता है या नहीं।" बता दें कि पहले भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया था लेकिन तब नर मच्छरों की पहचान करना और उनकी प्रजनन क्षमता सीमित करना बड़ी चुनौती थी। इसे दूर करने के लिए सर्च इंजन गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट द्वारा वित्तपोषित विज्ञान कंपनी "वरीली" ने प्रयोगशाला में मच्छर उत्पन्न करने की नई तकनीक विकसित की। वरीली के निगेल नोआड ने कहा, "हम अपने प्रयोग की सफलता से खुश हैं। एडीज मच्छरों को नियंत्रित करने के नए तरीके तलाशना जारी रहेगा।"

कितने प्रकार का होता है डेंगू?

डेंगू वायरस चार भिन्न-भिन्न प्रकारों के होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को इनमें से किसी एक प्रकार के वायरस का संक्रमण हो जाये तो आमतौर पर उसके पूरे जीवन में वह उस प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षित रहता है। हलांकि बाकी के तीन प्रकारों से वह कुछ समय के लिये ही सुरक्षित रहता है। यदि उसको इन तीन में से किसी एक प्रकार के वायरस से संक्रमण हो तो उसे गंभीर समस्याएं होने की संभावना काफी अधिक होती है। डेंगू आमतौर पर डेन1, डेन2, डेन3 और डेन4 सरोटाइप का होता है।

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1 और 3 सरोटाइप के मुकाबले 2 और 4 सेरोटाइप कम खतरनाक होता है।टाइप 4 डेंगू के लक्ष्णों में शॉक के साथ बुखार और प्लेट्लेट्स में कमी, जबकि टाइप 2 में प्लेट्लेट्स में तीव्र कमी, हाईमोरहैगिक बुखार, अंगों में शिथिलता और डेंगू शॉक सिंडरोम प्रमुख लक्षण हैं। डेंगू की हर किस्म में हीमोरहैगिक बुखार होने का खतरा रहता है, लेकिन टाइप 4 में टाइप 2 के मुकाबले इसकी संभावना कम होती है। डेंगू 2 के वायरस में गंभीर डेंगू होने का खतरा रहता है।

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