प्रेगनेंसी के दौरान क्यों किया जाता है कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (CVS) टेस्ट?

प्रेगनेंसी के दौरान कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (CVS) टेस्ट क्यों और कब किया जाता है? जानें इस टेस्ट के बारे में।

Monika Agarwal
महिला स्‍वास्थ्‍यWritten by: Monika AgarwalPublished at: May 29, 2022Updated at: May 29, 2022
प्रेगनेंसी के दौरान क्यों किया जाता है कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (CVS) टेस्ट?

आज के समय में साइंस ने इतना विकास कर लिया है कि नई नई तकनीकों के द्वारा बच्चे के जन्म से पहले ही उसकी स्वास्थ्य स्थितियों का पता लगाया जा सकता है। सीड्स आफ इनोसेंस और जेनेटिक डायग्नोस्टिक की डायरेक्टर तथा फाउंडर डॉक्टर गौरी अग्रवाल का कहना है कि प्रेगनेंसी के समय कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं, जिससे ये पता लगाया जा सके कि बच्चा स्वस्थ है और किस अवस्था में है। अगर बच्चे को किसी प्रकार के इलाज की जरूरत है तो डॉक्टर समय रहते ही इलाज शुरू कर सकते हैं। जिससे बच्चे को स्वस्थ बनाया जा सके और जीवन के लिए खतरा बनने वाली बीमारियों से बचाया जा सके। ऐसे ही एक टेस्ट का नाम है CVS टेस्ट यानी कोरियोनिक विलस सैंपलिंग टेस्ट (Chorionic villus sampling test)। आइए जानते हैं इस टेस्ट के बारे में।

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग टेस्ट क्या है (What Is Chorionic Villus Sampling Test) 

यह टेस्ट प्रेगेंसी के समय किया जाता है जिसके ये पता लगाया जा सके कि बच्चे को अपने माता पिता से कोई अनुवांशिक बीमारी तो नही मिली। जैसे डाउन सिंड्रोम, थैलेसीमिया और स्किल स्केल एनीमिया। कोरियोनिक विली प्लेसेंटा में छोटे छोटे उंगली के साइज की ग्रोथ होती है जो प्लेसेंटा में पाई जाती हैं और इसमें बच्चे की कोशिका के समान जेनेटिक मैटेरियल होते है। यह टेस्ट प्रेगनेंसी के 10वें से 13वें सप्ताह के बीच में किया जाता है।

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कोरियोनिक विलस सैंपलिंग टेस्ट कब है जरूरी (Why Chorionic Villus Sampling Test Is Needed) 

इसस टेस्ट को केवल निम्न स्थिति के दौरान ही किया जाता है

  • प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में जांच अगर सामान्य नहीं आती है तो डॉक्टर आपको सी वी एस टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
  • अगर आपकी पिछली प्रेगनेंसी में आपको डाउन सिंड्रोम वाला बच्चा हुआ है या फिर पिछली प्रेगनेंसी में क्रोमोसोम समान्य नहीं थे तो भी आपको यह टेस्ट कराना चाहिए।
  • अगर आपके परिवार मे कोई अनुवांशिक बीमारी है तो इस तरह की स्थिति में भी यह टेस्ट कराना चाहिए।
  • यह टेस्ट उन महिलाओं के लिए जरूरी नहीं है जिन्हें सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारी है या फिर जुड़वा बच्चे हैं।
CVS Test

सीवीएस टेस्ट कैसे किया जाता है  (What Is The Procedure Of Chorionic Villus Sampling Test) 

सी वी एस टेस्ट प्रेगनेंट महिला की कोरियोनिक विली नाम की कोशिका से छोटा सा सैंपल लेकर किया जाता है। 

  • कोशिकाओं का सैंपल पेट से या फिर गर्भ ग्रीवा में से लिया जाता है।
  • पेट की वॉल के बीच में गर्भाशय के अंदर एक पतली सी सुई डालकर सैंपल को सिरिंज में ले लिया जाता है। यह सुई बच्चे के पास तक नहीं जा पाती।
  • वेजाइना के माध्यम से भी यह टेस्ट किया जा सकता है।
  • गर्भाशय ग्रीवा में एक पतली जो अंदर से खोखली कैथेटर प्लेसेंटा तक डाली जाती है और इसमें से सैंपल लिया जाता है। 
  • इस पूरी प्रक्रिया में दस मिनट का समय लगता है। 
  • एक बार टेस्ट करने के बाद आपको एक घंटे तक डॉक्टर की निगरानी में रखा जाता है, जिससे कोई  टेस्ट का बुरा प्रभाव जैसे ब्लड का आना न देखने को मिले । 
  • उसके बाद आपको घर भेज दिया जाता है और आराम करने की सलाह दी जाती है।

CVS टेस्ट के दौरान आने वाली समस्याएं (Problems During Chorionic Villus Sampling Test) 

  • सी वी एस टेस्ट हमारे शरीर में सुई और सेक्शन ट्यूब का उपयोग करके किया जाता है। टेस्ट पूरा होने के बाद इसके कुछ नुकसान हो सकते है।
  • लगातार पेट में दर्द होना, शरीर का तापमान बढ़ना, वेजाइना से ब्लड आना, ठंड लगना, वेजाइना से तरल पदार्थ का निकलना इसके साइड इफेक्ट्स हैं।
  • सी वी एस टेस्ट ज्यादा दर्दनाक नहीं होता। टेस्ट करते समय आपको हल्की सी चुभन या ऐंठन हो सकती है  या फिर बाद में पेट में दर्द हो सकता है।

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग टेस्ट का सही समय प्रेगनेंसी के 10 वे से 13 वे सप्ताह के बीच में होता है। इस टेस्ट को 10 सप्ताह से पहले नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से गर्भपात होने का खतरा रहता है।

 
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