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पेशाब का रंग भी दे सकता है पैंक्रियाटिक कैंसर का संकेत, जानें कैसे होते हैं शुरुआती लक्षण

पैंक्रियाज में होने वाला कैंसर बहुत खतरनाक माना जाता है। जानें इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय।

Monika Agarwal
Written by: Monika AgarwalUpdated at: Oct 16, 2022 13:30 IST
पेशाब का रंग भी दे सकता है पैंक्रियाटिक कैंसर का संकेत, जानें कैसे होते हैं शुरुआती लक्षण

पैंक्रियाज हमारे पेट में एक अंग है, जो भोजन को पचाने के लिए एंजाइम उत्पन्न करता है। साथ ही ये ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करने वाले हार्मोन के उत्पादन में मदद करता है। सरोज सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सीनियर कंसलटेंट डॉ. बीके अग्रवाल के मुताबिक पैंक्रियाटिक कैंसर आमतौर पर कम लोगों को होता है लेकिन यह सबसे खतरनाक कैंसर में से एक है क्योंकि इसका पता तब चलता है, जब यह अधिक गंभीर अवस्था में हो जाता है। समय पर इलाज के बिना कैंसर तेजी से आसपास के टिश्यू में फैल सकता है। एम्पुलरी कैंसर हमारे पाचन तंत्र में बनता है जिसे वाटर का एम्पुला कहा जाता है जहां पित्त नली और पैंक्रियाटिक वेसल छोटी आंत में मिलती है और खाली होती है। पैंक्रियाज के कैंसर के शुरू के सामान्य लक्षणों में से एक पीलिया है। आइए जानते हैं कौन-कौन से लक्षण इसका चेतावनी संकेत हो सकते हैं।

पैंक्रियाटिक कैंसर और पीलिया 

पैंक्रियाटिक कैंसर वाले ज्यादातर लोगों और एम्पुलरी कैंसर वाले सभी लोगों में पीलिया इनके पहले लक्षणों में शामिल है। पीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें त्वचा, आंखों का सफेद भाग और म्यूकुलस मेंब्रेन पीली हो जाती है। यह पीला रंग ब्लड में बिलीरुबिन के उच्च स्तर के कारण होता है। जैसे-जैसे बिलीरुबिन का स्तर बढ़ता है, यूरिन भी भूरे रंग का हो सकता है।

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बिलीरुबिन एक गहरे पीले और भूरे रंग का पदार्थ है, जो लिवर में बनता है। यह लाल ब्लड सेल्स से उत्पन्न होने वाले वेस्ट मैटेरियल को शरीर से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हमारे ब्लड में तब बन सकता है, जब बाइल डक्ट रुक जाती है। बिलीरुबिन सामान्य रूप से हमारे स्टूल को भूरा रंग देने में मदद करता है। यदि बाइल डक्ट रुक जाती है, तो स्टूल हल्के भूरे रंग का हो सकता है। भूरे रंग के मूत्र के अलावा जब बिलीरुबिन त्वचा में बनता है, तो यह खुजली और पीले मूत्र का कारण बनता है।

पैंक्रियाज के कैंसर के लक्षण

पैंक्रियाज का कैंसर होने पर पेट में दर्द भी हो सकता है, जो पीठ तक फैल सकता है। इस कैंसर के कारण भूख में कमी हो सकती है, शरीर का वजन कम हो सकता है। इसके कारण शुगर का एक नया रूप भी हो सकता है जिसमें शुगर को कंट्रोल करना अधिक कठिन हो सकता है। पैंक्रियाज में कैंसर वाले लोगों को ब्लड क्लॉट हो सकते हैं और शरीर में थकान भी हो सकती है।

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पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज क्या है?

अग्नाशय के कैंसर के इलाज का कोई तरीका नहीं है लेकिन कुछ ऐसे उपाय हैं, जो किसी भी प्रकार के कैंसर को बढ़ने से रोकने या फिर उसके जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। एक शोध में सामने आया है  कि ऐसे लोगों को पैंक्रियाज के कैंसर का सबसे अधिक खतरा होता है, जो ज्यादा धूम्रपान करते हैं, लंबे समय से शुगर के रोगी हैं या खराब भोजन करते हैं, जो शरीर के स्वास्थ्य के लिए खराब है। ये सभी चीजें पैंक्रियाज के कैंसर का खतरा बढ़ाती हैं। इसलिए आपको धूम्रपान छोड़कर, स्वस्थ वजन बनाए रखना चाहिए। हर रोज व्यायाम करना चाहिए और स्वस्थ भोजन खाना चाहिए। ये ऐसे कदम हैं, जो आपके समग्र स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव डाल सकते है। 

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कैंसर से बचने के लिए डाइट टिप्स

आपको अपने भोजन में स्वस्थ खाना शामिल करना चाहिए। जैसे- फल, सब्जियां और साबुत अनाज। शरीर में ब्रोकन सेल्स को ठीक करने के लिए आपको प्रोटीन युक्त भोजन करने की जरूरत होती है। आपको अपने भोजन में प्रोटीन के लिए अखरोट का मक्खन, कम फैट वाले डेयरी, बीन्स, सोया उत्पाद और ग्रिल्ड या उबला हुआ चिकन, मछली और अंडो का सेवन करना चाहिए।

ये सभी टिप्स पैंक्रियाज के कैंसर यानी पैंक्रियाटिक कैंसर को पहचानने और उससे बचने में आपकी मदद कर सकते हैं।

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