सेल्युलोज से बना ये 'स्मार्ट स्टीकर' बताएगा आपके स्वास्थ्य का हाल, बीमारी की देगा चेतावनी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 23, 2018

सोचिए, अगर कोई बीमारी होने से पहले ही आपको पता चल जाए कि आप इन बीमारियों का शिकार होने वाले हैं, तो कितना अच्छा हो। ऐसे में आप सही समय पर इलाज या परहेज करके उन बीमारियों से बच सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि जल्द ही ये कल्पना हकीकत में बदलने वाली है। जी हां, वैज्ञानिकों ने हाथ में पहनने वाला एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाया है, जो आपके स्वास्थ्य और सेहत संबंधी सभी जानकारियां आपको देगा। ये डिवाइस सेल्युलोज से बना है। खास बात ये है कि ये डिवाइस इतना पतला है कि इसे आप हाथ पर स्टीकर की तरह चिपका सकते हैं। ये रिसर्च प्रूडू यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की है, जिसे हाल में ही 'एसीएस एडवांस्ड मैटीरियल्स एंड इंटरफेसेज़' नामक पत्रिका में छापा गया है।

'स्मार्ट स्टीकर' रखेंगे स्वास्थ्य पर नजर

ये स्मार्ट वॉच से एडवांस तकनीक है। जिस तरह स्मार्ट वॉच आजकल कैलोरीज, फुट स्टेप्स, ब्लड सर्कुलेशन आदि पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं उसी तरह अब शरीर के अंगों के स्वास्थ्य और पूरे शरीर की सेहत के बारे में बताने के लिए 'स्मार्ट स्टीकर' का प्रयोग किया जा सकेगा। प्रूडू यूनिवर्सिटी के प्रॉफेसर रैमसेज़ मार्टनेज कहते हैं, "हमने पहली बार एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाया है, जिसे त्वचा पर चिपकाया जा सकेगा। इसकी लागत कम करने के लिए इसमें कागज का भी इस्तेमाल किया गया है।"

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सेल्युलोज से बना है ये स्टीकर

ये स्मार्ट स्टीकर्स सेल्युलोज से बने हैं इसलिए त्वचा पर लगाते ही, ये त्वचा का हिस्सा बन जाते हैं और सांस भी लेते हैं। आपको बता दें कि सेल्युलोज एक ऐसा तत्व है, जिससे पौधों की कोशिकाओं की दीवार बनती है। इस स्टीकर से स्वास्थ्य संबंधी खतरों को समय से जाना जा सकेगा। इसे पहनने से आपके अंदरूनी अंगों के स्वास्थ्य, आपकी नींद आदि पर नजर रखने में आसानी होगी।

पसीने, पानी, धूल और तेल से नहीं खराब होगा ये स्टीकर

चूंकि इस स्टीकर को बनाने में कागज का इस्तेमाल किया गया है इसलिए इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि ये पसीने, पानी, धूल और ऑयल आदि से खराब न हो। इसके लिए इन स्टीकर का बाहरी आवरण ऐसे मॉलीक्यूल से बना है, जिनपर धूल, पानी और बैक्टीरिया असर नहीं कर पाएंगे।

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एथलीट्स और मरीजों के लिए फायदेमंद

शोधकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसका इस्तेमाल मरीजों की नींद की निगरानी करने के लिए कर सकते हैं। इसके अलावा एथलीट व्यायाम के दौरान या तैरने के दौरान अपनी सेहत की निगरानी के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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