वायरस और बैक्टीरिया से बचाव में फायदेमंद हो सकता है 'सांस लेने का ये तरीका', वायरल बीमारियों का खतरा होगा कम

इस खास तरीके से सांस लेकर आप कोरोना वायरस सहित दूसरी वायरल बीमारियों से बच सकते हैं। ऐसे सांस लेने से मर जाते हैं ज्यादातर वायरस-बैक्टीरिया।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Jun 24, 2020Updated at: Jun 24, 2020
वायरस और बैक्टीरिया से बचाव में फायदेमंद हो सकता है 'सांस लेने का ये तरीका', वायरल बीमारियों का खतरा होगा कम

कोरोना वायरस एक तरह का वायरल इंफेक्शन है। वायरल इंफेक्शन (Viral Infection)  का मतलब है- ऐसा संक्रमण जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले सभी लोगों में फैल जाए। आमतौर पर सभी वायरल बीमारियां या इंफेक्शन व्यक्ति के छींकने (Sneeze), खांसने (Cough) और बात करने (Talking) से फैलते हैं। कोरोना वायरस की चर्चा इन दिनों इसलिए है क्योंकि ये संक्रमण महामारी (Coronavirus Pandemic) बन चुका है। लेकिन हमारे आसपास सैकड़ों वायरल बीमारियां और संक्रमण फैलते रहते हैं। कुछ डॉक्टर्स का मानना है कि अगर आप अपने सांस लेने की आदत (Breathing Righ Way) में थोड़ा सा बदलाव करें, तो आप इस तरह के वायरस इंफेक्शन से लड़ने के लिए तैयार हो सकते हैं।

सांस लेना हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्रियाओं में से एक है। इसलिए बीमारियों से बचने के लिए और वायरल इंफेक्शन को रोकने के लिए सांस लेने का सही तरीका क्या है और ये कैसे फायदेमंद है, हम आपको बताते हैं।

right way of breathing

क्या है सांस लेने का सही तरीका? (Righr Way of Breathing)

योग विज्ञान (Yoga Science) में सांस लेने का सही तरीका ऐसे बताया गया है- नाक से सांस को खीचें और मुंह से बाहर निकाल दें। यही तरीका योग और ध्यान (Meditation) की कक्षाओं में बताया जाता है। दरअसल आधुनिक वैज्ञानिक रिसर्च के द्वारा भी यही पता चलता है कि इस खास तरीके से, यानी नाक से सांस लेना (Nasal Breathing) शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे फेफड़े स्वस्थ रहते हैं और वायरल इंफेक्शन आदि का खतरा कम होता है। नीचे हम आपको इसके वैज्ञानिक कारण बता रहे हैं।

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इस तरह से सांस लेना क्यों है फायदेमंद?

सांस लेने के दौरान हवा हमारे शरीर में प्रवेश करती है। लेकिन नाक से सांस खींचने की प्रक्रिया पूरी तरह शरीर के विज्ञान पर आधारित है। जब आप मुंह से सांस लेते हैं, तो हवा सीधे आपके म्यूकस मेंब्रेन से होती हुई फेफड़ों में पहुंचती है। इसके बीच में कोई अवरोध नहीं आता है। ऐसे में अगर आपके आसपास कोई वायरस या बैक्टीरिया है, तो वो भी सीधे आपके फेफड़ों या म्यूकस मेंब्रेन में पहुंच जाता है। जबकि नाक से सांस लेने में यही हवा एक खास हिस्से से होकर गुजरती है, जहां इस वायरस या बैक्टीरिया को रोकने के लिए प्राकृतिक रूप से एक गैस का चैंबर होता है। आइए इसे और विस्तार से समझिए।

nasal breathing benefits

नाक में होता है वायरस-बैक्टीरिया को मारने वाला गैस चैंबर

हमारे शरीर के अलग-अलग हिस्सों में एक खास गैस हर समय बनती रहती है, जिसे नाइट्रिक ऑक्साइड (Nitric Oxide) कहते हैं। इस गैस के मॉलीक्यूल हमारे शरीर और सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे ही नाइट्रिक ऑक्साइड को बनाने वाला एक स्थान नाक के पिछले हिस्से में होता है, जिसे नेजल कैविटी (Nasal Cavity) कहते हैं। नेजल कैविटी हम सभी की नाक के पीछे हवा से भरा हुआ स्थान होता है, इसलिए ऐसा कह सकते हैं कि ये नाइट्रिक ऑक्साइड से भरा गैस का एक चैंबर जैसा है, जिससे होकर सांस द्वारा खींची गई हवा को गुजरना होता है। इस नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) के कारण ही सांस लेते ही आपके शरीर में ब्लड का सर्कुलेशन बढ़ जाता है और खून में ऑक्सीजन घुलने लगती है। इसलिए जब आप नाक से सांस लेते हैं, तो वायरस और बैक्टीरिया आपके फेफड़ों में सीधे न पहुंचकर इस नेजल कैविटी से गुजरते हैं। सांस के द्वारा ये नाइट्रिक ऑक्साइड भी आपके फेफड़ों में पहुंचती है।

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नाइट्रिक ऑक्साइड वायरस को मारने में है सक्षम

पिछली बार 2004 में जब SARS बीमारी फैली थी, उस समय इस बारे में कई अध्ययन किए गए थे। रिसर्च में पाया गया कि नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) में एंटीवायरल गुण होते हैं। रिसर्च के अनुसार नाइट्रिक ऑक्साइड के मॉलीक्यूल कोरोना वायरस के वायरल प्रोटीन और जेनेटिक मैटीरियल को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे वायरस निष्क्रिय हो जाता है। एक छोटे क्लीनिकल अध्ययन में नाइट्रिक ऑक्साइड को SARS बीमारी और निमोनिया से प्रभावित लोगों में फायदेमंद भी पाया गया था। हालांकि इस बारे में अभी और अध्ययन करने की जरूरत है।

लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और दूसरे नियमों के साथ अगर सांस लेने का ये तरीका भी जारी रखा जाए, तो वायरस को हराने में बहुत बड़ी जीत हासिल हो सकती है।

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