Bharadvaja's Twist: भरद्वाजासन 1 और 2 को करने से सेहत को होते हैं ये 7 फायदे, जानें इन दोनों को करने की विधि

भरद्वाजासन-1 और भरद्वाजासन-2 को करने से सेहत को कई तरीकों से फायदा मिलता है। जानते हैं इन दोनों को करने की विधि और मिलने वाले फायदे

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: May 11, 2021Updated at: May 11, 2021
Bharadvaja's Twist: भरद्वाजासन 1 और 2 को करने से सेहत को होते हैं ये 7 फायदे, जानें इन दोनों को करने की विधि

योग करने से न केवल शारीरिक मजबूती आती है बल्कि व्यक्ति मानसिक रूप से भी तंदुरुस्त बनता है। आज हम बात कर रहे हैं भरद्वाजासन की। इस आसन को अंग्रेजी में सीटेड ट्विस्ट पोज भी कहते हैं। इस आसन का नाम ऋषि भारद्वाज के नाम पर रखा गया है। भरद्वाजासन को करने से न केवल रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है बल्कि डिप्रेशन, तनाव, कूल्हे का दर्द, कंधों का दर्द आदि से भी छुटकारा मिलता है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि भरद्वाजासन को करने से सेहत को क्या-क्या लाभ (benefits of Bharadvajasana) होते हैं? साथ ही हम जानेंगे कि भरद्वाजासन को करने की विधि (Steps of Bharadvajasana) और इसके दौरान बरतने वाले सावधानी क्या है? पढ़ते हैं आगे...

भरद्वाजासन को करने की विधि (Steps of Bharadvajasana)

भरद्वाजासन दो तरीकों से किया जाता है जिनका नाम है भरद्वाजासन-1 और भरद्वाजासन-2

1 - भरद्वाजासन-1 को करने की विधि

सबसे पहले जमीन पर योगा मैट बिछाएं और उस पर बैठ जाएं। अब अपने दोनों घुटनों को मोड़ें और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अपने घुटनों को कुछ इस तरीके से मोड़ें की आपके शरीर का पूरा वजन दाएं कूल्हे पर आ जाए। दोनों पैर एक ही दिशा में होनी चाहिए। जिस दिशा में आपका पैर है उसी दिशा में आपका सर भी होना चाहिए और आपके हाथ विपरीत दिशा में होने चाहिए जैसा की तस्वीर में दिखाया गया है। अब इस अवस्था में तकरीबन 30 से 40 सेकंड तक रहें। आप अपनी क्षमता के अनुसार भी अपना समय निर्धारित कर सकते हैं। अब पुरानी स्थिति में आने के लिए सबसे पहले अपने सर को सामने लेकर आएं। उसके बाद अपने हाथों को जमीन पर रखें और फिर मुड़े हुए घुटनों को सीधा कर लें। इस दौरान गहरी लंबी सांस लेते रहें। 

2 - भरद्वाजासन-2 करने की विधि

सबसे पहले जमीन पर योगा मैट बिछाएं। उस पर बैठ जाएं। दंडासन की स्थिति में आने के बाद अपने पैरों को आगे की तरफ खोलें और पैरों के साथ अपने हाथों को भी आगे की तरफ लेकर जाएं। फिर अपने दाएं घुटने को पीछे की तरफ लेकर जाएं और बाएं घुटने को दाएं घुटने की जांघ पर रखें। अब दाएं हाथ को बाएं हाथ के घुटने के नीचे रखें। ध्यान रहें, आपकी हथेली जमीन पर छूने चाहिए और बाएं हाथ के माध्यम से जांघ पर रखें पैर को पकड़ने की कोशिश करें। जैसा की तस्वीर में दिखाया गया है। आप का सिर सामने की तरफ होना चाहिए। अब ऐसी स्थिति में तकरीबन 30 से 40 सेकंड तक रहें। आप अपनी क्षमता के अनुसार भी समय निर्धारित कर सकते हैं। इस दौरान लंबी गहरी सांस लेते रहें। दोबारा से पुरानी स्थिति में आने के लिए सबसे पहले बाएं हाथ से पकड़े पैर को छोड़ें। उसके बाद दाएं हाथ को घुटने के नीचे से निकालें। फिर अपने दोनों पैरों को सीधा करें और अपने दोनों हाथों को भी सीधा करें और अपनी पुरानी स्थिति में थोड़ी देर बैठ जाएं। लंबी गहरी सांस लें और कुछ समय पश्चात इस प्रक्रिया को दोहराएं। शुरुआत में हो सकता है कि आपके हाथ पैर को न छू पाएं। ऐसे में अपनी क्षमता के अनुसार पैरों को पकड़ने की कोशिश करें।

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भरद्वाजासन को करने से मिलने वाले लाभ (benefits of Bharadvajasana)

भरद्वाजासन को करने से सेहत को बेहद लाभ मिलता है। जानते हैं इसके फायदे-

1 - इस आसन को करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है। साथ ही गुर्दे के काम में सुधार आता है।

2 - जो यह आसन नियमित रूप से करता है उनके जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है। साथ ही कूल्हे, टखने, कडाई के जोड़ भी मजबूत होते हैं।

3 - इस आसन को करने से साइटिका जैसी बीमारी भी दूर हो जाती है।

4 - यह आसन गर्दन का दर्द और पेट के निचले हिस्से में हो रहे दर्द को दूर कर सकता है।

5 - इस आसन को करने से पैरा सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम बढ़ता है।

6 - यह आसन कंधों में खिंचाव लाने के साथ-साथ कूल्हों पर भी खिंचाव लाता है।

7 - इस आसन को करने से रक्त परिसंचरण के कार्य में भी सुधार आता है।

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भरद्वाजासन को करने से पहले बरतने वाली सावधानी

1 - जो भरद्वाजासन को करते हैं उन्हें बता दें कि जिन लोगों को दस्त, डायरिया या लूज मोशन की परेशानी है उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। साथ ही सिर में दर्द है या माइग्रेन की स्थिति में भी आसन को करने से बचें। जो लोग अनिद्रा के शिकार हैं या निम्न रक्तचाप जेसी समस्याओं से ग्रस्त हैं वे भी इस आसन को ना करें। जिन लोगों की रीढ़ की हड्डी में किसी प्रकार की चोट आई है या घुटनों में या कूल्हों में दर्द है तो वे भी इस आसन को करने से बचें।

भरद्वाजासन को करने से पहले व्यक्ति को विरासन, त्रिकोणासन और बुद्ध कोणासना करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर में असामान्य दर्द नहीं होता है। वहीं इस आसन को करने के बाद अर्धमत्स्येंद्रासन को करना जरूरी होता है। ऐसा करने से भरद्वाजासन का सेहत पर दोगुना प्रभाव पड़ता है।

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि भरद्वाजासन-1 और भरद्वाजासन-2 को करने से सेहत को कई तरीकों से फायदा मिलता है। लेकिन ऊपर बताई गई सावधानी का पालन करना भी जरूरी है। यह आसन शुरुआत में थोड़ा कठिन मालूम हो सकता है। ऐसे में आप किसी एक्सपर्ट की मदद से इस आसन को कर सकते हैं। जिन लोगों ने सर्जरी करवाई है या किसी प्रकार का ऑपरेशन करवाया है वे भी इस आसन को अपनी दिनचर्या में जोड़ने से पहले एक बार एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। गर्भवती महिलाएं या स्तनपान कराने वाली महिलाएं अपने इस आसन को अपनी दिनचर्या में जोड़ने से पहले एक बार एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। इस आसन को करते वक्त हो सकता है कि आपके घुटनों और कूल्हों पर ज्यादा दबाव पड़ें। ऐसे में घबराए नहीं शुरुआत में इस तरीके के लक्षण देखना आम बात है। ये आसन मुख्य रूप से सुबह खाली पेट जल्दी उठकर करना चाहिए। ऐसा करने से न केवल पाचन क्रिया को लाभ मिलता है बल्कि शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। अगर आप सुबह ये आसन करने में असमर्थ हैं तो आप शाम को भी इस आसन को कर सकते हैं। लेकिन इस आसन को करने से पहले या बाद में लगभग 3 से 4 घंटे तक कुछ न खाएं। 

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