प्रीमेच्योर डिलीवरी का कारण हो सकता है गर्भनाल में बैक्टीरिया, जानें टिप्स

प्रीमेच्योर डिलीवरी यानी समय से पहले बच्चा पैदा होना कई बार मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। आमतौर पर 35-41 हफ्तों से पहले डिलीवरी होना प्रीमेच्योर डिलीवरी कहलाता है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Sep 17, 2018Updated at: Sep 17, 2018
प्रीमेच्योर डिलीवरी का कारण हो सकता है गर्भनाल में बैक्टीरिया, जानें टिप्स

प्रीमेच्योर डिलीवरी यानी समय से पहले बच्चा पैदा होना कई बार मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। आमतौर पर 35-41 हफ्तों से पहले डिलीवरी होना प्रीमेच्योर डिलीवरी कहलाता है। समय से पहले प्रसव के कारण शिशु को कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती हैं। मगर क्या आपको पता है कि प्रीमेच्योर डिलीवरी का कारण क्या होता है? वैज्ञानिकों ने पाया है कि समय से पहले प्रसव के ज्यादातर मामलों में प्लेसेंटा यानी गर्भनाल में संक्रमण को वजह पाया गया।

क्या है प्रीमेच्योर डिलीवरी

गर्भावस्‍था के दौरान सही तरीके से देखभाल और नियमित जांच न कराई जाये तो समय से पहले प्रसव हो सकता है। सामान्‍यतया 42 सप्‍ताह के बाद प्रसव होने पर मां और बच्‍चा दोनों स्‍वस्‍थ रहते हैं। 42 सप्‍ताह में बच्‍चे का शरीर पूर्ण विकसित हो जाता है, इससे पहले यानी 35 से 41 सप्‍ताह में अगर प्रसव हो तो बच्‍चा पूरी तरह स्‍वस्‍थ नहीं रहता और बाद में कई समस्‍यायें भी होती हैं।

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क्यों खतरनाक है गर्भनाल में संक्रमण

गर्भावस्था महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण समय होता है मगर इस समय कई तरह के खतरे भी होते हैं। शिशु को संक्रमण से बचाने के लिए मां को अपने खान-पान और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। कई बार मां को होने वाला छोटा-मोटा संक्रमण भी उसके या शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। गर्भावस्था में गर्भनाल में होने वाले संक्रमण के कारण समय पूर्ण प्रसव का खतरा होता है। हालांकि स्वस्थ गर्भनाल में भी कुछ जीवाणु पाए जाते हैं, मगर मां का इम्यून सिस्टम उनसे लड़ता है। ऐसे में अगर संक्रमण बढ़ जाए, तो गर्भपात का भी खतरा होता है।

किन वायरस से है खतरा

वैज्ञानिकों के अनुसार गर्भपात या समयपूर्व प्रसव के लिए कई वायरस जिम्मेदार होते हैं। आमतौर पर माइक्रोप्लाज्मा और यूरियाप्लाज्मा जैसे वायरस के बढ़ जाने से मां को 35 से 41 सप्ताह में ही प्रसव हो सकता है। इन संक्रमणों के बहुत ज्यादा हो जाने के कारण गर्भपात की भी संभावना बढ़ जाती है।

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प्रीमेच्योर डिलीवरी से बचने के उपाय

प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा बढ़ाने वाले सभी कारकों पर लगाम बहुत जरूरी है क्योंकि समय से पूर्व शिशु का पैदा होना उसे कई तरह के रोगों का शिकार बना सकता है या रोगों से लड़ने की उसकी क्षमता को कम कर सकता है। इसके अलावा इससे कई बार मां के स्वास्थ्य को भी खतरे होते हैं।

  • गर्भावस्‍था के दिनों में भरपूर नींद और आराम बहुत जरूरी है। कम से कम 7 घंटे की नींद जरूर लें।
  • गर्भवती महिलाओं को पपीता का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है, इसमें लैटेक्‍स होता है जो गर्भपात का कारण भी बन सकता है। इसके अलावा अनानास, आडू खाने से परहेज करें।
  • गर्भावस्‍था के दौरान शराब पीने और धूम्रपान करने समय पूर्व प्रसव होने का खतरा अधिक रहता है।
  • मोटापे से ग्रस्‍त महिलाओं में समयपूर्व प्रसव होने की संभावना अधिक होती है, इसलिए मोटापे पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है।
  • तनाव गर्भावस्‍था का सबसे बड़ा दुश्‍मन है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को तनाव नहीं लेना चाहिए।

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