घर के पर्दे बना रहे हैं आपको अस्थमा के मरीज, जानें कैसे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 07, 2018
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Quick Bites

  • भारत में हर 10वां व्यक्ति अस्थमा का मरीज है।
  • दुनिया भर में अस्थमा के 30 करोड़ से भी ज्यादा मरीज हैं। 
  • वातावरण में बदलाव के कारण अस्‍थमा के रोगियों की समस्याएं बढ़ जाती हैं।

अस्थमा एक ऐसा रोग है जिसकी चपेट में आने के बाद व्यक्ति को दिन रात अपने स्वास्थ्य को लेकर चौकसी बरतनी पड़ती है। अस्‍थमा के रोगियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति बहुत सावधान रहना पड़ता है। यह सावधानी सिर्फ घर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर भी रखने की जरूरत होती है। स्वयं को धूल से बचाने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। चिकित्सकों का मानना है कि वातावरण में हो रहे बदलाव के कारण अस्‍थमा के रोगियों में श्वास संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। अगर आंकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में अस्थमा के 30 करोड़ से भी ज्यादा मरीज हैं। भारत में हर 10वां व्यक्ति अस्थमा का मरीज है।

वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर डॉ राजकुमार ने बताया कि हवा चलने या फिर झाड़ू लगने के कारण घर के कार्पेट और पर्दों पर धूल जम जाती है। जिस पर किसी का ध्यान नहीं जाती है। कुछ लोग पर्दों को किसी कपड़े से साफ करते हैं। बावजूद इसके पर्दों पर भारी मात्रा में वायरस और फंगस जम जाते हैं। ऐसे में पर्दों पर जमे बैक्टीरिया सांस लेने पर शरीर के अंदर चले जाते हैं, जिससे अस्थमा हो सकता है। डॉ राजकुमार कहते हैं कि यदि लोग घर में कार्पेट और पर्दे लगाने के शौकीन हैं, तो उन्हें उसकी सफाई का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। इनकी वैक्यूम क्लीनर से सफाई करनी चाहिए। 

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अस्थमा के लक्षण

  • शरीर में बेचैनी महसूस होती है
  • कई बार सिर भारी-भारी लगना और एक हिस्से में दर्द होना
  • जोर-जोर से सांस लेने के कारण थकावट महसूस होना
  • अधिक चलने के बाद उल्टी महसूस होना 
  • सिगरेट-बीड़ी के धुंए से गला बंद होना या किसी तरह की एलर्जी महसूस होना
  • अस्थमा से बचने के लिए करें ये काम

घर में साफ सफाई

ऐसी जगहों पर खास साफ सफाई रखें जहां धूल ज्यादा जमती है। क्योंकि दमा पैदा करने वाले एलर्जेन आपको नुकसान पहुंचा सकते है। घर के अंदर और बाहर वातावरण में मौजूद नमी आपके लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। दिन में घर के अंदर धूप आने दें और शाम होते ही खिड़कियां और दरवाज़े बंद कर दें, जिससे वायु की गुणवत्ता बनी रहे।

छत को रखें साफ

अगर आप अस्थमा पीड़ित हैं और ज्यादातर वक्त घर में रहते हैं तो ध्यान रखें कि कमरों और हॉल की सफाई के साथ ही छत की सफाई करना भी बहुत जररूरी है। छत पर झाड़ू लगाने के बजाय पानी से धुलाई करें। इससे घूल भी नहीं उड़ेगी और छत साफ भी हो जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि छत की गंदगी कहीं ना कहीं हमारे कमरों से होते हुए हम तक पहुंचती है। इसलिए छत की सफाई जरूर करें।

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अस्थमा के लिए घरेलू नुस्खे

  • शरीर की भीतरी एलर्जी को दुरुस्‍त करने में मेथी काफी सहायक होती है। मेथी के कुछ दानों को एक गिलास पानी के साथ तब तक उबालें जब तक पानी एक तिहाई न हो जाए। इसमें शहद और अदरक का रस मिला कर रोज सुबह-शाम सेवन करें।
  • आधा कप अजवाइन का रस और इसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर सुबह और शाम भोजन के बाद लेने से अस्‍थमा नष्ट हो जाता है। अस्‍थमा से बचाव के लिए अजवाइन के पानी से भाप लेना भी फायदेमंद होता है। इसके लिए पानी में अजवाइन डालकर इसे उबालें और पानी से उठती हुई भाप को लें। इससे श्वास-कष्ट में तुरंत राहत मिलती है।
  • अदरक और लहसुन दोनों ही अस्‍थमा के इलाज में फायदेमंद होते हैं। अस्‍थमा की शुरुआती अवस्‍था में 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबाल कर इस मिश्रण का रोजाना सेवन करने से लाभ मिलता है। इसके अलावा अदरक की गर्म चाय में लहसुन की दो कलियां मिलाकर सुबह-शाम पीकर भी अस्‍थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • शहद को अस्‍थमा में काफी लाभदायक माना जाता है। शहद बलगम को ठीक करता है, जो अस्‍थमा की परेशानी पैदा करता है। अस्‍थमा का अटैक आने पर शहद को सूंघने से भी लाभ मिलता है। इसके अलावा दिन में तीन बार एक गिलास गुनगुने पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से अस्‍थमा में निश्चित रूप से लाभ मिलता है।

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