Amyloidosis: क्या है एमाइलॉयडोसिस बीमारी? जिससे जूझ रहे हैं पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति एमाइलॉयडोसिस की बीमारी से जूझ रहे हैं, जानें क्या है यह बीमारी और इसके बारे में जरूरी बातें।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Jun 13, 2022Updated at: Jun 13, 2022
Amyloidosis: क्या है एमाइलॉयडोसिस बीमारी? जिससे जूझ रहे हैं पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ

पाकिस्तानी सेना के पूर्व तानाशाह जनरल और पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं। उनके परिवार द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक वे एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं जिसकी वजह से उनके शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस बीमारी में अब रिकवरी की कोई गुंजाइश नहीं बची हुई है। इस बीमारी की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती होने पर मीडिया में यह खबरें भी चली थीं कि परवेज मुशर्रफ की मौत हो गयी है लेकिन उनके परिवार ने इस खबर को अफवाह करार दिया। परवेज मुशर्रफ एमाइलॉयडोसिस (Amyloidosis in Hindi) नामक बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी में मरीज के शरीर के अंग बेकामिल हो जाते हैं। शरीर में एमाइलॉइड नामक प्रोटीन के जमा होने से यह बीमारी किडनी, हार्ट, ब्रेन समेत शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है। आइए विस्तार से जानते हैं क्या है एमाइलॉयडोसिस की बीमारी? किन लोगों को इससे रहता है ज्यादा खतरा और लक्षण व बचाव।

क्या है एमाइलॉयडोसिस की बीमारी? (What is Amyloidosis)

एमाइलॉयडोसिस शरीर में प्रोटीन जमा होने की वजह से होने वाली एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में मरीज के शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं। जिसकी वजह से उनका शरीर लगभग निष्क्रिय हो जाता है। इस बीमारी के बारे किये गए शोध और अध्ययन यह बताते हैं कि एमाइलॉयडोसिस शरीर में एमाइलॉइड नामक प्रोटीन के जमा होने के कारण होती है। यह बीमारी शरीर में एक अंग या एक से अधिक अंग को एकसाथ प्रभावित कर सकती है। इस बीमारी में शरीर में बनने वाला एमाइलॉयड प्रोटीन किसी भी अंग जैसे हार्ट, किडनी और लिवर आदि में जमना शुरू हो जाता है जिसकी वजह से शरीर के अंगों को काम करने में दिक्कत शुरू होती है। कुछ लोगों में यह बीमारी आनुवांशिक कारणों से होती है तो वहीं कुछ में कई अन्य कारण जिम्मेदार माने जाते हैं। गौरतलब हो कि एमाइलॉयड प्रोटीन शरीर में नहीं पाया जाता है, यह कई अलग-अलग प्रोटीन से मिलकर बना होता है और आमतौर पर बोन मैरो में बनता है।

Amyloidosis in Hindi Symptoms Causes Prevention

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एमाइलॉयडोसिस की बीमारी के लक्षण (Amyloidosis Symptoms in Hindi)

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक शरीर में जब एमाइलॉइड नामक प्रोटीन जमा होने लगता है तो इसकी वजह से प्रभावित अंगों की कोशिकाएं सही से काम नहीं कर पाती हैं। इस बीमारी में दिखने वाले लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते है। मरीज में दिखने वाले ज्यादातर लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि उनके शरीर का कौन सा हिस्सा या अंग इस समस्या से प्रभावित हुआ है। आमतौर पर एमाइलॉयडोसिस के लक्षण इस प्रकार से हैं - 

  • शरीर में सूजन, थकान और कमजोरी।
  • हाथ-पैर में झुनझुनी और दर्द।
  • स्किन के रंग में बदलाव।
  • दिल के धड़कन का अनियमित होना।
  • सांस लेने में तकलीफ।
  • वजन कम होना।
  • आंखों के आसपास बैंगनी रंग के धब्बे।
  • हल्की सी चोट लगने पर ब्लीडिंग।

एमाइलॉयडोसिस की बीमारी के कारण (What Causes Amyloidosis)

शरीर में एमाइलॉइड प्रोटीन के जमा होने के कारण यह समस्या शुरू होती है। दरअसल यह प्रोटीन शरीर में पहले से मौजूद नहीं होता है लेकिन इसका निर्माण अलग-अलग प्रोटीन को मिलाकर किया जा सकता है। ज्यादातर लोगों में एमाइलॉयडोसिस आनुवांशिक कारणों से होता है। कुछ लोगों में एमाइलॉयडोसिस का कारण लंबे समय तक डायलिसिस, सूजन से जुड़ी बीमारियां आदि भी हो सकती हैं। चूंकि यह एक दुर्लभ बीमारी है और बहुत कम लोगों में देखी जाती है इसलिए इसके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी मौजूद नहीं है। इस बीमारी को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक अभी भी शोध कर रहे हैं।

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एमाइलॉयडोसिस का इलाज और बचाव (Amyloidosis Treatment And Prevention Tips)

एमाइलॉयडोसिस की बीमारी में मरीज का इलाज करने के लिए सबसे पहले डॉक्टर उसकी अच्छी तरह से जांच करते हैं। इस बीमारी में मरीज का इलाज उसके शरीर में बीमारी के प्रभाव के आधार पर होता है। बीमारी की जांच के लिए शुरूआत में मरीज की इमेजिंग जांच की जाती है और कई अन्य जांच से गुजरने के बाद मरीज का इलाज शुरू किया जाता है। इस बीमारी में मरीज की स्थिति बिगड़ने पर कीमोथेरेपी या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की इस्तेमाल किया जा सकता है। एमाइलॉयडोसिस एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी है और इससे बचाव के लिए मरीज को समय-समय पर अपना हेल्थ चेकअप जरूर करवाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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