आंखों की रोशनी कम हो रही है तो कराएं कॉर्निया ट्रांसप्‍लांट, पहले से तेज होगी नजर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 10, 2018
Quick Bites

  • जिस प्रकार एक खिड़की प्रकाश को कमरे के अंदर पहुंचाती है,
  • ठीक उसी प्रकार कॉर्निया प्रकाश को आंखों के भीतर पहुंचाती है।
  • यह प्रकाश को आंख में फोकस भी करती है, जिससे हमें साफ दिखता है।

कॉर्निया (पुतली) आंख की पारदर्शी, बाहरी सतह है। जिस प्रकार एक खिड़की प्रकाश को कमरे के अंदर पहुंचाती है, ठीक उसी प्रकार कॉर्निया प्रकाश को आंखों के भीतर पहुंचाती है। यह प्रकाश को आंख में फोकस भी करती है, जिससे हमें साफ दिखता है। पुतली को पारदर्शी बनाए रखने में स्टेम सेल का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इन स्टेम सेल को लिम्बल स्टेम सेल कहते हैं। आइए जानते हैं कि किन स्थितियों में कॉर्निया का ट्रांसप्लांट होता है। यह ट्रांसप्लांट किस हद तक कारगर है!

क्या है कॉर्निया ट्रांसप्लांट

कॉर्निया में परेशानी किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है।
किसी बीमारी, आंख के ऑपरेशन के बाद, चोट लगने से कॉर्निया की पारदर्शिता में प्रतिकूल परिवर्तन आ सकता है। ऐसी स्थिति में प्रकाश आंख के भीतर कम जाता है। इस स्थिति में क्षीण दिखाई पड़ता है और आंख में दर्द भी हो सकता है। अगर दवाओं से परिवर्तन नहीं हो पाता तो डॉक्टर कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सलाह देते हैं।
कॉर्निया ट्रांसप्लांट में अपारदर्शी कॉर्निया को नेत्रदान द्वारा प्राप्त हुई पारदर्शी कॉर्निया से ऑपरेशन द्वारा बदल दिया जाता है। पारदर्शिता लौटने से आंखों की रोशनी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

ये भी जानें

  • कॉर्निया ट्रांसप्लांट (पुतली प्रत्यारोपण) में रक्त या पुतली मैच कराने की आवश्यकता नहीं होती।
  • पुतली किसने दान की है, उसका लिंग,धर्म, आंख का रंग क्या है, इन बिंदुओं का ऑपरेशन के सफल होने से कोई संबंध नहीं है।
  • मानव डोनर से पुतली मृत्यु के चंद घंटों (दो घंटे के अंदर) के अंदर ही ले ली जाती है।
  • आई बैंक में नेत्रदान द्वारा प्राप्त हुई पुतली की गुणवत्ता की जांच कुछ टेस्ट के द्वारा की जाती है।
  • कॉर्निया से संबंधित परेशानी से पीडि़त व्यक्ति को पुतली प्रत्यारोपण का अॅापरेशन कराने से पहले भी कुछ टेस्ट कराने पड़ते हैं।
  • पुतली प्रत्यारोपण के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेनी पड़ती हैं और डॉक्टर के निर्देशानुसार समय-समय पर चेकअप कराना अति आवश्यक है।
  • कॉर्निया ट्रांसप्लांट समस्त ऑर्गेन ट्रांसप्लांट में से सबसे सफल और सबसे अधिक किया जाने वाला ट्रांसप्लांट है।

लैमेलर ट्रांसप्लांट

कॉर्निया की पांच लेयर होती है।  
कॉर्निया की सबसे भीतर की लेयर को इन्डोथीलियम कहते हैं। अगर केवल इस लेयर को किसी कारणवश क्षति पहुंचती है, तो पूरी कॉर्निया का ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। इसे डीएसएईके कहते हैं। ऐसे ही पुतली की ऊपरी सतह (जिसे स्ट्रोमा कहते हैं) के अपारदर्शी हो जाने पर ऑपरेशन किया जाता है।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

किसी भी बीमारी,चोट, लंबी गंभीर एलर्जी, जलने, एसिड पडऩे, चूना अथवा कोई केमिकल जाने के उपरांत आंख में स्टेम सेल को क्षति पहुंच सकती है। इसको लिम्बल स्टेम सेल डेफिशिएन्सी (एलएससीडी) कहते हैं। एलएससीडी में समय के साथ पुतली की पारदर्शिता कम हो सकती है। ऐसी अवस्था में स्टेम सेल ट्रांसप्लान्ट किया जा सकता है।

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एक ट्रांसप्लांट यह भी

अगर आंख में हुआ जख्म दवा से ठीक नहीं हो रहा होता है, तो आंख में इंफेक्शन (मवाद) फैलने से रोकने के लिए घाव वाली पुतली को नेत्रदान द्वारा प्राप्त हुई बिना इंफेक्शन वाली पुतली से बदल दिया जाता है। इसका उद्देश्य नेत्र को संक्रमण मुक्त करना है, अन्यथा आंख नष्ट हो सकती है।
डॉ.दिलप्रीत सिंह, नेत्र सर्जन

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