World Alzheimer's Day 2021: इन 7 कारणों से युवाओं में बढ़ रहा है अल्जाइमर रोग, याददाश्त में कमी है पहला संकेत

पिछले कुछ समय में युवाओं और अधेड़ों में भी अल्जाइमर के मामले सामने आने लगे हैं। डॉक्टर से जानें इसके क्या कारण हो सकते हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavUpdated at: Sep 17, 2021 17:28 IST
World Alzheimer's Day 2021: इन 7 कारणों से युवाओं में बढ़ रहा है अल्जाइमर रोग, याददाश्त में कमी है पहला संकेत

अल्जाइमर की शुरुआत चीजों को भूलने, लोगों का नाम भूलने आदि से होती है और धीरे-धीरे मस्तिष्क इतना कमजोर हो जाता है कि व्यक्ति घर का रास्ता, लोगों के चेहरे, अपने घर-परिवार के सदस्यों को भी भूलने लगता है। अल्जाइमर धीरे-धीरे दिमाग को खोखला कर देता है। अल्माइमर दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारी है, जिसके शुरुआती संकेत बेहद सामान्य होने के कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। अल्जाइमर के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए दुनियाभर में 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस यानी World Alzheimer's Day के रूप में मनाया जाता है।

आमतौर पर अल्जमाइर को बूढ़ों की बीमारी माना जाता है क्योंकि इसके ज्यादातर शिकार लोग 50 साल की उम्र के बाद वाले होते हैं। मगर पिछले कुछ सालों में युवाओं में भी अल्जाइमर के मामले सामने आने लगे हैं। शारदा हॉस्पिटल, नोएडा के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. विकास भारद्वाज बताते हैं युवाओ मे अल्ज़ाइमर की समस्या बढ़ती जा रही है जिसके अनेक कारण हो सकते है। जैसे कि लगातार शराब का सेवन करना, धूम्रपान करना, नींद पूरी न होना, मोबाइल और लैपटॉप का अधिक इस्तेमाल करना, एक्सरसाइज न करना, आदि। ज्यादा सोचने से ,काम के प्रेशर से, फैमिली के टास्क को पूरा करना यह भी एक कारण हो सकता है। लाइफस्टाइल मे परिवर्तन करके ,अच्छी नींद लेके, योग ,एक्सरसाइज करके इससे बचा जा सकता है। आइए आपको बताते हैं कि अल्जाइर को बढ़ाने वाले जोखिम कारक और इसके इलाज के बारे में।

क्यों होता है कम उम्र में अल्जाइमर

कम उम्र में अल्जाइमर होने के कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। हालांकि ये बीमारी युवाओं में भी बढ़ रही है। कम उम्र में अल्जाइमर की बीमारी होने का खतरा तब और बढ़ जाता है, अगर पहले घर में कोई नजदीकी रिश्तेदार (माता-पिता या भाई-बहन) इस बीमारी से पीड़ित हो। सामान्य तौर पर, अल्जाइमर परिवार के इतिहास वाले लोगों में आनुवांशिक परीक्षण की कोई भूमिका नहीं होती है और इसके लक्षण नहीं होते हैं। लेकिन अगर कोई पारिवारिक इतिहास है, तो लोगों में अल्जाइमर के लक्षण बढ़ जाते है।

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युवाओं में अल्जाइमर का खतरा बढ़ाने वाले 7 कारण

  • नींद की दिनचर्या में बदलाव
  • मोटापे की समस्या
  • शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना या ज्यादातर समय बैठे रहना
  • धूम्रपान करना
  • हाई ब्लड प्रेशर की समस्या
  • हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या
  • डायबिटीज को कंट्रोल न करना
इन कारकों के बारे में डॉ. विकास भारद्वाज का कहना है कि ये सभी स्थितियां जरूरी नहीं हैं कि अल्जाइमर का कारण बनें। लेकिन हां किसी भी व्यक्ति में अल्जाइमर की आशंका को ये स्थितियां बढ़ा सकती हैं। इसलिए युवाओं को इस बारे में अधिक सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। अगर ये समस्याएं हैं, तो इनका जल्द से जल्द इलाज कराना और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव लाना जरूरी है, वर्ना कई गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

अल्जाइमर रोग का उपचार

अल्जाइमर रोग के उपचार के लिए कोई निश्चित परीक्षण नहीं है। हालांकि, डॉक्टर कुछ मानसिक, शारीरिक, न्यूरोलॉजिकल और इमेजिंग परीक्षण जैसे कि एमआरआई या सीटी स्कैन कर सकता है, ताकि अन्य स्थितियों का पता लगाकर रोग का निदान किया जा सके। लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए, डॉक्टर रोगी के चिकित्सा इतिहास, लक्षण और जीवन शैली के बारे में पूछताछ कर सकते हैं। ये बड़ा दुर्भाग्य है कि अल्जाइमर रोग का कोई इलाज नहीं है। हालांकि, यदि शुरुआती चरण में पता चला है, तो दवाओं द्वारा मस्तिष्क के ऊतकों के डैमेज होने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। इसके अलावा, दवाएं लक्षणों से राहत देने में मदद कर सकती हैं। इस क्षेत्र में बहुत सारे शोध चल रहे हैं और उम्मीद है कि निकट भविष्य में बेहतर रणनीति और उपचार के विकल्प सामने आएंगे।

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अल्जाइमर से कैसे बचें युवा

युवाओं को अल्जाइमर रोग से बचाव के लिए जरूरी है कि वो शुरुआत से ही अपने खानपान और अपनी आदतों का ध्यान रखें। धूम्रपान और शराब की लत अगर है, तो इसे कम करें और धीरे-धीरे छोड़ दें। इसके अलावा तमाम तरह के लाइफस्टाइल से जुड़े रोगों जैसे- हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करके भी अल्जाइमर से बचा जा सकता है।

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