ये 6 जानलेवा बीमारी, जो सिर्फ मच्‍छर के काटने से होती है!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 01, 2018

अगर किसी ने आपको पूछा कि दुनिया में सबसे खतरनाक जानवर क्या है, तो आपका अनुमान क्या होगा? शार्क? मगरमच्छ? बड़े, डरावने, कोर-कुचल वाले दांतों के साथ कुछ अन्य प्राणी? खैर, विश्वास करो या नहीं, लेकिन दुनिया का सबसे घातक जानवर भी सबसे छोटा है। जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी कि मच्‍छर के काटने से एक साल में दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। आज हम आपको मच्‍छर के काटने से होने वाली कुछ जानलेवा बीमारी के बारे में बता रहे हैं। 

 

मलेरिया

मलेरिया मादा मच्‍छर एनाफिलिस के काटने से होता है। इसके काटने पर मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश कर बहुगुणित होते हैं। इससे रक्तहीनता (एनीमिया) के लक्षण उभरते हैं। साथ ही चक्कर आना, सांस फूलना, इत्यादि दिखाई देते हैं। इसके अलावा अविशिष्ट लक्षण जैसे कि बुखार, सर्दी, उबकाई और जुखाम जैसी अनुभूति भी देखे जाते हैं। गंभीर मामलों में मरीज मूर्च्छा में जा सकता है। जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती जाती है, व्यक्ति को ठंड, गर्मी और पसीना आने की क्रियाएं एक साथ प्रभावित करती हैं।आमतौर पर मलेरिया बस्तियों, तंग गलियों, ग्रामीण क्षेत्रों और महानगरों में भी साफ-सफाई, गंदे पानी और कचरे की निकासी जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं के अभाव के कारण होता है। मलेरिया बुखार में शरीर का तापमान बहुत जल्‍दी-जलदी घटता बढ़ता है, ऐसा लगातार होने पर रक्त की जांच करवानी चाहिए।   

डेंगू 

डेंगू संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यह काफी दर्दनाक और दुर्बल करने वाली बीमारी है। इसके लक्षण मच्छर के काटने के 4-10 दिन बाद दिखाई देते हैं। इसके लक्षणों में व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और शरीर पर फुंसियां हो जाती हैं। विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार, डेंगू होने पर खून में तेजी से संक्रमण फैलता है। इस वजह से मरीज को अस्‍पताल में भर्ती कराना जरूरी हो जाता है। इससे बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है। डेंगू के इलाज के लिए अभी तक कोई विशेष इंजेक्‍शन और दवा नहीं है। इसमें व्‍यक्ति को सामान्‍य बुखार की ही दवा दी जाती है। इस बीमारी में व्‍यक्ति को अधिक से अधिक आराम करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही उसे अधिक से अधिक पानी भी पीने को कहा जाता है।  

चिकनगुनिया 

यह मानव में एडिस मच्छर के काटने से प्रवेश करता है। यह विषाणु ठीक उसी लक्षण वाली बीमारी पैदा करता है जिस प्रकार की स्थिति डेंगू रोग मे होती है। यह एक तकलीफदेह बीमारी है जिसमें तेज बुखार और जोड़ों में दर्द होता है। यह बीमारी शरीर को कमजोर कर देती है। चिकनगुनिया के मामलों में जोड़ों का दर्द कई हफ्तों तक रहता है या इसके संक्रमण की वजह से गठिया भी हो सकता है। इस बीमारी के इलाज के लिए अभी न तो कोई दवा बनी है और न कोई टीका। इससे बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि मच्छरों से बचा जाए। इसमें एक अच्छी बात यह है कि एक बार इस बीमारी का शिकार हो जाने के बाद शरीर में इसकी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और अगली बार संक्रमण की आशंका नहीं रहती है। 

जीका वायरस 

जीका वायरस एंडीज इजिप्टी नामक मच्छर से फैलता है। यह वही मच्‍छर है जो पीला बुख़ार, डेंगू और चिकुनगुनिया जैसे विषाणुओं को फैलाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। संक्रमित मां से यह नवजात में फैलती है। यह ब्लड ट्रांसफ्यूजन और यौन सम्बन्धों से भी फैलती है। हालांकि, अब तक यौन सम्बन्धों से इस विषाणु के प्रसार का केवल एक ही मामला सामने आया है। जीका को पहचानना बहुत मुश्किल है क्योंकि इसके कोई विशेष लक्षण नहीं हैं। लेकिन मच्छरों के काटने के तीन से बारह दिनों के बीच चार में से तीन व्यक्तियों में तेज बुखार, रैशेज, सिर दर्द और जोड़ों में दर्द के लक्षण देखे गये हैं।

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यलो फीवर 

पीतज्वर या 'यलो फीवर' एक संक्रामक तथा तीव्र रोग हैं, जो ईडीस ईजिप्टिआई (स्टीगोमिया फेसियाटा) जाति के मच्छरों के द्वारा होता है। इससे पीड़ित व्यक्ति में पीलिया के लक्षण दिखाई देते हैं और लीवर में खराबी आने के वजह से उसकी त्वचा और आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ जाता है। किसी व्यक्ति में इस वायरस का संक्रमण हो जाने के कुछ दिन बाद ही इस बारे में पता चल पाता है। इसमें मृत्युदर 50 फीसदी है। हालांकि इसके लिए दवा और टीका आदि बना हुआ है लेकिन इसे ठीक होने में कुछ दिन लगते हैं। यह रोग कर्क तथा मकर रेखाओं के बीच स्थित अफ्रीका तथा अमरीका के भूभागों में अधिक होता है।

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जापानी एन्सेफलाइटिस

जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस संक्रमित मच्छर काटने से मनुष्यों में संचरित होता है, जो विशेष रूप से बच्चों में एन्सेफलाइटिस या मस्तिष्क की सूजन का कारण बन सकता है। संक्रमित लोग ठंड, बुखार, गले में दर्द, सिरदर्द, मतली, थकान और उल्टी जैसे हल्के लक्षण विकसित करते हैं, लेकिन यह रोग मस्तिष्क में प्रगति कर सकता है और इस मामले में दौरे, कोमा और पक्षाघात हो सकता है।

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