बात-बात पर बच्चा हो जाता है गु्स्सा और आक्रामक, तो इन 5 तरीकों से समझाएं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 19, 2018
Quick Bites

  • गुस्सा एक नैचुरल इमोशन है इसलिए बच्चों की बात समझें।
  • बार-बार टोकने से बच्चों में खीझ पैदा होने लगती है।
  • ओवर रिएक्ट करने के बजाय बच्चे को प्यार से समझाएं।

आमतौर पर सभी बच्चे अपनी जिद पूरी न होने पर गुस्सा करते हैं और रोते हैं। मगर कुछ बच्चों को सामान्य से ज्यादा गुस्सा आता है और वो आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे बच्चों में तेज गुस्सा करने और मार-पीट करने की बुरी आदत भी देखी जाती है। बच्चों के स्वभाव में ये परिवर्तन कुछ तो हार्मोन्स की गड़बड़ी के कारण होता है लेकिन ज्यादातर इसका कारण उसके आसपास का माहौल ही होता है। अगर आपका भी बात-बात पर हो जाता है आक्रामक, तो ये 5 टिप्स आपकी मदद करेंगी।

अपने व्यवहार में करें बदलाव

आमतौर पर बच्चों के गुस्सा होने पर मां-बाप उन्हें मार-पीटकर समझाने की कोशिश करते हैं। ऐसे व्यवहार से बच्चा शांत हो सकता है मगर उसके की भावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती है। इसलिए गुस्से में अगर बच्चा कुछ कह रहा है, तो उसकी पूरी बात सुनें और प्यार से समझाएं। अच्छा व्यवहार करने या अच्छा काम करने पर बच्चे की प्रशंसा करें और कुछ ईनाम दें। इससे बच्चे का मनोबल बढ़ेगा।

इसे भी पढ़ें:- बच्चों में तनाव और मानसिक परेशानियों को दूर करते हैं ये आसान उपाय

बच्चे के गुस्से को समझें

गुस्सा एक नैचुरल इमोशन है, जो चिड़चिड़ाहट, निराशा और मनमाफिक काम न होने की स्थितियों में सामने आता है। किसी हल्की झुंझलाहट से लेकर किसी स्थिति पर होने आने वाले तेज रिएक्शन को गुस्से के तौर पर परिभाषित किया जा सकता है। चूंकि यह एक नेचुरल इमोशन है इसलिए इससे पूरी तरह निजात पाना संभव नहीं है। गुस्सा आना बिल्कुल नॉर्मल है, लेकिन अगर इसकी वजह से कोई शख्स खुद को या किसी और को नुकसान पहुंचाने लगे, तो इसके नुकसान से बचने के लिए इसे काबू में करना बेहतर है।

बच्चे को हर बात पर न टोकें

कई मां-बाप बच्चों को दिनभर सिर्फ पढ़ने के लिए ही टोकते रहते हैं। बार-बार टोकने से बच्चों में खीझ पैदा होने लगती है और वो गुस्सा करने लगते हैं। हाइपर एक्टिव बच्चों का ज्यादातर दिमाग खेलने-कूदने में ही लगा रहता है। लेकिन ऐसे बच्चे आम बच्चों से कम समय में ही अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं इसलिए बच्चों पर दिनभर पढ़ने का दबाव न बनाएं। उन्हें खुद से थोड़ा समय खेलने के लिए दें ताकि उन्हें किताबी के साथ-साथ सामाजिक और व्यवहारिक ज्ञान भी अच्छा हो।

इसे भी पढ़ें:- 'सामाजिक तनाव' से बच्चों के दिमाग पर पड़ता है बुरा असर, ऐसे करें बचाव

बच्चों के साथ गलत व्यवहार न करें

बहुत से माता-पिता बच्चों को छोटी-छोटी गलतियों पर मारने लगते हैं। मार खाने पर बच्चे सहम जाते हैं और डर जाते हैं इसलिए संबंधित काम को सुधारने का प्रयास करने लगते हैं। लेकिन अगर आप बच्चों को बहुत ज्यादा मारते-पीटते हैं और अक्सर ही ऐसा करते हैं तो बच्चों का डर धीरे-धीरे जाता रहता है और इसकी जगह नफरत और गुस्से की भावना आनी शुरू हो जाती है। ऐसे में कुछ समय तक बच्चे गुस्से को कंट्रोल करते हैं और उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है जबकि थोड़े दिन बाद ही वो आपको गुस्से का जवाब देने लगते हैं।

बच्चे को बिजी रखें

ओवर रिएक्ट करने के बजाय बच्चे को प्यार से समझाएं। उसे ऐसी समस्या से बचाने के लिए क्रिकेट, फुटबॉल और जूडो-कराटे जैसी फिजिकल एक्टिविटीज़ में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। अगर माता-पिता इन समस्त बातों का ध्यान रखेगे तो उनके टीनएजर्स के व्यवहार में जल्दी ही कुछ सार्थक और सकारात्मक बदलाव नज़र आने लगेंगे।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Parenting Tips In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES1294 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK