बड़ी बीमारी है आंखों का रुखापन, बच्चों को पढ़ने में होती है दिक्कत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 19, 2018
Quick Bites

  • आंखें अगर रूखी हों, तो पढ़ने की रफ्तार घट जाती है।
  • हरी सब्जियां, मौसमी फल व दूध का सेवन अधिक करें।
  • एयरकंडीशनर की हवा सीधे आंखों पर न पड़ने दीजिए।

आंखें अगर रूखी हों, तो पढ़ने की रफ्तार घट जाती है। आंखों का रूखापन एक बीमारी है, जिसमें आंखों से पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं निकलते हैं। इसे ड्राई आई सिंड्रोम कहते हैं। इससे आंखों के कार्य काफी प्रभावित होते हैं। इस सिंड्रोम पर शोध करने वाले शोधार्थी बताते हैं कि क्रोनिक ड्राई आई (आंखों के रूखेपन की बीमारी) से पीड़ित लोगों में पढ़ने की गति कम होती है। शोध में पाया गया कि इस रोग से पीड़ित लोगों में पढ़ने की गति सामान्य से 10 फीसदी कम होती है। साथ ही, इससे औसतन 30 मिनट से अधिक समय तक पढ़ने में कठिनाई हो सकती है। 

नैदानिक रूप से जिनकी आंखें अधिक रूखी पाई जाती हैं उनमें प्रति मिनट 32 शब्द कम पढ़ने की क्षमता होती है, जबकि रोग से रहित लोग प्रति मिनट 272 शब्द पढ़ सकते हैं।अमेरिका के जॉन्स हॉकिंस विल्मर आई इंस्टीट्यूट के एसेन एकपेक ने कहा कि आंखों में रूखेपन की वजह से लोग ज्यादातर लंबे समय तक पढ़ने में असमर्थ होते हैं क्योंकि उनकी आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं निकलने से आंखें गीली नहीं हो पाती हैं। ऐसा हमारा अनुमान है। यह शोध ऑप्टोमेट्री एंड विजन साइंस नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 186 लोगों को शामिल किया गया था।

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क्या है ड्राई आई सिंड्रोम

आजकल कंप्यूटर पर काम करने का ज़माना है, जिसके चलते ड्राई आई सिंड्रोम की समस्याएं भी बढ़ती जा रही है। ड्राई आई सिंड्रोम में या तो आंखों में आंसू बनना कम हो जाता है या फिर उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं रहती। दरअसल आंसू, आंख के कार्निया व कन्जंक्टाइवा को नम व गीला रखकर उसे सूखने से बचाते हैं। वहीं हमारी आंखों में एक टीयर फिल्म होती है। इसकी सबसे बाहरी परत को लिपिड या ऑयली लेयर कहा जाता है। यही लिपिड लेयर आंसू के ज्यादा बहने, गर्मी एवं हवा में आंसू के सूखने या उड़ने को कम करती है। लिपिड या फिर यह ऑयली लेयर ही आंखों की पलकों को चिकनाई प्रदान करती है, जिससे पलकों को झपकाने में आसानी रहती है। लेकिन बहुत देर तक कंप्यूटर पर काम करने या बहुत ज्यादा टीवी देखने या फिर लगातार एयरकंडीशन में रहने से आंखों की टीयर फिल्म प्रभावित होती है और आंखें सूखने लगती हैं। इसे ही ड्राई आई सिंड्रोम कहा जाता है।

ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण

चिकित्सकों के अनुसार आंखों में जलन होना, चुभन महसूस होना, सूखापन लगना, खुजली होना, भारीपन रहना, आंखों में लाली पड़ना आदि आई सिंड्रोम के मुख्य लक्षणों में से होते हैं। ड्राई आई सिन्ड्रोम से पीड़ित व्यक्ति अपनी पलकों को बार-बार व जोर से झपकाते हैं।

ड्राई आई सिंड्रोम से बचाव

  • जिस कमरे में हो उसका तापमान कम रखें, वातावरण में थोड़ी नमी बनाए रखें।
  • पेय पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करें।
  • हरी सब्जियां, मौसमी फल व दूध का सेवन अधिक करें।
  • एयरकंडीशनर की हवा सीधे आंखों पर न पड़ने दीजिए।
  • कंप्‍यूटर पर काम करते समय पलकों को झपकाते रहें, इससे आंख के आंसू जल्दी सूखते नहीं।
  • कंप्यूटर पर काम करते समय हर आधे घंटे के बाद पांच से दस मिनट के लिए अपनी नजर स्क्रीन से हटा लें।
  • टीवी देखते हुए या कंप्‍यूटर पर काम के दौरान एन्टीरिफ्लेक्टिव कोटिंग एंव एंटीरिफ्लेक्टिव चश्मे का प्रयोग करें।
  • शराब और धूम्रपान से बचें।

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