खान-पान से जुड़े ये 10 भ्रम हो सकते हैं आपके मोटापे का कारण, जानें सच्चाई

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 14, 2018
Quick Bites

  • खान-पान में ज्यादा परहेज से आप अपनी सेहत और खराब कर लेते हैं।
  • शुगर फ्री उत्पाद हमेशा हेल्दी होते हैं, ये सबसे बड़ा भ्रम है।
  • देसी घी से मोटापा बढ़ता है, ये बात बिल्कुल गलत है।

अगर आपका वजन ज्यादा है या आपका पेट निकला हुआ है, तो आपको खाने-पीने से जुड़ी सलाह देने वाले तमाम लोग मिल जाएंगे। लोगों द्वारा बताई इन बातों को सही मानकर जब आप खाने-पीने की बहुत सी चीजों से परहेज शुरू कर देते हैं, तो आपकी सेहत और खराब हो जाती है। दरअसल लोगों में खान-पान से जुड़ी ऐसी बहुत सी भ्रांतियां फैली हैं, जिन्हें हर कोई आसानी से सही मान लेता है, जबकि उनकी सच्चाई कुछ और ही होती है। आइए आपको बताते हैं जनसामान्य में प्रचलित ऐसे ही 10 भ्रम और उनकी सच्चाई।

शुगर फ्री उत्पाद हेल्दी होते हैं

आमतौर पर लोग अकसर शुगर फ्री उत्पादों को लो कैलरी मान कर डायबिटीज और वजन नियंत्रण के लिए उपयोगी समझते हैं। परंतु ये शुगर फ्री उत्पाद अनेक अनदेखे शुगर स्त्रोतों से युक्त होते हैं। इनका अधिक सेवन स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालता है। इसलिए शुगर फ्री उत्पादों का प्रयोग बहुत ज्यादा न करें।

चीनी खाने से डायबिटीज होती है

यह सोच कि चीनी न खाने पर डायबिटीज नहीं होगी, गलत है। स्टार्च, फैट, प्रोटीन और चीनी जैसे अधिक कैलरी वाले खाद्य शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ाकर डायबिटीज को जन्म देते हैं। जब शरीर कार्बोहाइड्रेट को पचाने में अक्षम हो तभी डायबिटीज होती है। शुगर का स्रोत सिर्फ चीनी नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले ढेर सारे पदार्थों में शुगर छिपी होती है, जिसका आपको पता भी नहीं चलता है।

शहद जैसे प्राकृतिक पदार्थ शुगर का विकल्प हैं

बहुत से लोग सोचते हैं कि ये शुगर फ्री तथा कम कैलरी वाले प्राकृतिक स्त्रोत हैं तथा इन्हें रिफाइन भी नहीं किया जाता इसलिए ये नुकसानदेह नहीं। लेकिन 1 चम्मच शहद में 65 कैलरी तथा एक चम्मच शुगर में 46 कैलरी होती है। ग्लाइस्मिक इंडेक्स भी शहद में 87 तथा शुगर में 59 होता है।

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बिना नमक का खाना तेजी से वजन कम करता है

याद रखें कि पहले तो सोडियम के न रहने पर पानी कम होता है न कि फैट। नर्वस सिस्टम सही ढंग से काम करे, इसके लिए भी सोडियम जरूरी होता है। शरीर में सोडियम की कमी से डिप्रेशन, स्वभाव परिवर्तन और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बटर स्प्रेड या फ्लेवर्ड स्प्रेड (मार्जरीन) मक्खन से बेहतर होता है

बटर स्प्रेड हाइड्रोजन की उपस्थिति में हीट और प्रेशर से वेजटेबल ऑयल से बनाया जाता है। इसमें ट्रांस फैटी एसिड खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता तथा अच्छे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। मक्खन से खराब कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता। एक चम्मच मक्खन में केवल 15 मि.ग्रा. कोलेस्ट्रॉल होता है। मक्खन में कीमती मिनरल, विटमिन और अमीनो एसिड होते हैं जो बटर स्प्रेड में नहीं होते।

देसी घी से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है

कोलेस्ट्रॉल और सैचुरेटेड फैट का डर अकसर लोगों को देसी घी से दूर कर देता है। सच यह है कि देसी घी में 65 प्रतिशत सैचुरेटेड और 32 मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है और ये शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें ऑलिव ऑयल के समान गुण होते हैं।

मेवे में कोलेस्ट्रॉल ज्यादा होता है

नए शोध बताते हैं कि मेवे के बराबर फायदेमंद अन्य कोई खाद्य नहीं। ये न केवल कोलेस्ट्रॉल फ्री होते हैं बल्कि कोलेस्ट्रॉल को कम भी करते हैं। 20-30 ग्राम मेवे हर रोज खाने से वजन पर नियंत्रण व कईबीमारियों से सुरक्षा मिलती है।

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प्रॉसेस्ड फूड खाने से कच्चा खाना ज्यादा अच्छा है

ऐसा नहीं है, कुछ चीजों को कच्चा खाना भी नुकसानदेह हो सकता है। हालांकि आधुनिक जीवनशैली में प्रोसेस्ड या रिफाइंड खाद्य पदार्थो से बच पाना कठिन है, लेकिन स्वस्थ रहने के लिए इनसे दूरी बनाए रखें। इनमें सैच्युरेटेड और हाइड्रोजेनेटेड फैट्स, साल्ट, शुगर और प्रिजर्वेटिव अधिक होता है। इसलिए दोनों तरह के फूड्स का संतुलन बनाकर रखें।

केवल फल खाएंगे तो वजन कम हो जाएगा

यह बात ठीक नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार जरूरी है। फलों के अलावा जो अतिरिक्त पोषण हमें अन्य खाद्यों से मिलता है, वह भी जरूरी है।

विटामिन्स की कमी को सप्लीमेंट से पूरा करें

किसी फल या सब्जी की जगह उसका सप्लीमेंट उस कमी को जल्दी पूरा कर देगा, इस गलतफहमी में न रहें। फल और सब्जियों में अपने फाइटोकेमिकल्स होते हैं। जैसे ब्रॉक्ली में अकेले ही 10,000 फाइटोकेमिकल्स होते हैं। फाइटोकेमिकल्स के सुरक्षित माघ्यम प्राकृतिक खाद्य होते हैं, न कि सप्लीमेंट।

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