आपका बच्‍चा बार-बार पड़ता है बीमार तो ध्‍यान से पढ़ें ये 10 एक्‍सपर्ट टिप्‍स

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 17, 2018
Quick Bites

  • हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली हमारे शरीर को बीमारियों से बचाती है
  •  प्रतिरक्षा प्रणाली खतरनाक रोगों से शरीर की रक्षा भी करती है
  • ऑटो इम्यून डिफीशेंसी से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है

एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में लाखों बच्‍चे ऑटो इम्यून डिफीशेंसी से ग्रसित हैं। इसमें शरीर के इम्यून सिस्टम का हिस्सा ठीक रूप से कार्य नहीं करता है और अलग-अलग अंगों को प्रभावित करता है। इससे रूमेटाइड आर्थराइटिस, टाइप 1 डायबीटीज, थायरॉइड, ल्यूपस, सोराइसिस जैसी कई बीमारियां होती हैं। दरअसल, हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली हमारे शरीर को बीमारियों से बचाती है और खतरनाक रोगों से शरीर की रक्षा भी करती है, लेकिन इस ऑटो इम्यून डिफीशेंसी से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। जिससे बच्‍चे बार बार बीमार पड़ते हैं। 

 

जागरूकता की कमी 

इस बीमारी के प्रति लोगों के साथ ही चिकित्सकों को भी जागरूक होने की जारूरत है, जिससे मरीज को सही उपचार मिल सके। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से 1200 में से 1 बच्चा पीड़ित होता है। इस बीमारी से ग्रसित ज्यादातर बच्चों की मृत्यु जन्म के एक वर्ष के भीतर हो जाती है। इसका मुख्य कारण यह भी है कि इस बीमारी की पहचान समय रहते नहीं हो पाती है। ऐसे में अगर बच्चा बार-बार बीमार पड़े तो नजरअंदाज न करें। 

बार-बार बीमार होने के लक्षण

  • जोड़ों में दर्द होना
  • मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी होना
  • वजन में कमी होना
  • अनिद्रा की शिकायत होना
  • दिल की धड़कन अनियंत्रित होना
  • त्वचा का अतिसंवेदनशील होना
  • त्वचा पर धब्बे पड़ना
  • दिमाग ठीक से काम न करना
  • ध्यान केंद्रित करने में समस्या
  • हमेशा थका हुआ महसूस करना
  • बालों का झड़ना
  • पेट में दर्द होना
  • मुंह में छाले होना आदि 

उपचार 

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी बच्चे को बार-बार संक्रमण हो रहा है या फिर संक्रमण हो जाने के बाद ऐंटीबायॉटिक दवाओं का असर नहीं हो रहा है तो तत्काल बच्चे को विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए अन्यथा बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है। यह संक्रमण फेफड़े से लेकर जोड़ों तक में हो सकता है। इस तरह की समस्या होने पर दवा का भी असर नहीं होता है। इस रोग में बच्चे आर्थराइटिस से भी पीड़ित हो सकते हैं। यह बीमारी हिमोफिलिया की बीमारी से 4 गुना ज्यादा कॉमन है। कुछ मामलों में यह बीमारी व्यस्क हो जाने के बाद पता चलती है।

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