मेटाबॉलिक सिंड्रोम क्‍या है, जानें इसके कारण और लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 30, 2018
Quick Bites

  • अपने आप में कोई बीमारी नहीं है मेटाबॉलिक सिंड्रोम।
  • मोटापा और हॉर्मोन असंतुलन हैं इसके प्रमुख कारण।
  • हृदय रोगों की बड़ी वजह होता है मेटाबॉलिक सिंड्रोम।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बारे  बीमारी के बारे में पता लगे अभी दो दशक का समय भी नहीं हुआ है, लेकिन आजकल इसके बारे में काफी चर्चा की जाती है। यह सारी दुनिया में फैला हुआ है। यह पिंपल और कॉमन कोल्‍ड जैसा ही सामान्‍य हो चुका है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, 4 करोड़ 70 लाख अमेरिकी इससे ग्रस्‍त हैं। मोटे तौर पर कहें तो हर छह में से एक अमेरिकी इससे परेशान है। यह सिंड्रोम पारिवारिक होता है। आमतौर पर अफ्रीकन-अमेरिकन, हिस्‍पेनिक्‍स, एशियाई और अमेरिका के मूल निवासियों में यह समस्‍या अधिक देखी जाती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ इस सिंड्रोम के होने के खतरे में इजाफा होता रहता है।

कहा जाए, तो मेटाबॉलिक सिंड्रोम से ग्रसित होने वाले लोगों की संख्‍या तो काफी है, लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है। यहां तक कि विशेषज्ञ भी इसे लेकर काफी चर्चा करते रहते हैं। सभी डॉक्‍टर इसे किसी अलग नजर से देखने की राय से सहमत नहीं होते।

तो आखिर यह संदेहास्‍पद सिंड्रोम है क्‍या- इसे एक खतरनाक नाम सिंड्रोम एक्‍स के नाम से भी पुकारा जाता है। क्‍या इस बारे में फिक्रमंद होने की जरूरत है या भी यह भी एक सामान्‍य रोग है, जिसे लेकर अधिक घबराने की जरूरत नहीं।

metabolic syndrome

मेटाबॉलिक सिंड्रोम को समझें

मेटाबॉलिक सिंड्रोम अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। दरअसल, यह जोखिम कारकों का एक समूह है- उच्‍च रक्‍तचाप, उच्‍च रक्‍त शर्करा, अस्‍वास्‍थ्‍यकर कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा और मोटापा, आदि मिलकर मेटाबॉलिक सिंड्रोम बनते हैं।

बैड कोलेस्‍ट्रॉल की अधिक मात्रा

यदि आपके रक्‍त में बॅड कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा 150 मिग्रा/डेलि है, अथवा आप कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने की दवा ले रहे हैं, तो आपको मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा काफी अधिक हो जाता है।

गुड कोलेस्‍ट्रॉल कम होना

पुरुषों में यदि रक्‍त में गुड कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर  40 मिग्रा/डेलि है और महिलाओं में यह स्‍तर 50 मिग्रा/डेलि है, तो उन्‍हें मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा अगर आप कोलेस्‍ट्रॉल की दवा ले रहे हैं, तो भी आपको मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा होता है।

उच्‍च रक्‍तचाप

हाई बीपी मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का एक बड़ा कारण माना जाता है। सामान्‍य व्‍यक्ति का रक्‍तचाप 120/80 माना जाता है। यदि यह इस सामान्‍य स्‍तर से अधिक हो, तो आपको मेटाबॉलिक सिंड्रोम हो सकता है। इसके अलावा अगर आप बीपी को काबू करने की दवा ले रहे हैं, तो भी आपको विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

उच्‍च रक्‍त शर्करा

यदि आपकी फास्टिंग (खाने के करीब 9 घंटे बाद) रक्‍त में शर्करा की मात्रा 100 से अधिक है, तो यह वक्‍त आपके लिए सचेत होने वाला है। यह इस बात की ओर इशारा करता है कि आपको मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा है।

यदि आपको इनमें से कम से कम तीन लक्षण दिखाई दें, तो समझ जाइए कि आप मेटाबॉलिक सिंड्रोम की शिकार हो सकते हैं।

बेशक, इनमें से कोई भी जोखिम कारक होना अच्‍छा नहीं माना जाता, लेकिन जब ये सभी रोग एक साथ हो जाते हैं, तो आपको काफी तरह की बीमारियां दे सकते हैं। ये जोखिम कारक आपकी रक्‍तवाहिनियों पर दबाव बढ़ा देते हैं, जिससे आपको दिल की बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। आगे चलकर यही परिस्थितियां हृदयाघात और स्‍ट्रोक का कारण बन सकती हैं। ये जोखिम कारक आपको डायबिटीज होने का खतरा पांच गुना तक बढ़ा देते हैं।

अच्‍छी बात यह है कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम को नियंत्रित किया जा सकता है। इसे काबू करने के लिए मुख्‍य रूप से आपको अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाने की जरूरत होती है।

metabolic syndorme treatment

मेटाबॉलिक सिंड्रोम के जोखिम कारक

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और नेशनल हार्ट, लंग और ब्‍लड इंस्‍टीट्यूट के मुताबिक, मेटाबॉलिक सिंड्रोम को बढ़ाने के पांच जोखिम कारक हो सकते हैं।

कमर का अधिक साइज

मोटापा इसके लिए सबसे बड़ा कारक हो सकता है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम में पुरुषों की कमर का माप यदि 40 इंच से अधिक हो और महिलाओं की कमर का माप यदि 35 इंच से ज्‍यादा हो तो उन्‍हें मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा अधिक होता है।

क्‍यों होता है मेटाबॉलिक सिंड्रोम

विशेषज्ञ अभी तक यह नहीं जान पाए हैं कि आखिर मेटाबॉलिक सिंड्रोम क्‍यों विकसित होता है। यह जोखिम कारकों का मेल है और कोई अकेली बीमारी नहीं। तो, संभवत: इसके कई अलग कारण हो सकते हैं-

इनसुलिन प्रतिरोधकता

इनसुलिन वह हॉर्मोन होता है, तो शरीर को ग्‍लूकोज का उपयोग करने में सहायता प्रदान करता है। यह आपको ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है। ऐसे लोग जिनमें इनसुलिन प्रतिरोधकता पैदा हो जाती है, तो इनसुलिन सही प्रकार काम नहीं कर पाता है, तो हमारा शरीर ग्‍लूकोज के बढ़ते स्‍तर का सामना करने के लिए इसका इनसुलिन का अधिक से अधिक निर्माण करने लगता है। अंत में यही स्थिति डायबिटीज का कारण बनती है। पेट पर जमा अतिरिक्‍त चर्बी और इनसुलिन प्रतिरोधकता के बीच सीधा संबंध होता है।

मोटापा

मोटापा खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्‍त चर्बी भी मेटाबॉ‍लिक सिंड्रोम का एक संभावित कारण हो सकती है। जानकार कहते हैं कि मोटापा मेटाबॉलिक सिंड्रोम के फैलने के पीछे सबसे अहम कारण है। शरीर के किसी अन्‍य हिस्‍से की अपेक्षा पेट और उसके असापास जमा होने वाली चर्बी आपके लिए अधिक घातक सिद्ध होती है। अस्‍वस्‍थ्‍यकर जीवनशैली, उच्‍च वसायुक्‍त आहार और शारीरिक गतिविधियों में कमी इसका एक कारण हो सकता है।

हॉर्मोन असंतुलन
इसमें हॉर्मोन्‍स की भी एक भूमिका हो सकती है। उदाहरण के लिए, पॉलिसाइस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)- ऐसी परिस्थिति है, जो प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है- यह भी हॉर्मोन असंतुलन और मेटाबॉलिक सिंड्रोम को प्रभावित करती है।

अगर आपने अभी मेटाबॉलिक सिंड्रोम का निदान करवाया है, तो आप चिंतित हो सकते हैं। लेकिन, इसे एक खतरे की घंटी समझना चाहिए। यह अपनी सेहत के प्रति सचेत होने का समय है। रोजमर्रा की अपनी आदतों में जरूरी बदलाव लाइए इससे आप भविष्‍य में होने वाले गंभीर रोगों से बच सकते हैं।

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