बच्चों के बॉडी पेन को इग्नोर न करें, जुवेनाइल आर्थराइटिस का हो सकता है लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 08, 2018
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Quick Bites

  • बच्चों के गठिया रोग को जुवेनाइल रूमेटाइड आर्थराइटिस या जेआरएम कहते हैं।
  • शुरुआती लक्षण सुबह के समय लंगड़ा कर चलना हो सकता है।
  • सही समय पर इलाज न होने से कई बार घुटने खराब हो जाते हैं।

आर्थराइटिस यानि गठिया को आमतौर पर बूढ़ों की बीमारी माना जाता है लेकिन बच्चों को भी ये रोग हो सकता है, जिसे जुवेनाइल रूमेटाइड आर्थराइटिस या जेआरएम कहते हैं। जुवेनाइल आर्थराइटिस की शुरुआत में बच्चों के जोड़ों में दर्द, सूजन और जलन होती है, जिसे ज्यादातर मां-बाप बच्चों में खेल-कूद और भाग-दौड़ से होने वाला दर्द, उम्र बढ़ने के कारण या मौसम में बदलाव से होने वाला दर्द आदि मान लेते हैं। इसकी वजह से कई बार जोड़ों में सूजन आ जाती है या वे अकड़ जाते हैं। कई बार ये इंटरनल बॉडी पार्ट्स को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। जुवेनाइल आर्थराइटिस के कई लक्षण हड्डियों की टीबी से मिलते हैं इसलिए कई बार कुछ पता न चलने पर कम जानकार डॉक्टर भी इसे हड्डियों की टीबी ही मान लेते हैं। सही समय पर पता चल जाए तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है क्योंकि इस बीमारी का इलाज संभव है।

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जुवेनाइल आर्थराइटिस के लक्षण

जुवेनाइल आर्थराइटिस के तमाम लक्षण आते-जाते रहते हैं इसलिए बच्चों के जोड़ों में दर्द हो तो छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है। इस रोग का बिल्कुल शुरुआती लक्षण सुबह के समय लंगड़ा कर चलना हो सकता है। कई बार जोड़ों में दर्द की शिकायत दिनभर रहती है और कई बार दिन में एक या दो बार का दर्द भी इसका शुरुआती लक्षण हो सकता है। एक या एक से ज्यादा जोडों में दर्द होना, दर्द के साथ सूजन आ जाना, आंखों में सूजन आ जाना, आंखें लाल हो जाना, बुखार के साथ शरीर में दर्द होना और खून में हीमोग्लोबिन का कम होना आदि जुवेनाइल आर्थराइटिस के लक्षण हो सकते हैं।

जुवेनाइल आर्थराइटिस का कारण

इस रोग के सही-सही कारण का पता नहीं लगाया जा सका है लेकिन ये रोग बॉडी के इम्यून सिस्टम के कमजोर होने से होता है। 60% मामलों में इसका सीधा संबंध माइकोप्लाजमा नाम के जीवाणु से है। जुवेनाइल आर्थराइटिस एक तरह का ऑटोइम्यून रोग है। ऑटोइम्यून रोगों में हमारी व्हाइट ब्लड सेल्स स्वस्थ कोशिकाओं और बैक्टीरिया या वायरस के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं इसलिए इम्यून सिस्टम कमजोर होने के कारण ये एक तरह का रसायन छोड़ने लगते हैं जो हमारे टिशूज को नुक्सान पहुंचाने लगते हैं। टीशूज में होने वाले इसी नुक्सान से दर्द होने लगता है। कई मामलों में इसके इलाज के बाद दोबारा होने के मामले भी सामने आए हैं। ये जेनेटिक कारणों से भी हो सकता है और इसका कारण पर्यावरण में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया भी हो सकता है।

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जुवेनाइल आर्थराइटिस से बचाव

जुवेनाइल आर्थराइटिस आमतौर पर 6 महीने से 18 साल के बच्चों को होता है। सही समय पर इलाज न होने से कई बार जोड़ों की हड्डियों में संक्रमण फैल जाता है और घुटने खराब हो जाते हैं। इससे बचाव के लिए बच्चों को प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स से भरा आहार देना चाहिए। बच्चों के खाने में हरी सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट्स और सलाद शामिल करें। बच्चों को तेल, मसाले से बने बाजार के फूड्स, तले-भुने फूड्स और जंक फूड्स खाने से रोकें। इसके अलावा बच्चों को रोज एक्सरसाइज और खेल-कूद के लिए प्रेरित करें। व्यायाम से पहले थोड़ी स्ट्रेचिंग जरूरी है। गेम के लिए आउटडोर गेम को ज्यादा महत्व दें क्योंकि आजकल के बच्चों में घर के अंदर रहने और मोबाइल, लैपटॉप पर गेम खेलने की प्रवृत्ति ज्यादा आ गई है जो स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक है।

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