मानसिक बीमारी है सोशल फोबिया, खुद को ऐसे बचाएं

आमतौर पर छोटी-छोटी बातों को लेकर हर कोई तनाव या चिंता से ग्रस्‍त होता है मगर इसका असर आपके जीवन पर बुरा असर डालने लगे तो यह बीमारी हो सकती है।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Jan 04, 2018
मानसिक बीमारी है सोशल फोबिया, खुद को ऐसे बचाएं

आमतौर पर छोटी-छोटी बातों को लेकर हर कोई तनाव या चिंता से ग्रस्‍त होता है मगर इसका असर आपके जीवन पर बुरा असर डालने लगे तो यह बीमारी हो सकती है। सामाजिक चिंता विकार को सामाजिक भय या सोशल फोबिया भी कहा जाता है, इसमें व्यक्ति अन्य लोगों के साथ बातचीत करने में और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने से डरता है। सामाजिक चिंता विकार से पीड़ित व्यक्तियों को शर्मिंदगी, दूसरा कोई उनके बारे में क्या सोचता है, लोग उसे गलत समझेंगे जैसी अन्य बातों को लेकर वे खुद के बारे में जरूरत से ज्यादा सतर्क रहने लगते हैं। इसका असर उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़ता है।

सोशल फोबिया की वजह

  • कुछ परिवार में ये समस्या होती है। इससे ये पीढ़ी दर पीढ़ी भी चल सकती है उसे आनुवंशिकी कहते हैं, आनुवंशिकी का कारण क्या है ये कारण स्पष्ट नहीं है।
  • मस्तिष्क में मौजूद इसका एक हिस्सा यानि किसी प्रकार के डर लगने के दौरान व्यवहार को नियंत्रित करता है। हर इंसान में डर के प्रति दिमाग की प्रतिक्रिया अलग होती है।
  • सामाजिक चिंता विकार किसी को देख कर सीखी भी जा सकती है। कई बार व्यक्ति ये व्यवहार बीमार व्यक्ति से भी सीखते हैं और उसकी तरह ही आचरण भी करने लगते हैं। इसके लिए माता-पिता का जरूरत से ज्यादा सुरक्षा देना भी एक कारण हो सकता है। परिवार के नकारात्मक अनुभवों से भी सामाजिक चिंता विकार की समस्या उत्पन्‍न होती है।

सोशल फोबिया के लक्षण

  • जिस परिस्थिति में कोई आपका मूल्यांकन करे उस परिस्थिति का डर।
  • दूसरों को ठेस पहुंचाने की चिंता
  • अजनबियों के साथ बातचीत करने में डर
  • अपमान और शर्मिंदगी के बारे में चिंता
  • ऐसे स्थितियों से बचने की कोशिश करना जहां कोई एक ध्यान का केंद्र हो
  • अत्यधिक शर्माना, कांपना, हकलाना और पसीना आना
  • पैनिक अटैक
  • शर्मिंदगी की डर की वजह से लोगों से बचना
  • सामाजिक संबंधों के बारे में ज्यादा सोचना
  • अतीत में हुए नकारात्मक अनुभवों के बारे में ज्यादा सोचना

शारीरिक लक्षण

पेट की ख़राबी, तेजी से दिल धड़कना, भ्रम, कंपन और पैनिक अटैक आना। इसके लक्षण समय के साथ बदल भी सकते हैं।

इससे बचने के उपाय

प्रारंभिक उपचार से दिक्कतों से बचाव हो सकता है।
दैनिक घटनाओं का एक रिकार्ड रखें इससे डॉक्टर आपको सही तरीके से मदद कर पायेगें।
शराब और अन्य मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहें।

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