लंग्स कैंसर की शुरुआत है एडेनोकार्सिनोमा रोग, ये हैं लक्षण और कारण

एडेनोकार्सिनोमा एक तरह का कैंसर है, जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। आमतौर पर ये कैंसर पेट, ब्रेस्ट, एसोफैगस, पैंक्रियाज और फेफड़ों में पाया जाता है। भारत में ये कैंसर सबसे ज्यादा लंग्स यानी फेफड़ों में होता है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Jul 26, 2018
लंग्स कैंसर की शुरुआत है एडेनोकार्सिनोमा रोग, ये हैं लक्षण और कारण

एडेनोकार्सिनोमा एक तरह का कैंसर है, जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। आमतौर पर ये कैंसर पेट, ब्रेस्ट, एसोफैगस, पैंक्रियाज और फेफड़ों में पाया जाता है। भारत में ये कैंसर सबसे ज्यादा लंग्स यानी फेफड़ों में होता है। यह बड़ी संख्या में वयस्कों को प्रभावित करता है। फेफड़ें के कैंसर में टिश्‍युज की असामान्य वृद्धि होती है, जो सबसे अधिक ब्रांकाई में शुरू होती है, और पूरे फेफड़े के ऊतकों में फैलती है।

क्या है एडेनोकार्सिनोमा

अन्य कैंसरों की तरह ही फेफड़ों का एडेनोकार्सिनोमा भी असामान्य कोशिकाओं के विकास के कारण होता है। ये कैंसरग्रस्त कोशिकायें अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। ट्यूमर जैसे-जैसे बढ़ता जाता है, वैसे–वैसे यह फेफड़े के हिस्सों को नष्ट करता चला जाता है। इस प्रकार से ट्यूमर की असामान्य कोशिकायें शरीर के अन्य‍ भागों में भी फैल सकती हैं, इससे चेस्‍ट के लोकल लिंक नोड्स, चेस्‍ट का केन्द्रीय भाग, लीवर, हड्डियां, एड्रेनल ग्रंथि तथा अन्य अंग जैसे ब्रेन विशेष रूप से प्रभावित हो सकते है।

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दो तरह के होते हैं एडेनोकार्सिनोमा कैंसर

फेफड़े का एडेनोकार्सिनोमा दो तरह का होता है।

  • स्माल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी)
  • नॉन-स्मा‍ल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी)

इसके बाद के प्रकार को एडेनोकार्सिनोमा, स्क्‍वैमस सेल और लार्ज सेल वेराइटीज में वर्गीकृत किया जाता है। एससीएलसी और एनएससीएलसी के बीच कुछ बुनियादी अंतर होते हैं, जैसे-

  • स्माल सेल लंग कैंसर होते ही इसके व्यापक रूप से फैलने की प्रवृत्ति होती है इसलिये इसके उपचार में कीमोथैरेपी का इस्तेमाल करना पड़ता है।
  • वहीं नॉन-स्मा‍ल सेल लंग कैंसर होने पर यह फेफड़े तक ही सीमित रहता है इसलिए इसके उपचार में रेडिएशन थेरेपी के साथ या इसके बिना सर्जिकल रीसेशन का प्रयोग कर सकते हैं।

एडेनोकार्सिनोमा कैंसर के लक्षण

  • लगातार खांसी लाल या थूक के साथ रक्त
  • सीने में दर्द
  • सांस लेने में कठिनाई
  • शारीरिक व्यायाम के साथ सांस और अक्सर घरघराहट
  • चेस्‍ट में संक्रमण
  • रक्त वाहिकाओं पर ट्यूमर के दबाव के असर से चेहरे और गर्दन की सूजन, नसों में दर्द या उस तरफ हाथ में कमजोरी
  • कैंसर के प्रभाव से फेफड़ों के कैंसर के बढ़ने के साथ वजन में कमी, थकान, भूख में कमी

किनको होता है खतरा

एडेनोकार्सिनोमा फेफड़े के कैंसर का अत्यंत सामान्य रूप है। यह कैंसर ज्यादातर धूम्रपान करने वाले लोगों में पाया जाता है। धूम्रपान करने वाले लोगों में धूम्रपान न करने वाले लोगों की अपेक्षा फेफड़े के कैंसर की संभावना लगभग 13 गुणा अधिक होती है। एडेनोकार्सिनोमा के अधिकांश मामलों का संबंध सिगरेट पीने से है। धूम्रपान फेफड़े के कैंसर का अग्रणी रिस्क फैक्टर है।
रेडॉन एक रंगहीन, गंधहीन रेडियोधर्मी गैस है जो भूमि में उत्पन्न होती है। यह घरों व जन भवनों के निचले तलों तक फैलती है और पेय जल को प्रदूषित करती है। रेडॉन के सम्पर्क में आना लंग कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। यह महिलाओं एवं 45 वर्ष से कम आयु वाले लोगों में पाये जाने वाले फेफड़े के कैंसर का सबसे प्रचलित रूप है।

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