अपनी स्किन के हिसाब से चुने सैने​ट्री पैड, कभी नहीं होंगे रैशेज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 09, 2018
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Quick Bites

  • महिलाओं को तकरीबन 3000 दिन पीरियड्स की प्रक्रिया से गुज़रना होता है।
  • अपने पीरियड पैटर्न के हिसाब से सही सैनिटरी नैपकिन का चयन करें।
  • पीरियड्स के दौरान अक्सर खून वजाइनल रीजन में इकट्ठा हो जाता है।

मेंसट्रुएशन हर स्त्री की जि़ंदगी का अहम हिस्सा है। ज्य़ादातर स्त्रियों को हर माह दो से सात दिन की अवधि तक इस प्रक्रिया से गुज़रना होता है। इस हिसाब से उन्हें अपने जीवनकाल में तकरीबन 3000 दिन इस प्रक्रिया से गुज़रना होता है। इस दौरान कई बार हायजीन संबंधित लापरवाही बरतने की वजह से स्त्रियों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, प्रॉब्लम फ्री पीरियड्स के लिए ज़रूरी है मेंस्ट्रुएशन हायजीन की सही जानकारी। आइए इस बारे में जानते हैं।

सैनिटेशन का सही तरीका चुनें

अपने पीरियड पैटर्न के हिसाब से सही सैनिटरी नैपकिन का चयन करें। आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से अलग-अलग दिनों और जगहों पर अलग-अलग सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। ज्य़ादातर स्त्रियों को शुरुआती दिनों में तेज़ और बाद के दिनों में हलका फ्लो होता है। अगर आपके साथ भी ऐसा ही है तो शुरुआती दिनों में लॉन्ग व एक्सट्रा एब्ज़ॉर्पशन वाला और कम फ्लो वाले दिनों में सामान्य नैपकिन इस्तेमाल करें।

मेंस्ट्रुअल ब्लड

शरीर से बाहर निकलने के बाद बाहरी जीवाणुओं के संपर्क में आने के चलते मेंस्ट्रुअल ब्लड में संक्रमण होना शुरू हो जाता है। ऐसा उन दिनों में भी होता है जब खून का बहाव कम या न के बराबर होता है। कम बहाव वाले दिनों में भी पैड पर नमी, जीवाणु व पसीने के कण मौजूद होते हैं। जब ये जीवाणु लंबे समय तक गर्मी और नमी वाली जगह रहते हैं तो इनकी संख्या बढऩे लगती है। ऐसा होने पर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शंस, वजाइनल इन्फेक्शंस और स्किन रैशेज़ आदि होने का खतरा हो सकता है।

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वजाइनल रीजन

पीरियड्स के दौरान अक्सर खून वजाइनल रीजन में इकट्ठा हो जाता है। इसे कुछ-कुछ अंतराल पर साफ करते रहना चाहिए। ऐसा न करने पर वजाइनल रीजन से दुर्गंध आने लगती है। हर बार पैड चेंज करते वक़्त जेनिटल्स को धो लेना चाहिए। अगर किसी कारण से जेनिटल्स को पानी से वॉश करना संभव नहीं है तो उन्हें टिश्यू पेपर या टॉयलेट पेपर से पोछ देना चाहिए।

क्लीनिंग मेकैनिज़्म

वजाइना का अपना क्लीनिंग मेकैनिज़्म होता है जो बैड व गुड बैक्टीरिया के बीच बैलेंस बनाकर रखता है। इसे साबुन से धोने पर यहां के गुड बैक्टीरिया खत्म हो सकते हैं जिससे इन्फेक्शन की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए वजाइनल एरिया को वॉश करने के लिए सि$र्फ गुनगुना पानी ही इस्तेमाल करें। अगर किसी साबुन या इंटीमेट वॉश का इस्तेमाल कर भी रही हैं, तो बाहरी हिस्से में ही करें, अंदरूनी हिस्से में नहीं।

एंटीसेप्टिक ऑइंटमेंट

पैड रैशेज से बचाव ज़रूरी है। अकसर हेवी फ्लो के दिनों में यह समस्या हो जाती है। ऐसा तब होता है जब पैड लंबे समय तक गीला रहता है और त्वचा से रगड़ खाता रहता है। ऐसा न हो, इसके लिए पीरियड्स के दौरान नियमित तौर पर पैड्स बदलें और जेनिटल एरिया ड्राय रखने की कोशिश करें। इसके बावजूद रैशेज़ होने पर सोने से पहले और नहाने के बाद वजाइनल एरिया में एंटीसेप्टिक ऑइंटमेंट लगाएं।

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मेडिकेटेड पाउडर का इस्तेमाल

इससे रैशेज हील होंगे और उनसे बचाव भी होगा। लेकिन अगर रैशेज़ की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए तो किसी गायनिकोलॉजिस्ट को दिखाएं। डॉक्टर की सलाह लेकर आप पीरियड्स के दौरान जेनिटल एरिया को ड्राय और इन्फेक्शन मुक्त रखने के लिए मेडिकेटेड पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।

नियमित रूप से नहाएं

इस दौरान नियमित रूप से नहाना चाहिए। कई जगह माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान नहाने या बाल धोने से परहेज करना चाहिए, पर असल में यह सही नहीं है। पहले ऐसा इसलिए था क्योंकि पहले खुले में तालाबों या नदियों के घाट पर नहाने की परंपरा थी, जिस वजह से पीरियड्स के दौरान पानी में संक्रमित ब्लड मिल जाने के चलते उसके संक्रमित होने का ख़्ातरा था। लेकिन अब जब ज्य़ादातर घरों में वेल फर्निश्ड बाथरूम हैं, तो ऐसे में इन दिनों के दौरान नहाने में कोई नुकसान नहीं है।

सैनिटरी पैड का चयन

  • एक अच्छे सैनिटरी पैड की खासियत यह है कि उसमें कम समय में ज्य़ादा से ज्य़ादा नमी सोखने की क्षमता होती है। अवशोषित नमी को पैड के सेंट्रल कोर में लॉक हो जाना चाहिए। ऐसा होने पर तेज़ फ्लो होने पर (जैसे, बैठने की मुद्रा में) भी लीकेज की आशंका कम हो जाती है।
  • आम तौर पर पीरियड्स के शुरुआती दिनों में ब्लड फ्लो ज्य़ादा तेज़ होता है। इसलिए इस दौरान ज़रूरत होती है एक ऐसे सैनिटरी नैपकिन की जो ब्लड फ्लो को तेज़ी से सोख सके। सैनिटरी पैड्स को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है- डे पैड्स व नाइट पैड्स। जहां डे पैड्स 17 से 25 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं, वहीं नाइट पैड्स 35 सेंटीमीटर या इससे भी अधिक लंबाई वाले होते हैं। पैड जितना अधिक लंबा होता है, उतना अधिक लिक्विड सोखता है।
  • ज्य़ादातर सैनिटरी नैपकिंस या तो कॉटन से बने होते हैं, या फिर पीवीसी मेश मटीरियल से। हर स्त्री की त्वचा और उसकी संवेदनशीलता अलग-अलग होती है। कुछ को सॉफ्ट टच सूट करता है तो कुछ को नेटेड लेयर। सैनिटरी नैपकिन के मटीरियल का चयन करते वक़्त ध्यान रखें कि वह ब्रीदेबल हो।

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