पर्सनल हाइजीन के साथ जरूरी है सर्तकता, नहीं तो घेर लेंगी बीमारियां

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 12, 2018
Quick Bites

  • गर्मियों में या फिर उमस भरे दिनों में दो बार नहाना फायदेमंद है।
  • व्यक्ति पेट से संबंधित समस्याओं का शिकार हो सकता है।
  • खुले भोजन पर मंडराती मक्खियों से हेपेटाइटिस ए और ई का इंफेक्शन हो सकता है।

स्वस्थ जीवन की पहली शर्त है- साफ-सफाई, स्वच्छता या हाइजीन का ध्यान रखना। स्वच्छता चाहे घर की हो, बाहर की हो या निजी स्तर पर, इनका स्वास्थ्य के संदर्भ में अपना अलग-अलग महत्व है। स्वच्छता पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण है। स्वच्छता की अनदेखी करने पर गंदगी बढ़ती है। गंदगी के कारण जीवाणु, वायरस और मच्छर पनपते हैं, जो अनेक प्रकार की बीमारियों को बुलावा देते हैं। इसलिए हम सभी का कर्तव्य हो जाता है कि दैनिक जीवन में पर्सनल हाइजीन के अलावा बाहरी स्वच्छता को भी महत्व दें। कम से कम अपने घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें। 

पर्सनल हाइजीन आवश्यक 

दैनिक क्रियाकलापों में निजी स्तर पर स्वच्छता (पर्सनल हाइजीन)न रखने पर व्यक्ति कई तरह के संक्रमणों से ग्रस्त हो सकता है। चाहे गर्मी का मौसम हो या सर्दी का, सभी को रोज नहाना चाहिए और साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। गर्मियों में या फिर उमस भरे दिनों में दो बार नहाना फायदेमंद है। कामकाज के दौरान घर में या बाहर पर्यावरण में मौजूद धूल-मिट्टी के कण और जीवाणु हमारे कपड़ों पर चिपक जाते हैं, जो शरीर की गर्मी पाकर बढ़ने लगते हैं और अंतत: बीमारियों का कारण बनते हैं। इसलिए रोजाना मॉइश्चराइजर युक्त या एंटी बैक्टीरियल साबुन लगाकर नहाने से त्वचा के पोर्स  खुल जाते हैं और पसीने और उसकी दुर्गंध से निजात मिलती है, ताजगी का अहसास भी होता है।  नहाने के बाद गंदे कपड़े बदल लेने चाहिए क्योंकि इनमें पाए जाने वाले जीवाणुओं से हमें स्किन-एलर्जी और इंफेक्शन हो सकते हैं। खासतौर पर नहाने के बाद अंडरगार्मेंट्स हमेशा साफ और धुले ही पहनने चाहिए। 

बालों पर खराब असर 

पसीने और धूल-मिट्टी का असर हमारे बालों पर भी पड़ता है। पसीने वाले चिपचिपे बालों में फंगल इंफेक्शन हो सकता है, जिससे उनमें डेंड्रफ हो जाती है। इस कारण कालांतर में बाल झड़ने लगते हैं। इस समस्या से बचने के लिए बालों को सप्ताह में दो से तीन बार अच्छे शैंपू से धोना चाहिए। 

ओरल हाइजीन का महत्व 

पर्सनल हाइजीन के अंतर्गत ओरल हाइजीन या मुख की स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है ताकि मोतियों जैसे चमकते दांतों को ताउम्र बरकरार रखा जा  सके। ओरल हाइजीन की आदतों पर अमल न करने पर दांतों का पीला होना, सांस से बदबू आना, दांतों पर पीली परत जमना, मसूड़ों में सूजन और उनसे खून निकलना, दांतों का हिलना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। पायरिया जैसे रोग भी हो सकते हैं, जो दांतों और मसूड़ों को कमजोर कर देते हैं। 

ब्रश, माउथवॉश और टंग (जीभ) क्लीनिंग करना आपकी दिनचर्या का अहम हिस्सा होना चाहिए। दांतों की सफाई के लिए डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए ‘2-2-2’ के फार्मूले का अनुसरण करना चाहिए। यानी दिन में 2 बार ब्रश करें, ब्रश कम से कम 2 मिनट तक करें और पूरे साल में 2 बार डेंटिस्ट से अपने दांत जरूर चेक कराएं। कुछ भी खाने के बाद ब्रश न कर पाएं तो कुल्ला जरूर करें। ऐसा करने से खाने के कण मुंह में नहीं रह पाएंगे और इनसे बनने वाले बैक्टीरिया दांत खराब नहीं कर सकेंगे। रात को सोने से पहले ब्रश की आदत जरूर डालें। ब्रश को 45 डिग्री कोण पर पकड़कर आगे-पीछे, ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर धीरे-धीरे घुमाते हुए हल्के हाथों से ब्रश करें। इसके साथ ही अपनी जीभ भी ब्रश से पीछे से आगे की ओर तीन-चार बार धीरे-धीरे जरूर साफ करें। 

हाथ धोने की आदत डालें 

अपने हाथ नियमित रूप से खासतौर पर खाना बनाने, परोसने, खाना खाने से पहले और खाने के बाद जीवाणुनाशक साबुन से जरूर साफ करें। हमारे हाथों में जीवाणु छिपे रहते हैं, जो खाना खाने के दौरान हमारे मुंह से शरीर में चले जाते हैं। इन जीवाणुओं के इंफेक्शन से लिवर और पेट प्रभावित हो सकता है। व्यक्ति पेट से संबंधित समस्याओं और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का शिकार हो सकता है। घर की साफ-सफाई करने, छींक-खांसी होने पर, नाक-मुंह साफ करने, गार्डनिंग करने और शौच के बाद हाथों को 40 सेकंड तक साबुन लगाकर रगड़कर  साफ करना चााहिए। 

घर और रसोई की सफाई 

घर में बाहर से धूल-मिट्टी या जूतों के साथ गंदगी आने से घर गंदा हो जाता है, जिसकी रोजाना सफाई, फर्नीचर व शो-पीस में डस्टिंग करना जरूरी है। डस्टिंग न होने से सांस संबंधी बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। संभव हो तो बाहर से आते वक्त जूते या चप्पल घर के बाहर उतार कर आना बेहतर है। किचन या रसोई का संबंध सीधा पेट से और पेट का संबंध बीमारियों से है। किचन में गंदगी फैलाने वाले बैक्टीरिया भोजन के साथ हमारे शरीर में पहुंचते हैं और अनेक बीमारियों को बुलावा देते हैं। इसलिए रसोई का साफ-सुथरा होना बेहद जरूरी है। 

आजकल स्मार्ट किचन के प्रचलन के चलते किचन साफ करना आसान हो गया है।  शेल्फ, गैस स्टोव को रोजाना साफ करना चाहिए। किचन के ड्रार को महीने में एक-दो बार जरूर साफ करना चााहिए। ऐसा करने से उनमें कॉकरोच, कीड़े, मकड़ियां जैसे कीटों के होने का खतरा नहीं रहता। इलेक्ट्रिक एप्लाइसेंस और फ्रिज को सप्ताह में एक बार जरूर साफ करना चाहिए। 

रेस्त्रां के खानपान में सावधानी 

अक्सर हम आउटिंग के लिए जाते हैं और बाहर रेस्त्रां, होटल या ढाबे आदि में खाना खाते हैं। किसी अच्छे रेस्त्रां या होटल का ही चयन करें। कई बार साफ-सफाई का ध्यान न रखे जाने या खाना बनाने में किसी तरह की कमी आने की वजह से रेस्त्रां का खाना दूषित भी हो सकता है। खासकर गर्मी या बारिश के मौसम में खाने-पीने की चीजों में आसानी से रोटावायरस आदि रोगों के वायरस पनपने लगते है। खुले भोजन पर मंडराती मक्खियों से संक्रमित भोजन, बासा भोजन और संक्रमित पानी पीने से हेपेटाइटिस ए और ई का इंफेक्शन हो सकता है। आम भाषा में इसे जॉन्डिस या पीलिया भी कहा जाता है। दूषित खाना या गंदा पानी पीने से कई संक्रामक रोगों- डायरिया, टाइफाइड व हैजा होने का खतरा बढ़ जाता है। 

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