ये 4 तरह के मेडिटेशन करने से नहीं पड़ती झुर्रियां, बुढ़ापा भी रहता है दूर

आजकल जिस तरह लोगों का लाइफस्टाइल हो गया है उसमें उम्र से पहले ही झुर्रियां पड़ना और जल्दी बुढ़ापा लाजमी भी है और बहुत ही आम बात भी हो गई है। 

 ओन्लीमाईहैल्थ लेखक
लेटेस्टWritten by: ओन्लीमाईहैल्थ लेखकPublished at: Mar 30, 2018
ये 4 तरह के मेडिटेशन करने से नहीं पड़ती झुर्रियां, बुढ़ापा भी रहता है दूर

आजकल जिस तरह लोगों का लाइफस्टाइल हो गया है उसमें उम्र से पहले ही झुर्रियां पड़ना और जल्दी बुढ़ापा लाजमी भी है और बहुत ही आम बात भी हो गई है। डॉक्टर हमेशा इस चीज से छुटकारा पाने के लिए अपने लाइफस्टाइल को हेल्दी और अच्छा करने की बात करते हैं। आजकल आदमी के पास खुद को छोड़कर हर चीज के लिए वक्त है। जो उसके खराब स्वास्थ्य का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। कॉग्निटिव एनहेंसमेंट पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में तीन महीने तक पूर्णकालिक विपश्यना प्रशिक्षण लेने के बाद लोगों को उससे मिलने वाले फायदों का आकलन किया गया है। साथ ही इस बात का भी आकलन किया गया है कि क्या ये फायदे सात साल बाद भी बरकरार रहेंगे।

अमेरिका के डेविस में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने 30 लोगों की बोध क्षमताओं का आकलन किया जिन्होंने अमेरिका के एक विपश्यना केंद्र में तीन महीने तक विपश्यना का प्रशिक्षण लेने के बाद रोज ध्यान लगाया। शोध में यह पाया गया कि जिन लोगों ने ज्यादा विपश्यना की उनकी कम विपश्यना करने वाले लोगों के मुकाबले बोध क्षमताएं ज्यादा समय तक बरकरार रही और उनमें बढ़ती उम्र के साथ याद रखने की क्षमताएं कम होने की प्रवृत्तियां भी नहीं देखी गई।

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इस तरह करें मेडिटेशन

  • सब कुछ बंद करके इसी पर ध्यान देना ही विपश्यना ध्‍यान है।
  • पहले अभ्यास में उठते-बैठते, सोते-जागते, बात करते या मौन रहते किसी भी स्थिति में बस सांस के आने-जाने को नाक के छिद्रों में महसूस करते है।
  • विपश्यना बड़ा सीधा-सरल प्रयोग है। अपनी आती-जाती सांसों पर ध्‍यान दिया जाता है।
  • जैसे सांसों के आने-जाने को स्वाभाविक रूप से देखें या महसूस करें कि ये सांस छोड़ी और ये ली।
  • सांस लेने और छोड़ने के बीच जो गैप है, उस पर भी सहजता से ध्यान दें। जबरदस्‍ती इस काम को नहीं करना है।

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