दिल के मरीजों के लिए 'अकेलापन' है बेहद खतरनाक, दोगुना हो जाता है खतरा: शोध

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 12, 2018

आदमी के लिए लोगों के बीच रहना, किसी से अपने दिल की बातें शेयर करना और सुख-दुख में किसी का साथ मिलना बहुत जरूरी है। अकेलापन थोड़े वक्त के लिए ठीक है मगर लंबे समय तक अकेला रहना किसी भी इंसान को मानसिक रूप से परेशान कर सकता है। लेकिन दिल के मरीजों के लिए अकेलापन और ज्यादा खतरनाक है क्योंकि ये दिल की जानलेवा बीमारियों का खतरा दोगुना बढ़ा देता है। हाल में हुए एक शोध में ये बात सामने आई है कि दिल की बीमारी में अकेलेपन का एहसास घातक और जानलेवा साबित हो सकता है।
डेनमार्क के कॉपेनहेगन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में एक पीएचडी छात्र द्वारा किए गए शोध में पता चला है कि अकेलेपन के कारण लोगों में तरह-तरह की परेशानियां और बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने शोध में पाया कि अकेलेपन और सामाजिक अलगाव के कारण दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इस अध्ययन के लिए डेनमार्क के मरीजों को चुना गया और उनसे कुछ सवालों का जवाब पूछा गया।

अवसाद यानि डिप्रेशन है मुख्य वजह

अकेला व्यक्ति सोचता ज्यादा है। बेवजह सोचने और चिंता करने से अवसाद यानि डिप्रेशन की स्थिति पैदा हो जाती है और अवसाद दिल के लिए घातक साबित होता है। आजकल शहरों के साथ-साथ कुछ कस्बों तक में आधुनिक जीवनशैली और बदलते मूल्यों के कारण ज्यादातर लोग अकेले रहने को मजबूर हैं। लोग सोशल मीडिया पर जितने ज्यादा एक्टिव हैं, असल जिंदगी में उतने ही अकेले हैं। वर्चुअल फ्रैंड्स से आपका दिल बहल सकता है मगर अकेलेपन का असर दिमाग पर बुरा पड़ता है।

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व्यायाम, योग या मेडीटेशन करें

नियमित रूप योग, व्यायाम या मेडीटेशन करते रहने से आप तनाव से बचे रहेंगे। स्ट्रेस से बचना है तो आपको पर्याप्त नींद लेनी होगी। अपर्याप्त नींद तनाव के साथ साथ ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर बढाती है एवं कई रोगों को भी जन्म देती है। पानी पीने से तनाव बहुत कम होता है अतः जब भी आप तनाव में हों, पानी पीयें। भरपूर पानी पीते रहने से तनाव आपसे दूर हीं रहता है।

सिर्फ काम न करें अपना मन भी बहलायें

आज के ज़माने में घर की जरूरतें पूरी करने के लिए कई लोगों को ज्यादा से ज्यादा काम करने की जरुरत होती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप हर वक़्त सिर्फ काम हीं करते रहें। सिर्फ काम करते रहने से आपकी स्फूर्ति कम होती जाएगी और आपपर तनाव हावी होता जायेगा। इसलिए आप चाहे जितना भी काम करें, कुछ समय के लिए मन बहलाने वाली चीजों में भी मन लगायें। इससे आप तनाव से बचे रहेंगे साथ हीं साथ आपकी कार्य क्षमता भी बढ़ेगी। म्यूजिक सुनें, फ़िल्म देखें, कोई खेल खेलें, दोस्तों या परिवार के साथ या अपने किसी खास दोस्त के साथ गप्पे लड़ाएं या कही घूमने जायें या किसी अन्य गतिविधि में लिप्त हों जिसमें आपका मन लगता हो।

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अकेलेपन से हो सकता है माइग्रेन

  • जिन लोगों को हाई या लो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और तनाव जैसी समस्याएं होती हैं उनके माइग्रेन का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • एल्कोहल या किसी तरह का संक्रमण और शरीर में विषैले तत्वों का जमाव भी माइग्रेन का कारण हो सकता है।
  • भावनाओं को दबाने से भी माइग्रेन हो सकता है। इसलिए भावनाओं को दबाने के बजाय उन्‍हें अपने विश्वस्त लोगों से बांटें।
  • कभी-कभी आंखों पर अधिक जोर पड़ने से भी सिरदर्द हो जाता है। सिरदर्द कई तरह का होता है इसलिए अगर कोई आम कारण समझ में न आए तो किसी नेत्र विशेषज्ञ से भी मिलना चाहिए। अगर ऐसा हो तो आंखों के कुछ सामान्य व्यायाम से इससे राहत पाई जा सकती है।
  • सर्दी लगना, वायरस और बुखार भी सिरदर्द के कारण बन जाते हैं। इनके अलावा एक वजह आयरन की कमी भी होती है।
  • माइग्रेन का कारण आनुवांशिक भी हो सकता है। हार्मोनल असंतुलन की वजह से यह समस्या लड़कों की अपेक्षा लड़कियों में अधिक पाई जाती है।  
  • पर्याप्त नींद न लेना, भूखे पेट रहना और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना जैसे कुछ छोटे-छोटे कारणों से भी आपको माइग्रेन की शिकायत हो सकती है।
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