अगर हड्डियों में होता है ऐसा दर्द तो समझे हो गया है ल्यूकीमिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 06, 2018
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Quick Bites

  • ल्यूकीमिया सेल्स, रक्त को बहुत प्रभावित करते हैं।
  • ल्यूकीमिया के प्रकार पर निर्भर है रक्त कैंसर का इलाज।
  • एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकीमिया बचपन में होने की संभावना।

ल्‍यूकीमिया एक ऐसी बीमारी है जो ब्लड से जुड़ी हुई। इसलिए इसे ब्लड कैंसर भी कहा जाता है। ल्यूकीमिया को यदि हम एक खतरनाक और जानलेवा रोग कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। ल्यू‍कीमिया के लक्षणों को आसानी से पहचाना जा सकता है, लेकिन जो लोग ल्यूकीमिया के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और ल्यूकीमिया का समय पर इलाज नहीं करवाते उनका जीवन अधिकतम चार साल ही होता है। ल्‍यूकीमिया की सही समय पर जांच और चिकित्सा आपको कैंसर से बचा सकती है। 

ल्यूकीमिया के लक्षण 

  • शरीर के जोड़ों में दर्द होना।
  • हड्डियों में दर्द की शिकायत होना।
  • बार-बार एक ही तरह का संक्रमण होना।
  • बहुत तेज बुखार होना।
  • रोगी का इम्यून सिस्टम कमजोर होना।
  • हर समय थकान और कमजोरी महसूस करना।
  • नाक-मसूड़ों इत्यादि से खून बहने की शिकायत होना।
  • प्लेटलेट्स का गिरना।
  • भूख ना लगने की समस्या होना।
  • यदि चोट लगी है तो चोट का निशान पड़ जाना।
  • किसी घाव या जख्म के भरने में अधिक समय लगना।
  • शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन आना।
  • शरीर में जगह-जगह गांठों के होने का महसूस होना।
 

ल्यूकीमिया के प्रकार

आमतौर पर ल्यूकीमिया दो प्रकार का होता है लेकिन फिर भी ल्यूकीमिया के कई और प्रकार भी हो सकते हैं।

लिंफोसाईटिक ल्यू‍कीमिया: ल्यूकीमिया का यह प्रकार लिम्फोसाइट्स यानी लिंफॉईड कोशिकाओं के शरीर में अधिक वि‍कसित या फिर इनकी असामान्य उत्पत्ति  के कारण होता है।

माइलोसाईटिक ल्यूकीमिया: ल्यूकीमिया का यह प्रकार माइलोसाईट यानी मोनोसाईट्स सेल्स की मात्रा के बढ़ने से होता है। जब शरीर में बहुत अधिक मोनोसाईट्स उत्पन्न हो जाती है या फिर इनकी असीमित वृद्घि‍ होने लगती है तो माइलोसाईटिक ल्यूकीमिया विकसित होने लगता है।

इससे बचने के लिए करें ये काम

नाइट्रेटयुक्त पानी से दूर रहे

कीटनाशकों और नाइट्रेटयुक्त पानी का प्रयोग करने से ल्‍यूकीमिया होने का खतरा बढ़ता है। पेट्रोल और सिगरेट के धुएं से भी ल्‍यूकीमिया होने का खतरा होता है। इसलिए बाहर जाते समय चेहरे को अच्छे से ढक कर रखें और प्रदूषित जगहों जैसे- फैक्ट्रियों के पास जाने से बचें। ज्यादा तेज केमिकल वाले परफ्यूम या कीटनाशकों का प्रयोग करने से बचें।

इसे भी पढ़ें : क्या है ल्‍यूकीमिया की चिकित्‍सा का सही तरीका

एल्कोहल और धूम्रपान न करें

धू्म्रपान को छोडकर ल्‍यूकीमिया के खतरे को कम किया जा सकता है। धूम्रपान करने से शरीर के अंदर निकोटीन प्रवेश करता है जो कि कई प्रकार के कैंसर के लिए उत्तरदायी होता है। धूम्रपान ल्यूकीमिया के खतरे को बढाता है। रक्त कैंसर के 100 में से चार रोगियों में धूम्रपान से ल्यूकीमिया होता है। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन भी ल्‍यूकीमिया के लिए उत्तरदायी होते हैं। इसलिए धूम्रपान करने और धूम्रपान वाले स्‍थान में जाने से बचें।

रेडिएशन भी पहुंचाती है नुकसान 

एक्स-रे या अन्य रेडिएशन किरणों के संपर्क में आने से बचें क्योंकि रेडिएशन से ल्‍यूकीमिया होने का खतरा बढ जाता है। सीटी-स्कैन और रेडिएशन थेरेपी भी ल्‍यूकीमिया होने के खतरे को बढाते हैं। रेडिएशन की तेज बीम ब्लड में आसानी से प्रवेश कर जाती हैं और रेडिएशन स्वस्थ कोशिकाओं को समाप्त कर देता है जिससे कैंसर के सेल्स बढ़ते हैं।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट

रिकरेंट ल्यूकीमिया में अलग–अलग कीमोथेरेपी की अलग–अलग डोज दी जाती है जिससे कि यह बीमारी दोबारा ना होने पाये। कुछ लोगों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी किया जाता है। एक्यूट माइलायड ल्यूकीमिया की चिकित्सा मुख्यत: मरीज़ की उम्र पर और बीमारी के प्रकार पर निर्भर करती है। सभी प्रकार के एक्यूट ल्यू‍कीमिया के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक विकल्प होता है जबकि कीमोथेरेपी मात्र प्रभावी नहीं होती।

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