त्वचा से मवाद और पानी का बहना है कुष्ठ रोग के लक्षण, जानें कारण और बचाव

कुष्ठ रोग के बैक्टीरिया की पहचान 1873 के शुरुआत में ही पता लग गई थी। हालांकि इस रोग का अभी तक कोई टीका नहीं है और इसके लक्षण भी लंबे अरसे बाद दिखाई देना शुरू होते हैं। इसका उपचार न कराए जाने पर अपंगता भी हो सकती है।   

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaUpdated at: Jun 28, 2019 11:45 IST
त्वचा से मवाद और पानी का बहना है कुष्ठ रोग के लक्षण, जानें कारण और बचाव

कुष्ठ (leprosy) रोग यानी की कोढ़ सदियों पुरानी बीमारी है, जिसे भारत ने 2005 में 10,000 लोगों में किसी एक को होने का दावा किया था। एक दशक बीत जाने के बाद  विशेषज्ञों का मानना है कि कुष्ठ रोग को देश में बड़े पैमाने पर नजरअंदाज किया जा रहा है। कुष्ठ रोग जिसको लोग छुआछूत की बीमारी भी समझते हैं  उसकी मौजूदगी एक सदी से ज्यादा से पहचानी जाती रही है। कुष्ठ रोग के बैक्टीरिया की पहचान 1873 के शुरुआत में ही पता लग गई थी। हालांकि इस रोग का अभी तक कोई टीका नहीं है और इसके लक्षण भी लंबे अरसे बाद दिखाई देना शुरू होते हैं। इसका उपचार न कराए जाने पर अपंगता भी हो सकती है। 

 

हालांकि इस बीमारी का इलाज है लेकिन जागरूकता की कमी ने कुष्ठ रोगियों को सामाजिक मामलों में तब्दील कर दिया है, जिससे उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में कठिनाई आ रही है। 2005 में इस बीमारी को 'खत्म' घोषित कर दिया गया था क्योंकि 10 हजार लोगों में एक मामला सामने को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में नहीं देखा जाता है। लेकिन 2015 तक विशेषज्ञों ने माना कि भारत अभी भी कुष्ठ रोग से लड़ रहा है।

कुष्ठ रोग शिशुओं से लेकर बूढ़े लोगों तक किसी भी उम्र में हो सकता है। कुष्ठ रोग एक हवा जनित संक्रामक रोग है, जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है।   यह "माइकोबैक्टीरियम लेप्री" (Mycobacterium leprae) नामक बैक्टीरिया द्वारा फैलाया जाने वाला एक प्रकार का बैक्टीरियल संक्रमण है। कुष्ठ रोग नसों को नुकसान पहुंचाता है और हमारी त्वचा में घाव व मांसपेशियों में कमजोरी पैदा कर देता है। कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर उसके श्वसन तंत्र से निकलने वाले पानी में लेप्रे बैक्टीरिया होते हैं, जो हवा के साथ मिलकर दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाते हैं। इसके मरीज को छुआछूत, कोढ़ और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। अगर आप इस रोग के बारे में अधिक नहीं जानते हैं तो हम आपको इसके लक्षण और उपचार के बारे में बताने जा रहे हैं।

कोढ़ या कुष्ठ रोग के लक्षण (leprosy Symptoms)

  • शरीर सुन्न पड़ना ।
  • तापमान में बदलाव महसूस ना होना।  
  • किसी दूसरे का स्पर्श महसूस ना होना 
  • शरीर के हिस्सों पर सुई या पिन चुभने जैसा महसूस होना। 
  • शरीर में चकते, धब्बे और चकते व धब्बे वाले हिस्से में असवेदंशीलता होना।
  • शरीर के प्रभावित क्षेत्र में गाठों का उभरना। 
  • उस हिस्से से मवाद व पानी का बहना। 
  • घाव का ठीक ना होना और लगातार उस जगह से खून आना। 
  • धीरे धीरे अंगों और त्वचा का गलना। 
  • जोड़ों में दर्द होना। 
  • त्वचा पर दबाव देने पर किसी प्रकार की हरकत महसूस ना होना या कम महसूस होना।  
  • आंखों में सूखापन या पलक झपकना कम होना।
  •  बालों का झड़ना।
  • इसे भी पढ़ेंः शरीर की रक्त वाहिकाओं का आकार बिगाड़ देता है सिकल सेल एनीमिया, जानें लक्षण और उपचार का तरीका
  • कुष्ठ रोग के बढ़ने की वजह (leprosy Reasons)  
  • भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में रहना।
  • संक्रमित लोगों से लगातार शारीरिक संबंधी बनाना। 
  • कुपोषण। 
  • लंबे समय तक बिस्तर पर एक ही चादर का इस्तेमाल करना ।
  • तालाब, नदी जैसे खुले पानी में नहाना।

कुष्ठ रोग की रोकथाम (leprosy Prevention)

  • मल्टी ड्रग थैरेपी कुष्ठ रोग की रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है। रोगी को अगर समय रहते इस बीमारी का पता लग जाए तो इलाज संभव है। इसके अलावा बीच में इलाज छोड़ना आपके लिए घातक साबित हो सकता है। 
  • बीसीजी का टीका लगाने से कुष्ठ रोग से सुरक्षा मिलती हैं। 
  • कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों पर ध्यान न दें। 
  • मरीजों और लोगों के बीच इसकी जागरूकता बढ़ाएं।
  • इसे भी पढ़ेंः डेंगू से बचने के लिए अपनाएं ये 5 आसान उपाय, मानसून में रहेंगे रोगमुक्त

इन बातों का रखें ध्यान ( Take Note of leprosy Causes)

  • मरीज रोजाना सुबह उठ कर अपने अंगों को देखें।  
  • शरीर के किसी भी हिस्से में पैच या छाला, त्वचा पर जख्म, पैच की स्किन मोटी है या नहीं, आंखों में लालपन या पानी आने की समस्या को देखें। 
  • मरीज का अगर हाथ-पैर सुन्न हो तो नहाने के बाद गुनगुने पानी में थोड़ी देर अपने पैर रखें और फिर तेल से मालिश करें। 
  • छाला होने पर साफ कपड़ा बांधें और अगर परेशानी ज्यादा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • नुकीली चीजों से दूर रहें।
  • ज्यादा दूर तक पैदल न चलें।
  • थोड़ी-थोड़ी देर पर काम करें। 
  • पर्याप्त आराम करें।
  • आंखों पर चश्मा लगाकर रखें।
  • हाइजीन का ध्यान रखें  ।

कुष्ठ रोग आसानी से नहीं फैलता है। संक्रामक रोग होने के बावजूद यह छूने या हाथ मिलाने, उठने-बैठने या कुछ समय के लिए साथ रहने से नहीं फैलता है। इस रोग से पीड़ित होने वाले मरीज के सदस्यों को साफ-सफाई या हाइजीन का ध्यान रखना जरूरी है। यह कोई आनुवंशिक बीमारी नहीं है और इसे शुरुआत में ही ठीक किया जा सकता है और मरीज को अपंगता से बचाया जा सकता है।

Read More Articles On Other Diseases in Hindi

Disclaimer