जानें क्‍या है अवसाद

हर व्यक्ति कभी न कभी दुखी या उदास हो जाता है, लेकिन अक्सर यह अहसास क्षणिक होता है और कुछ ही दिनों में वह इस अहसास से उबर आता है।

Aditi Singh
अवसादWritten by: Aditi Singh Published at: Oct 08, 2015
जानें क्‍या है अवसाद

आजकल की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में हर तीसरा आदमी अवसाद का शिकार हो जाता जा रहा है। अवसाद कई बार थोड़े समय के लिए ही रहता है, कभी यही अवसाद भयानक रूप ले लेता है। जब कोई व्यक्ति अवसाद  संबंधी विकार से पीड़ित होता है, तो यह विकार उस व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन और उसके सामान्य कामकाज में बाधा डालता है तथा उस व्यक्ति और उसके परिवारजनों के दुखों का कारण बन जाता है। अधिकतर मामलों में अवसाद से गंभीर रूप से पीड़ित मरीज भी इलाज से बेहतर हो सकते हैं । इस रोग के लिए हुई गहन शोधों से इस रोग से ग्रसित लोगों के इलाज के लिए अनेक औषधियां, साइकोथेरेपी और इलाज के अन्य तरीके ईजाद हुए हैं ।

क्या होती है अवसाद की स्थिति  

अवसाद की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब हम जीवन के हर पहलू पर नकारात्मक रूप से सोचने लगते हैं। जब यह स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो व्यक्ति को अपना जीवन निरूद्देश्य लगने लगता है। जब मस्तिष्क को पूरा आराम नहीं मिल पाता और उस पर हमेशा एक दबाव बना रहता है तो समझिए कि तनाव ने आपको अपनी चपेट में ले लिया है। तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोन का स्तर बढ़ता जाता है, जिनमें एड्रीनलीन और कार्टिसोल प्रमुख हैं। लगातार तनाव की स्थिति अवसाद में बदल जाती है। अवसाद एक गंभीर स्थिति है। हालांकि यह कोई रोग नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि आपका शरीर और जीवन असंतुलित हो गया है।

अवसाद के कारण और लक्षण

अवसाद रोग का कोई एक ज्ञात कारण नहीं है। फिर भी अवसाद के कारणों में आनुवंशिकता, बायोकेमिकल, वातावरण और मनोवैज्ञानिक संबंधी मिश्रित घटकों का समावेश होता है। अनेक शोधों के अनुसार अवसाद से संबंधित बीमारियां मस्तिष्क के विकार हैं।पुरूषों की तुलना में महिलाएं डिप्रेशन से अधिक प्रभावित होती हैं। किसी भी काम में मन न लगना।ज़िन्दगी के लिए एक उलझा हुआ नज़रिया होना। बिना कारण वज़न का बढ़ना या कम होना। खान पान की आदतों में बदलाव करना। आत्महत्या के उपाय करना और आत्महत्या के बारे में सोचना। मन की एकाग्रता खोना, मन का एकाग्र न हो पाना आदि अवसाद के लक्षण होता है।


परिवार में यदि किसी को अवसाद के लक्षण दो सप्ताह तक दिखाई दें, तो बिना देरी के मनोचित्सक या मनोवैज्ञानिक या दोनो की सलाह लेनी चाहिये।

 

 

 

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