बाइपोलर डिसआर्डर को ठीक करने के लिए उठाएं यह प्रभावी कदम

बाइपोलर डिसआर्डर नामक दिमागी विकार को नियंत्रित करने के लिए महज मेडीकेशन व थेरेपी करना ही काफी नहीं होता। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को मूड डिसआर्डर से निपटने के लिए अपने जीवन में कुछ एडजस्टमेंट करने की आवश्यकता होती है ताकि उसके मूड स्विंग्स व बी

मिताली जैन
विविधWritten by: मिताली जैनPublished at: Dec 29, 2018
बाइपोलर डिसआर्डर को ठीक करने के लिए उठाएं यह प्रभावी कदम

बाइपोलर डिसआर्डर नामक दिमागी विकार को नियंत्रित करने के लिए महज मेडीकेशन व थेरेपी करना ही काफी नहीं होता। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को मूड डिसआर्डर से निपटने के लिए अपने जीवन में कुछ एडजस्टमेंट करने की आवश्यकता होती है ताकि उसके मूड स्विंग्स व बीमारी के लक्षण काफी हद तक नियंत्रित हो सके। तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ प्रभावी कदमों के बारे में-

नींद का रखें ध्यान

मैक्स हेल्थकेयर के मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियर साइंस के डायरेक्टर डाॅ. समीर मल्होत्रा कहते हैं कि बाइपोलर डिसआर्डर से पीड़ित व्यक्ति को अपने स्लीप पैटर्न पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसे व्यक्ति के लिए बेहद आवश्यक है कि वह नियमित रूप से समय पर सोए व उठे। बाइपोलर डिसआर्डर से पीड़ित व्यक्ति की सबसे पहले नींद ही डिस्टर्ब होती है। यह कुछ ऐसा ही है, जैसे एक मधुमेह पीड़ित व्यक्ति को समय पर इंसुलिन लेने की आवश्यकता पड़ती है और अगर ऐसा न किया जाए तो इससे उसकी समस्या बढ़ सकती है।

दवाईयों में लापरवाही नहीं

इस समस्या को नियंत्रित करने में दवाईयों व थेरेपी का एक अहम रोल होता है। इसलिए दवाईयों के सेवन के लिए किसी भी तरह की लापरवाही आपके लिए घातक हो सकती है। ऐसे व्यक्ति को न सिर्फ समय पर दवाई और थेरेपी लेनी चाहिए, बल्कि रोग विशेषज्ञ से भी हमेशा संपर्क में रहना चाहिए और उनकी सलाह पर अपनी दिनचर्या में आवश्यक बदलाव लेकर आएं।

न हो मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव

डाॅ. समीर मल्होत्रा कहते हैं कि बाइपोलर डिसआॅर्डर एक दिमागी विकार है। इसमें व्यक्ति कभी बहुत ज्यादा उत्साहित व आत्मविश्वासी होता है तो कभी बिल्कुल हताश। इसलिए इस तरह के मनोविकार से निपटने का एक बेहद आसान तरीका है कि ऐसा कोई भी काम न करे, जो मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव बनाए। मसलन, नशे का सेवन बिल्कुल न करें। साथ ही किसी भी बात को मस्तिष्क पर हावी न होने दें। तनाव आपकी समस्या को कई गुना बढ़ा सकता है। मस्तिष्क को शांत करने के लिए कुछ रिलैक्सिंग तकनीक जैसे डीप ब्रीदिंग, प्रणायाम, सूर्य नमस्कार व मेडीटेशन आदि का सहारा भी लिया जा सकता है।

बनाएं मूड चार्ट

बाइपोलर डिसआॅर्डर से पीड़ित व्यक्ति के मूड स्विंग्स बहुत ज्यादा होते हैं। ऐसे में खुद को स्टेबल बनाने का एक आसान तरीका है कि आप एक मूड चार्ट बनाएं। इसमें आप प्रतिदिन के अपने मूड्स के बारे में लिखें। इससे आपको आत्म मूल्याकंन करने और अपनी स्थिति को समझने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त इस चार्ट में बाइपोलर डिसआर्डर के उन लक्षणों को भी लिखें, जो चेतावनी का संकेत हो। जब भी आपको ऐसा कोई भी लक्षण अपने भीतर दिखें, तुरंत उपचार करें। 

अपनाएं उपचारात्मक विधि

बाइपोलर डिसआर्डर को नियंत्रित करने के लिए तत्काल उपचारात्मक विधि में सबसे पहले तो आप अपने डाॅक्टर या थेरेपिस्ट को काॅल कर सकते हैं, उससे आपको सही सलाह प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त अपने किसी भी करीबी व्यक्ति से बात करें या मिलना भी एक अच्छा विचार हो सकता है। वहीं उस समय कुछ फन व क्रिएटिव चीजें करने से इसे लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। इस दौरान खुद को समय देना बेहद आवश्यक होता है। इसलिए खुद को रिलैक्स करने की कोशिश करंे। 

यह भी हैं तरीके

  • बाइपोलर डिसआर्डर से पीड़ित व्यक्ति के लिए अपनी दिनचर्या में कुछ बदलाव करना बेहद आवश्यक होता है। मसलन, ऐसी व्यक्ति को नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। कुछ एक्सरसाइज जैसे वाॅकिंग, रनिंग, स्वीमिंग, डांसिंग व ड्रमिंग उनके मूड को स्थिर बनाने का काम करता है। 
  • इसके अतिरिक्त दिन में नैप लेने से परहेज करें। इसके स्थान पर रात्रि में समय पर सोएं और प्रतिदिन स्लीप का एक ही समय रखें।
  • रात को सोने से पहले टीवी देखने के स्थान पर नहाना, किताब पढ़ना या रिलैक्सिंग म्यूजिक सुनने की आदत डालें। इससे भी माइंड काफी हद तक रिलैक्स होता है और नींद अच्छी आती है।
  • आहार भी मूड को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए अपनी डाइट में ताजा फल, सब्जियां, अनाज, ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त भोजन जैसे साल्मन, सोयाबीन्स, फलैक्ससीड्स, कैनोला आॅयल, कद्दू के बीज आदि को शामिल करें। इसके अतिरिक्त हाई कार्बोहाइडेट युक्त भोजन, फैट्स, शुगर, चाॅकलेट, कैफीन व प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करें।

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