शिशु के शरीर पर पाउडर लगाना हो सकता है खतरनाक, बरतें ये सावधानी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 28, 2018
Quick Bites

  • बेबी पाउडर टैल्क नाम के मुलायम खनिज को पीसकर बनाया जाता है।
  • बहुत महीन पिसा होने के कारण ये छोटे कणों में बदल जाता है।
  • इसके माइक्रो पार्टिकल्स सांस खींचने के दौरान शिशु के फेफड़ों में चले जाते हैं।

हम उन बातों पर आसानी से विश्वास कर लेते हैं जिन्हें आंखों से देख लेते हैं। आदमी की इसी साइकोलॉजी का फायदा एडवर्टाइजिंग कंपनियां उठाती हैं और ढेर सारा मुनाफा कमाती हैं। टीवी, अखबार, मैग्जीन और साइनबोर्ड्स आदि के जरिये हमें छोटे बच्चों और शिशुओं के अच्छे स्वस्थ के लिए जरूरी तमाम प्रोडक्ट्स के विज्ञापन दिखाए जाते हैं। हम जानते हैं कि आप अपने शिशु को बहुत प्यार करते हैं और उसके लिेए जरूरी चीजें कितनी भी मंहगी हों, आप खरीदते हैं। लेकिन जरूरी नहीं है कि विज्ञापनों में दिखने वाले सभी प्रोडक्ट्स आपके बच्चे के लिए अच्छे हों। इसलिए इनका चुनाव करते समय आपको विशेष सावधानी की जरूरत होती है। ऐसा ही एक प्रोडक्ट है टैल्कम पाउडर या बेबी पाउडर।

क्या सुरक्षित है टैल्कम पाउडर का प्रयोग

अगर बाल रोग विशेषज्ञों की मानें तो टैल्कम पाउडर का प्रयोग सुरक्षित है मगर इसे बहुत सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। जबकि ज्यादातर लोग इसका गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं जो कई बार शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है। दरअसल टैल्कम पाउडर या बेबी पाउडर टैल्क नाम के मुलायम खनिज को पीसकर बनाया जाता है। बहुत महीन पिसा होने के कारण ये इतने छोटे कणों में बदल जाता है कि त्वचा पर इसे लगाने से हमें चिकनाई महसूस होती है। हालांकि त्वचा पर टैल्कम पाउडर के प्रयोग से कोई विशेष नुकसान नहीं होता अगर आपकी त्वचा पाउडर को लेकर ज्यादा संवेदनशील नहीं है।

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क्या हो सकती है परेशानी

आकर्षक खुश्बुओं से भरे ये टैल्कम पाउडर जब आप शिशुओं के शरीर पर लगाते हैं तो इसके माइक्रो पार्टिकल्स यानि छोटे-छोटे कण सांस खींचने की प्रक्रिया के दौरान आपके शिशु के नाक और मुंह में चले जाते हैं। सांस के जरिये खींचे गए ये कण सांस नली में पहुंच जाते हैं। अगर लगातार प्रयोग से शिशु के शरीर में पाउडर ज्यादा मात्रा में इकट्ठा हो जाए, तो उसे सांस और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। शिशु के अंग बहुत नाजुक होते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी उतनी विकसित नहीं हो पाती है जितना वयसकों की होती है। इसलिए पाउडर के इन माइक्रो पार्टिकल्स के सांस के जरिये शिशु के अंदर जाने से उसके नाजुक वायुकोषों में जलन हो सकती है और उसे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। अगर आप सोचते हैं कि बच्चों के लिए एस्बेस्टस फ्री टैल्कम पाउडर सुरक्षित है, तो आप गलत हैं क्योंकि इसके महीन कण भी शिशु के फेफड़ों में सांस के जरिये पहुंच सकते हैं।

सांस लेने में हो सकती है परेशानी

अगर ज्यादा मात्रा में एकसाथ या कम मात्रा में लगातार टैल्कम पाउडर सांस के द्वारा शरीर में पहुंच रहा है तो शिशुओं के साथ-साथ इसका खतरा बड़ों को भी समान रूप से होता है। दरअसल जब सांस के जरिये टैल्कम पाउडर के छोटे कण मुंह और नाक में जाते हैं तो ये म्यूकस पर चिपक जाते हैं और उसकी नमी को सोख लेते हैं, जिसकी वजह से शिशु या प्रभावित इंसान को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। गंभीर मामलों में फेफड़े काम करना भी बंद कर सकते हैं। कई मामलों में शिशुओं की सांस रुक जाने के कारण मौत भी हो सकती है।

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क्या है सुरक्षित तरीका

अगर आपको शिशुओं के शरीर पर बेबी पाउडर लगाना ही है तो इसके लिेए आपको इसे लगाने का तरीका बदलना पड़ेगा। शिशु के शरीर पर डिब्बे से सीधे पाउडर छिड़कने और मलने से बहुत सारा पाउडर उसके मुंह में चला जाता है। इसलिए जब भी पाउडर लगाएं शिशु से कम से एक एक मीटर दूर रहकर पाउडर को अपने हाथों में गिराएं और हाथों में ही मलकर झाड़ लें। फिर शिशु के शरीर पर हल्के-हल्के रगड़कर बिना थपथपाए हुए लगाएं।
इन बातों का भी ध्यान रखें

  • शिशु को कभी भी पाउडर का डिब्बा खेलने या मुंह में भरने के लिए न दें।
  • गीली त्वचा पर कभी भी पाउडर न लगाएं। त्वचा को पूरी तरह सूख जाने दें नहीं तो पाउडर त्वचा पर चिपक जाएगा।
  • डाइपर के रैशेज से बचाने के लिए बच्चों के जांघों पर ही लगाएं और बहुत कम मात्रा में लगाएं।
  • बच्चों के प्राइवेट पार्ट्स के पास पाउडर बिल्कुल न लगाएं। खासकर गर्ल चाइल्ड के लिए विशेष ध्यान दें क्योंकि इससे ओवरियन कैंसर का भी खतरा होता है।
  • घमौरी वाले पाउडर्स का इस्तेमाल बच्चों की त्वचा पर डॉक्टर की सलाह लेकर ही करें।
  • शिशु के मुंह में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल न करें या बेहद कम मात्रा में करें और ऊपर बताए हुए तरीके से ही करें।
  • शिशु के शरीर पर पाउडर लगाने के लिए पफ का इस्तेमाल कभी न करें क्योंकि इससे पाउडर ज्यादा मात्रा में उड़ता है।

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