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गर्म या ठंडी सिंकाई: सर्दियों में दर्द से राहत के लिए कौन है ज्यादा असरदार?

सर्दियों में दर्द या सूजन में कौन-सी सिकाई करें? जानिए सर्टिफाइड स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट अनुभव वर्मा से बर्फ और गर्म सिंकाई के फायदे और सही तरीका।
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गर्म या ठंडी सिंकाई: सर्दियों में दर्द से राहत के लिए कौन है ज्यादा असरदार?

सर्दियों के मौसम में जोड़ों का दर्द, पीठ का जकड़ना या मांसपेशियों में खिंचाव जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं। दरअसल ठंड में शरीर का ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है, जिससे मांसपेशियां अकड़ जाती हैं और दर्द महसूस होता है। ऐसे में राहत के लिए ज्यादातर लोग सिंकाई (Compress Therapy) का सहारा लेते हैं। कोई हॉट वॉटर बैग से गर्म सिंकाई करता है, तो कोई आइस पैक से ठंडी। ऐसे में कई लोग कंफ्यूज रहते हैं कि सर्दी में दर्द या सूजन होने पर कौन-सी सिंकाई ज्यादा असरदार है- बर्फ की ठंडी सिंकाई या गर्म सिंकाई? अगर आप भी इसे लेकर कंफ्यूज रहते हैं, तो आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं सर्टिफाइड स्पोर्ट्स न्यूट्रिशनिस्ट अनुभव वर्मा से।


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बर्फ की सिंकाई (Cold Compress) कब करें?

बर्फ की सिंकाई को आइस थेरेपी (Ice Therapy) भी कहा जाता है। यह सूजन और दर्द कम करने में मदद करती है, खासकर जब चोट नई हो। ठंडी सिंकाई से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड फ्लो कम होता है और सूजन घटती है।

cold-compress

इन स्थितियों में करें बर्फ की सिंकाई:

  • नई चोट या मोच आने के पहले 24–48 घंटे के भीतर
  • जोड़ों या टखनों में सूजन होने पर
  • चोट के बाद लालिमा या जलन वाले हिस्से में दर्द होने पर
  • सिर या घुटनों की हल्की चोट में

बर्फ की सिंकाई कैसे करें:

  • बर्फ के टुकड़ों को एक पतले कपड़े में लपेटें और दर्द वाले हिस्से पर 10–15 मिनट लगाएं।
  • बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं, इससे स्किन बर्न का खतरा होता है।

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गर्म सिंकाई (Hot Compress) कब करें?

गर्म सिंकाई का असर ठंडी सिंकाई से अलग होता है। यह ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और जकड़ी हुई मांसपेशियों को रिलैक्स करती है। सर्दी के दिनों में जब मांसपेशियों में अकड़न (Stiffness) बढ़ जाती है, तब गर्म सिंकाई बहुत असरदार होती है।

Hot Compress

इन स्थितियों में करें गर्म सिंकाई:

  • पुराने दर्द (Chronic Pain) में
  • पीठ, गर्दन या कंधे के जकड़न वाले दर्द में
  • पीरियड्स में होने वाले दर्द में
  • अर्थराइटिस के दर्द या मांसपेशियों के खिंचाव में

कैसे करें गर्म सिंकाई:

इसके लिए हॉट वॉटर बैग या इलेक्ट्रिक हीट पैड में गुनगुना पानी भरें और दर्द वाले हिस्से पर 10–15 मिनट लगाएं। बहुत ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल न करें ताकि त्वचा को नुकसान न हो।

कब करें दोनों तरह की सिंकाई?

कई बार शरीर में दर्द और सूजन दोनों रहती है। ऐसे में ठंडी और गर्म सिंकाई को बारी-बारी से करना असरदार होता है। यह तरीका खासकर इन स्थितियों में मदद करता है:

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis)
  • फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia)
  • गर्दन या पीठ का पुराना दर्द
  • लंबे समय से बनी सूजन या जकड़न

पहले ठंडी सिंकाई से सूजन घटाएं, फिर गर्म सिंकाई से मांसपेशियों को रिलैक्स करें। इससे दर्द में तेजी से राहत मिलती है और रिकवरी बेहतर होती है।

एक्सरसाइज के तुरंत बाद सिकाई न करें

अगर आप एक्सरसाइज या फिजिकल एक्टिविटी के बाद दर्द या जकड़न महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत सिंकाई करने से बचें। वर्कआउट के बाद शरीर में तापमान और ब्लड फ्लो दोनों बढ़े होते हैं। इस वक्त सिंकाई करने से उल्टा असर हो सकता है। पहले हल्की स्ट्रेचिंग करें, शरीर को आराम दें और जरूरत हो तो कुछ घंटे बाद सिंकाई करें।

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एक्सपर्ट की सलाह

अनुभव वर्मा कहते हैं, "अगर चोट नई है तो बर्फ की सिंकाई करें। अगर दर्द पुराना या जकड़न वाला है तो गर्म सिंकाई फायदेमंद रहती है। लेकिन अगर यह समझ न आए कि किस तरह की सिंकाई करें, तो फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर रहता है।"

सर्दियों में मांसपेशियां ज्यादा जल्दी जकड़ती हैं, इसलिए लोग गर्म सिकाई को ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन अगर दर्द की वजह चोट या सूजन है, तो ठंडी सिंकाई ज्यादा फायदेमंद होती है। दूसरी ओर, अगर दर्द पुराना या मांसपेशियों की जकड़न वाला है, तो गर्म सिंकाई से बेहतर राहत मिलती है। इसलिए सर्दी में सिकाई करते समय सिर्फ मौसम नहीं, दर्द की वजह को समझें, तभी सिकाई का सही फायदा मिलेगा और शरीर जल्दी रिकवर करेगा।

Image Credit: Freepik

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FAQ

  • चोट में बर्फ की सिंकाई कब करनी चाहिए?

    अगर चोट ताजा है, जैसे मोच, गिरने या अचानक खिंचाव के बाद, तो बर्फ की सिंकाई पहले 24 से 48 घंटों के अंदर करें। इससे सूजन और दर्द जल्दी कम होते हैं।
  • गर्म सिंकाई कब फायदेमंद होती है और कब नहीं?

    गर्म सिंकाई पुराने दर्द, मांसपेशियों में जकड़न या अर्थराइटिस में फायदेमंद है। लेकिन अगर चोट में सूजन या लालिमा हो, तो गर्म सिंकाई से सूजन बढ़ सकती है।
  • क्या ठंडी और गर्म सिंकाई दोनों साथ में की जा सकती हैं?

    हां, कुछ स्थितियों जैसे ऑस्टियोआर्थराइटिस या मसल पेन में पहले ठंडी और फिर गर्म सिंकाई से बेहतर राहत मिलती है। इसे Contrast Therapy कहा जाता है, लेकिन इसे करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेनी जरूरी है।

 

 

 

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  • Oct 31, 2025 18:17 IST

    Modified By : सम्पादकीय विभाग
  • Oct 31, 2025 18:17 IST

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  • Nov 26, 2023 14:00 IST

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