मानसिक रोगों के लक्षणों को कैसे पहचाने

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 22, 2014
Quick Bites

  • जानकारी के अभाव में लोग मानसिक रोगों को पहचान नहीं पाते।
  • मनोरोगों से ग्रस्त किसी इंसान का व्यवहार असामान्‍य होता है।
  • इसके जैविक, वातावरण जनित व मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं।
  • भावनाओं या मिजाज में नाटकीय परिवर्तन इसके मुख्य लक्षण होते हैं।

आजकल स्मृति का कमजोर हो जाना, भय लगना, अवसाद आदि शिकायतें आम होती जा रही है। कहीं न कहीं ये मानसिक बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं। जानकारी के अभाव या सुस्त रवैये के कारण अक्सर लोग मानसिक रोगों को पहचान नहीं पाते, या फिर इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। जिस कारण भविष्य में ये गंभीर रूप ले लेते हैं। मानसिक रोगों से बचाव के लिए इनके लक्षणों को समय से पहचाना बेहद जरूरी होता है। चलिए जानते हैं कि मानसिक रगों के लक्षणों को कैसे पहचाना जाए।

Mental Illness

लगातार बदलती जा रही जीवनशैली ने न सिर्फ लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है, बल्कि मानसिक तौर पर भी काफी क्षति पहुंचाई है। यही कारण है कि मानसिक रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती रही है। मानसिक रोगियों को शारीरिक रोगियों की तुलना में अधिक देखभाल और सहानुभूति की जरूरत होती है, लेकिन होता हमेशा इसका उल्टा है। लोग मानसिक रोग और इसके पीड़ितों को घृणा की दृष्टि से देखते हैं। इसी कारण मानसिक रोग से पीड़ित लोग भी इस समस्या को छुपाते हैं और मानसिक रोगों के लक्षण नजर आने पर भी लोग इस बारे में खुलकर बात नहीं करते। यहां तक कि वे डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं। इससे रोग बढ़ता जाता है और गंभीर परिणाम झेलने पड़ते हैं। पूरे विश्व में तेजी से बढ़ती मानसिक रोगियों की संख्या को देखते हुए इनके प्रति जागरूकता बढ़ाना और इन रोगों के पुख्ता इलाज तलाशना बेहद जरूरी है।

 

 

मनोरोग क्या हैं

मनोरोग किसी व्यक्ति के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की वह स्थिति होती है, जिसकी तुलना किसी स्वस्थ व्यक्ति से करने पर वह 'सामान्य' नहीं होती। स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में मनोरोगों से ग्रस्त किसी व्‍यक्ति का व्यवहार असामान्‍य अथवा दुरनुकूली (मैल एडेप्टिव) होता है। इन्हें मानसिक रोग, मनोविकार, मानसिक बीमारी अथवा मानसिक विकार के नाम से भी जाना जाता है। मनोरोग मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन होने के कारण होते हैं, तथा इनके उपचार के लिए मनोरोग चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

 

मानसिक रोगों के कारण

मानसिक रोगों के कई जैसे जैविक, वातावरण जनित, मनोवैज्ञानिक व सामाजिक आदि कारण हो सकते हैं। इनमें से मुख्य कारण निम्न प्रकार से हैं।

 

आनुवंशिक कारण

साइकोसिस (जैसे स्कीजोफ्रीनिया, उन्माद, अवसाद इत्यादि), व्यक्तित्व रोग, मदिरापान, मंदबुद्धि होना, मिर्गी इत्यादि आदि रोग उन लोगों में ज्यादा मिलते हैं, जिनके परिवार में इसका को कोई इतिहास हो, उनकी संतान को इनका खतरा सामान्‍य लोगों की अपेक्षा लगभग दोगुना हो जाता है।

 

व्यक्तित्व

अपने में खोये रहने वाले, चुप रहने वाले, कम दोस्ती करने वाले व स्कीजायड व्यक्तित्व वाले लोगों में स्कीजोफ्रीनिया अधिक होता है, जबकि अनुशासित तथा सफाई पसंद, समयनिष्ठ, मितव्ययी जैसे गुणों वाले लोगों में बाध्य विक्षिप्त अधिक होता है।

 

खान-पान से जुड़े कारण

कुछ दवाओं, रासायनिक तत्वों, धातुओं, शराब व अन्य नशीले पदार्थों आदि का सेवन मनोरोगों के होने का कारण बन सकते हैं।

 

 

मनोवैज्ञानिक कारण

आपसी संबंधों में तनाव, किसी प्रिय व्यक्ति का गुजरना, सम्मान को ठेस लगना, काम में भारी नुकसान, शादी, तलाक, एक्जाम या प्यार में असफलता आदि मनोरोगों के कारण बन सकते हैं।

 

क्या हैं लक्षण और इन्हें कैसे पहचाने

इस बात में कोई शक नहीं कि अधिकतर मानसिक रोगों की लक्षण लगभग समान ही होते हैं। कोई भी मानसिक रोग इससे प्रभावित व्यक्ति के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित करता है, इसीलिए इसे रोग, सिंड्रोम, या डिसॉर्डर कहा जाता। मानसिक रोगों के मुख्य लक्षण निम्न प्रकार होते हैं।

  • सामाजिक लोगों से कटाव और अकेले रहना। 
  • कामकाज में असामान्यता, विशेष रूप से स्कूल या काम की जगह पर, खेल आदि में अरूचि, स्कूल में असफल रहना आदि।
  • एकाग्रता में समस्या, याददाश्त कमजोर होना, या समझने में मुश्किल होना।
  • गंध, स्पर्श व जगहों के प्रति अधिक संवेदनशीलता व उत्तेजना।
  • किसी भी गतिविधि में भाग लेने के लिए इच्छा की कमी, या उदासीनता।
  • अपने आप से ही काट-कटा महसूस करना।  
  • डर या दूसरों के प्रति शक्कीपन या हमेशा नर्वस महसूस करना।
  • अस्वाभाविक और अजीब व्यवहार।
  • नाटकीय नींद और भूख में परिवर्तन या व्यक्तिगत स्वच्छता में कमी।
  • भावनाओं या मिजाज में तेजी से या नाटकीय परिवर्तन होना।



ऐसे किसी भी रोग से छुटकारा पाना उतना आसान नहीं होता जितना प्रतीत होता है। अधिकांश मानसिक रोग मष्तिष्क में आये किन्हीं बदलाव या रासायनिक असंतुलन के कारण होते हैं। इसलिए परिवार के साथ और सही डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है। किसी भी मानसिक प्रक्रिया या प्रतिक्रिया को परिवर्तित करना उतना सरल नहीं होता जितना लोग इसे समझते हैं।



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