रोजाना की ये गलती बढ़ाती है कैंसर का खतरा, रहें सावधान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 02, 2018
Quick Bites

  • जानकारी और जागरुकता की कमी से गंभीर हो जाती है समस्या।
  • सेल के जेनेटिक कोड में बदलाव होने से कैंसर पैदा हो जाता है।
  • अरबों सेल्स होने पर ट्यूमर पहचानने लायक आकार में आता है। 

इस बात में कोई शक नहीं कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है। लेकिन लोगों में इस गंभीर समस्या के प्रति जानकारी और चेतना की भारी कमी है। जो इस समस्या को ज्यादा खतरनाक बना देती है। कहते हैं जानकारी ही बचाव का सबसे सही तरीका होता है और यह बात सोलह आने सच भी है। यदि कैंसर के प्रति सही जानकारी रखी जाए और इसके जोखिमों को बढ़ाने वाले कारकों से दूर रहा जाए तो इस खतरनाक रोग से बचना संभव है।

केवल 58 प्रतिशत जागरुक

ब्रिटेन में आंकड़े की मानें तो 60 से 74 वर्ष की उम्र के बीच इस बीमारी के प्रति 58 प्रतिशत लोगों में ही जागरूकता है। जबकि स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के मामले में जागरूकता का प्रतिशत 72 से 79 प्रतिशत है। संसदीय प्रश्नोत्तर के दौरान मिले आंकड़ों में क्षेत्रीय भिन्नता भी देखने को मिली। उदाहरण के लिए डोरसेट में 66 प्रतिशत लोग इस बीमारी को लेकर जागरूक हैं, तो वहीं पश्चिमी लंदन के केवल 42 प्रतिशत लोग ही बीमारी के बारे में जानते हैं। लंदन एक विकसित जगह है जब वहां जागरूकता के ये आंकड़े हैं तो भारत जैसे चिकित्सा सुविधाओं की कमी वाले देश की स्थिति तो आप सोच ही सकते हैं।

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कैसे होता है कैंसर

कोशिका हमारे शरीर की सबसे छोटी इकाई है। मानव शरीर में 100 से 1000 खरब सेल्स होते हैं। हर समय ढेरों कोशिकायें पैदा होती रहती हैं। इसके साथ-साथ पुराने व खराब कोशिकायें नष्ट भी होती रहती हैं। जिससे इनका संतुलन बना रहता है। कैंसर होने पर यह संतुलन बिगड़ जाता है और सेल्स की असंतुलित बढ़ोतरी होती रहती है। असंतुलित जीवनशैली और तंबाकू, शराब जैसी चीजों के सेवन से किसी सेल के जेनेटिक कोड में बदलाव होने से कैंसर पैदा हो जाती हैं।

इस बात को कुछ यूं समझते हैं। आमतौर पर जब किसी कारण सामान्य सेल में जब कोई खराबी आ जाती है तो वे खराब सेल अपने जैसे और खराब सेल्स पैदा नहीं करता और खुद नष्ट हो जाता है। वहीं इसके उलट कैंसर सेल खराब होने पर नष्ट होने के बजाय अपने जैसे हानिकारक सेल पैदा करता जाता है। ये खराब सेल वे सही सेल्स के कामकाज में रुकावट डालने लगते हैं। हां कैंसर सेल एक जगह टिककर नहीं रहते। अपनी जगह से निकलकर वे शरीर में दूसरे अंगों पर भी फैलने लगते हैं। हालांकि ट्यूमर बनने में महीनों, बरसों, यहां कर कि कई बार तो दशकों लग जाते हैं। दुखद है कि कम-से-कम एक अरब सेल्स के जमा होने पर ही ट्यूमर पहचानने लायक आकार में आता है।

कैंसर के कारण और बचाव

कैंसर के तीन प्रमुख कारण हैं, सिगरेट, शराब और कई प्रकार के संक्रमणों के संपर्क में आना तथा हाय फैट डायट लेने से और शरीर में फैट की मात्रा अधिक होना से। इस के अन्य भी कई कारण हो सकते हैं, तो चलिये इन कारणों और इनसे बचाव के तरीकों पर एक नज़र डालें।

धूम्रपान है बड़ा कारण

विशेषज्ञ बताते हैं कि कैंसर के लगभग आधे मामले कम किए जा सकते हैं बशर्ते धूम्रपान के बढ़ते शौक पर लगाम कसी जा सके। गौरतलब है कि कैंसर के ट्यूमर का हर पांचवां मामला सिगरेट पीने से होता है। धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर के अलावा और कई प्रकार के ट्यूमर का कारण बन सकता है। इसके अलावा ज्यादा शराब पीना, खाने की नली, गले, लिवर और ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ा देता है। एल्कोहल की ज्यादा मात्रा और साथ में तंबाकू का सेवन कैंसर का खतरे को कई गुना बढ़ा देता हैं। इसलिए इसे कम नहीं बंद कर दें।

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नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार  

कई रिसर्च बताते हैं कि नियमित व्यायाम से ट्यूमर का खतरे को कई गुना कम कर देता है। इसकी वजह यह है कि कसरत से शरीर में इंसुलिन का स्तर कम हो जाता है। जरूरी नहीं कि आप शरीर तोड़ कसरत ही करें आप एक्टिव रहें और पैदल चलें। साइकिल चलाने और टहलने से भी फायदा होता है। हां रेड मीट कम खाएं, क्योंकि कुछ शोधों के अनुसार आंतों के कैंसर के लिए इसे जिम्मेदार माना जाता है। वहीं मछली का मांस कैंसर से बचाता है। कैंसर के 30 फीसदी मामलों को सही खानपान के जरिए रोका जा सकता है।

तेज धूप से बचें

सूरज की पराबैंगनी किरणें शरीर में काफी भीतर तक जाकर, कोशिकाओं में प्रवेश कर जीनोम यानी उनकी आनुवांशिक संरचना को बदल सकती हैं। विशेषतौर पर सन टैन के शौकीनों को इस बात पर खासा ध्यान देना चाहिये, क्योंकि ज्यादा धूप से त्वचा का कैंसर हो सकता है। आमतौर पर भी बाहर तेज धूप में निकलने पर सनस्क्रिन लगाकर या सबसे बेहतर है कि छाता लेकर निकलें।

आधुनिकता हो सकती है कारण

कुछ अध्ययनों के मुताबिक एक्सरे से जीनोम यानि आनुवांशिक संरचना पर असर पड़ता है। हवाई जहाजों में सफर के दौरान या मोबाइल नेटवर्क की रेडियेशन तरंगों से भी लोग कैंसर पैदा करने वाले विकिरण के संपर्क में आ सकते हैं। इसके अलावा र्मोन थेरपी जरूरी होने पर ही लें। (महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाली तकलीफों के लिए इस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हॉरमोन थेरपी दी जाती है) हाल में हुए एक शोध से पता चला है कि मेनोपॉजल हॉरमोन थेरपी से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सावधानी के तौर पर हॉरमोन थेरपी लेने के पहले इससे जुड़े खतरों पर गौर जरूर कर लेना चाहिए।

संक्रमण से कैंसर

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के संक्रमण से भी सर्वाइकल कैंसर हो सकता है। इससे एक बैक्टीरिया पेट में पहुंच जाता है और वहां कैंसर पैदा कर देता है। हालांकि इसके और इस जैसे अन्य संक्रमणों से बचने के टीके लगवाये जा सकते हैं। इसके अलावा सावधानी के तौर पर एक ही पार्टनर से संबंध बनाने चाहिए और सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पेट में अल्सर बनाने वाले हेलिकोबैक्टर पाइलोरी से पेट का कैंसर हो सकता है, इससे बचने के लिए पेट के अल्सर का इलाज समय पर करवाना चहिए।  

कई बार सारी सावधानियों के बावजूद भी बढ़ती उम्र के कारण या जीन के कारण भी कैंसर हो सकता है। लेकिन यदि चेत रहा जाए तो  डॉक्टर से पहले खुद भी कैंसर का पता लगाया जा सकता हैं। स्किन, ब्रेस्ट, मुंह और टेस्टिकुलर कैंसर का पता खुद जांच करके लगाया जा सकता है और समय से इलाज करा कर इस रोग से मुक्ति पायी जा सकती है।

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