शिशुओं के विकास के लिए जरूरी है प्ले टाइम, नन्हे बच्चों को सुरक्षित तरीके से खिलाने के आसान तरीके

शिशु के साथ शुरू से खेलना-कूदना और बात करना उनके शारीरिक और मानसिक कौशल के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Jan 29, 2020Updated at: Jan 29, 2020
शिशुओं के विकास के लिए जरूरी है प्ले टाइम, नन्हे बच्चों को सुरक्षित तरीके से खिलाने के आसान तरीके

खेलना शारीरिक ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। वहीं बच्चों के शुरुआती विकास में इसका एक बड़ा हांथ होता है। पर आज हम बड़े और बच्चों पर खेलों के असर की बात नहीं करेंगे, बल्कि शिशु के लिए के खेलना क्यों जरूरी है, इस पर बात करेंगे। जी हां, आप सोच रहे होंगे कि दुनिया में आया एक नया बच्चा, चो बोल नहीं सकता, चल नहीं सकता वो खेलेगा कैसा! तो जिस तरह शिशु की सारी जिम्मेदारियां उनके मां-पिता पर होती है, उसी तरह शिशु के खेल-कूद की जिम्मेदारी भी उनके माता-पिता पर होती है। शिशु के विकास के लिए प्ले टाइम हर तरह से फायदेमंद है। खेल के माध्यम से, वे अपने हाथों और पैरों को स्थानांतरित करना सीखते हैं, जो उन्हें मोटर कौशल विकसित करने में मदद करता है। यह उनके सामाजिक कौशल को भी बढ़ाता है। साथ ही साथ वो खेल के माध्यम से ही माता-पिता और अन्य लोगों के साथ बातचीत करना सीखता है। तो आज हम आपको शिशु के साथ खेलने के कुछ खास टिप्स बताएंगे।

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5 टिप्स जिनकी मदद से माता-पिता अपने बच्चों को खेलने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं:

शिशु के हर हरकत पर रिएक्शन दें

अपने नवजात शिशु पर पर्याप्त ध्यान दें और उनकी नरम बड़बड़ाती आवाज़ों का जवाब दें। आपके बच्चे को उनकी आवाज का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, भाषा और संचार कौशल सीखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इस तरह आप अपने बच्चे को उसकी हर छोटी-बड़ी हरकत पर प्रोत्साहित कर सकते हैं। इस तरह आपका रिएक्शन उसके और आपके बीच बॉन्ड बनने का काम करेगा। वहीं इस काम को आप जब भी सोने जाते या आराम से बैठते हैं तो कर सकते हैं।

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बच्चे के चारों ओर रंगीन खिलौने लगाएं

अपने बच्चे का ध्यान आकर्षित करने के लिए, उनके चारों ओर रंगीन और संगीतमय खिलौने रखें। जल्द ही, आपके छोटे खिलौने को छू पाएंगे और उन्हें इसे देखकर खेलने का मन होगा। बड़े होने के साथ वो इसके साथ कुछ न कुछ करने की कोशिश करेंगे और ऐसे में उनके हाथ-पैर के साथ मानसिक विकास भी होगा। शुरुआती कुछ महूीनों के बच्चे के लिए तो खिलौनों को कुछ दूरी पर रखना शुरू करें। जो उन्हें खिलौनों तक पहुंचने के लिए अपने शरीर को फैलाने के लिए प्रोत्साहित करेगा, धीरे-धीरे उन्हें क्रॉल करने में मदद करेगा। वहीं ऐसा करते वक्त भी अपने बच्चे पर ध्यान जरूर बनाए रखें।

आवाज करने वाले ऑब्जेक्ट्स आस-पास रखें

आप अपने बच्चे का ध्यान आकर्षित करने के लिए झुनझुने और रंगीन खिलौने बांध सकते हैं। खिलौने को एक तरफ से दूसरी तरफ ले जाएं और देखें कि आपका बच्चा किस तरह से वस्तु या उसकी आवाज का अनुसरण करता है। आवाजों की खास बात ये होती है कि ये आपके बच्चे के ध्यान को आकर्षित करते हैं। इससे उसके ध्यान और दिमाग को तेज गति से चलाने की प्रक्रिया तेज गति से बढ़ती है। इस तरह की चीजों से बच्चे का दिमाग बचपन से ही तेज होने लगता है।

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अपने बच्चे का मनोरंजन करें

अपने बच्चे के लिए गाएं और नाचे। अपने हाथों को ताली बजाएं और उनसे बात करते हुए इशारे करें। वो धीरे-धीरे इसका जवाब देने लगेंगे। इस तरह की चीजों को कर के आपके और आपके बच्चे के बीच प्यार औप स्नेह बढ़ेगा। वहीं बाकी घर के लोग भी इस तरह की चीजों को कर के उसके साथ अपना रिश्ता कायम कर सकते हैं। इन तरह की चीजों की खास बात ये होती है कि ये आपके और आपके बच्चे के बीच बॉडिंग को स्ट्रांग करती है।

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उनके अंगों को हिलाने में उनकी मदद करें

माता-पिता सरल खेल खेल सकते हैं, जैसे कि बच्चे की बाहों को खींचना या उनके पैरों के साथ पैडलिंग व्यायाम करना इत्यादि। इसके साथ उसे अपने पेट पर लिटा कर उसके साथ खेलें। वहीं मालिश करते वक्त भी आप उनके साथ खेल सकते हैं। वहीं पर्याप्त समय देने से आपके बच्चे की गर्दन और मांसपेशियों को मजबूत करने और जल्दी-जल्दी विकास हासिल करने में मदद मिले सकती है। वहीं इस तरह की चीजें आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं।

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