टीनएज बच्चों के माता-पिता को ध्यान रखनी चाहिए ये 5 बातें

टीनएज बच्चे अक्सर माता-पिता से दूरी बनाने लगते हैं। इस उम्र में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। जानें ऐसे बच्चों की परवरिश के लिए कुछ खास टिप्स।

Monika Agarwal
Written by: Monika AgarwalUpdated at: Sep 25, 2022 11:00 IST
टीनएज बच्चों के माता-पिता को ध्यान रखनी चाहिए ये 5 बातें

एक बच्चे के जीवन में उम्र के साथ कई प्रकार के बदलाव आते हैं। शिशु अवस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था आदि चरणों से बच्चे गुजरते हुए बहुत सारे बदलावों को अपनाते चले जाते हैं। लेकिन उसके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आता है, जब वह अपनी जवानी की दुनिया में प्रवेश करता है। जब उसे अपने शरीर में बदलाव के साथ-साथ अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जब वह अपनी जवानी की दुनिया में प्रवेश करता है तब उसके जीवन के में नए रिश्ते भी आते हैं। उसकी मानसिकता बदलने और विकसित होने लगती है। तो माता पिता का कर्तव्य बनता है कि वह अपने बच्चे की परवरिश के लिए कुछ अच्छे कदम उठाएं। जानें पेरेंट्स इस स्थिति में क्या क्या कर सकते हैं।

एक मजबूत रिश्ता बनाएं

माता पिता होने के नाते आपको अपने बच्चे के साथ मज़बूत रिश्ता बनाना चाहिए।  उसकी बढ़ती उम्र के साथ साथ उसको आपकी उतनी ही जरूरत होती है। तब आपको अच्छी भूमिका निभानी चाहिए। माता पिता को एक ऐसा रिश्ता बनाना चाहिए, जिससे आपका बच्चा आप पर भरोसा कर सके कि वह आपके पास सुरक्षित है। जितना आप उसके बचपन के दिनों में उसके पास होंगे, जवानी के दिनों में उनको आपकी उतनी ही जरूरत महसूस होगी। वो जवानी में मार्गदर्शन के लिए आपकी सलाह लेंगे।

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शारीरिक स्वास्थ्य और मजबूत मानसिक क्षमता का भी निर्माण करें

अपने बच्चे को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है। बच्चे का पालन-पोषण अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे वह स्वस्थ और मजबूत रहे। लेकिन इसके साथ-साथ उसका मानसिक स्वास्थ भी उतना ही विकसित करना जरूरी है। जवानी चुनौतियों से भरी होती है। उन्हें कई प्रकार की शारीरिक मानसिक और भावनात्मक रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए उनको पहले से ही तैयार करना चाहिए। उनको अच्छे बुरे की पहचान करने में मदद करनी चाहिए। उन्हें ऐसा महसूस कराएं कि वह अपनी भावनाओं को आपके आगे बता सकें। अगर वह किसी प्रकार की बात को लेकर तनाव में है, तो उसको तनाव देने वालों की पहचान करने में मदद करें। उसको उन तरीकों के बारे में बताएं, जिससे उसका मन शांत हो सके। 

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उन्हें राय का महत्व सिखाएं

जवानी की अवस्था में बच्चे के दिमाग में काफी विचार और राय होती है। लेकिन ज्यादातर बच्चे उनको बताने या पूछने से डरते हैं। उन्हें ऐसा लग सकता है कि वे ओव-रस्टेपिंग कर रहे हैं। तो इसमें माता पिता का कर्तव्य बनता है कि अपने बच्चे को उत्साही और निडर होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। 

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उन्हें जीवन में थोड़ा स्पेस दें

जितनी जल्दी आप इसे करते हैं उतना ही अच्छा है। जैसे-जैसे बच्चा जवानी की अवस्था में बड़ा होता है उसको ज्यादा समय और आजादी की आवश्कता होती है। लेकिन ज्यादातर माता पिता अपने बच्चे को ऐसे आजादी का विचार पसंद नहीं करते। लेकिन उनको खुद को खोजने, अपनी जिम्मेदारी समझने और अपनी पहचान बनाने का एकमात्र तरीका यही है।

उन्हें जिम्मेदार बनना सिखाएं

इंटरनेट एक वरदान के साथ-साथ एक अभिशाप भी है। इसलिए इसका उपयोग ध्यान से करना चाहिए। जहां तक बच्चों का इंटरनेट से संबंध है ,उनको डिजिटल तकनीक की बुराइयों के बारे में बताएं उन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया के हेल्दी उपयोग के बारे में सिखाएं और सबसे जरूरी बात यह है कि उन्हें ऑनलाइन खतरों के बारे में सचेत करें।

बच्चों को एक अच्छी परवरिश देने के लिए यह सारे काम जरूर करें, ताकि आपका बच्चा आपके साथ जुड़ाव महसूस करेऔर आपको अपनी सभी बातें बता सके।

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