Tue Oct 27, 2026 | 02:43 AM IST

एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत से टिश्यू शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। जब टिश्यू शरीर के अन्य भागों में बढ़ने लगता है, तो दर्दनाक लक्षण नजर आने लगते हैं। एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित कुछ महिलाओं को स्कारिंग और फैलोपियन ट्यूब में रुकावट के कारण गर्भवती होने में भी मुश्किल होती है। एंडोमेट्रियोसिस आमतौर पर गर्भाशय के पीछे की जगह, ओवरीज, पेट के अंदर की परत और फैलोपियन ट्यूब में हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में रिप्रोडेक्टिव उम्र की लगभग 19 करोड़ महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं।

एंडोमेट्रियोसिस होने के कारण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, एंडोमेट्रियोसिस के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चला है, लेकिन हालिया रिसर्च से संकेत मिलता है कि एंडोमेट्रियोसिस का कनेक्शन इम्यून सिस्टम के असंतुलन से हो सकता है। एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं में इम्यून सिस्टम से जुड़ी अन्य बीमारियां जैसे लूपस, मल्टीपल स्केलेरोसिस और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज होने के मामले ज्यादा देखने को मिले हैं। इसके अलावा, फैमिली हिस्ट्री भी एक कारण हो सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण

Cleveland Clinic के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस के कई लक्षण हो सकते हैं, लेकिन सबसे आम लक्षण पेल्विक एरिया में दर्द हो सकता है। यह दर्द काफी तेज या हल्का हो सकता है। पीरियड्स से ठीक पहले या उसके दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण सूजन से इसके लक्षण और ज्यादा बढ़ सकते हैं।

  • पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होना
  • पीरियड्स के दौरान या दो पीरियड्स के बीच पेट दर्द या पीठ दर्द होना
  • पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना
  • सेक्शुअल इंटिमेसी के दौरान दर्द होना
  • इनफर्टिलिटी की समस्या होना
  • पॉटी या पेशाब करते समय दर्द होना
  • पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे दस्त, कब्ज या पेट फूलना

एंडोमेट्रियोसिस के रिस्क फैक्टर्स

Mayo Clinic के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस होने के कई रिस्क फैक्टर हो सकते हैं।

  • कभी बच्चे को जन्म न देना
  • कम उम्र में पीरियड्स शुरू होना
  • ज्यादा उम्र में मेनोपॉज होना
  • मेंस्ट्रुअल साइकिल का छोटा होना
  • पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना, जो सात दिन से ज्यादा रह सकती है।
  • वजन कम होना
  • परिवार में किसी को एंडोमेट्रियोसिस होना
  • शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल बहुत ज्यादा होना

एंडोमेट्रियोसिस से होने वाली दिक्कतें

Mayo Clinic के मुताबिक, एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही महिलाओं को बांझपन की दिक्कत हो सकती है।

  • इस बीमारी से पीड़ित करीब आधी महिलाओं को प्रेग्नेंसी में परेशानी होती है।
  • हालांकि, जिन महिलाओं को हल्के से मीडियम एंडोमेट्रियोसिस होता है, उन महिलाओं में देखा गया है कि वे गर्भधारण करने में सफल हो पाती हैं।
  • कुछ रिसर्च से सामने आया है कि एंडोमेट्रियोसिस ओवेरियन कैंसर के रिस्क को बढ़ा सकता है। हालांकि, इसके मामले काफी दुर्लभ हो सकते हैं।

पीरियड्स के दर्द और एंडोमेट्रियोसिस के दर्द में अंतर

The University of Melbourne के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान यूटेरस की अंदरूनी 4 से 6 मिलीमीटर की एंडोमेट्रियल लाइनिंग झड़ने लगती है। जैसे ही यह परत गर्भाशय की दीवार से अलग होती है, इसे खून की आपूर्ति करने वाली ब्लड वेसल्स टूटकर बाहर निकल जाती है। पीरियड्स के दौरान परत के टूटने की यह प्रक्रिया सूजन बढ़ाने वाले पदार्थों के कारण होती है। इनकी वजह से पीरियड्स में महिलाओं का जी मिचलाना, उल्टी, दस्त, सिरदर्द, चक्कर आना और बेहोशी जैसा महसूस हो सकता है। जिन महिलाओं को हैवी ब्लीडिंग होती है, उन्हें इस दौरान क्रैम्प्स और ऐंठन हो सकते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस में महिलाओं को बार-बार और बहुत ज्यादा पीरियड्स का दर्द, ब्लीडिंग में बड़े-बड़े क्लॉट्स आना, पेल्विक दर्द का रूप ले सकता है, जो 6 महीने तक बना रह सकता है। हालांकि, एंडोमेट्रियोसिस उन महिलाओं में भी पाया जाता है, जिन्हें कोई दर्द नहीं होता। इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर एंडोमेट्रियोसिस की पुष्टि नहीं की जा सकती है। इसके लिए जांच की जरूरत पड़ती है।

एंडोमेट्रियोसिस की जांच कैसे होती है?

Cleveland Clinic के अनुसार, कई मामलों में एंडोमेट्रियोसिस की जांच लक्षणों के आधार पर हो सकती है। अगर किसी महिला को पीरियड्स को बहुत ज्यादा दर्द होता और पीरियड्स लंबे समय तक रहते हैं, तो महिला को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

  • डॉक्टर का महिला से उसकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानना।
  • फैमिली में किसी को ऐसी समस्या होने की जानकारी लेना।
  • पेल्विक एरिया की जांच करने की सलाह दी जा सकती है। इसमें लैप्रोस्कोपी के जरिए पेट के निचले हिस्से को अंदर से देखा जाता है। इसमें टिश्यू चेक किए जाते हैं कि वे कहां मौजूद हैं।
  • कुछ मामलों में बायोप्सी भी की जाती है।
  • विस्तार से समझने के लिए अल्ट्रासाउंड या एमआरआई कराने की सलाह दे सकते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस के कितने स्टेज हैं?

Pathology - Research and Practice के मुताबिक, एंडोमेट्रियोसिस को चार सिस्टम में रखा गया है।

1. रिवाइज्ड अमेरिकन सोसाइटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन (rASRM)

इस सिस्टम में स्कोरिंग घावों की गंभीरता, आकार, गहराई, जगह और मात्रा के आधार पर की जाती है।

  • स्टेज 1 में 1 से 5 नंबर होते हैं। इसका मतलब है कि घाव न के बराबर हैं।
  • स्टेज 2 में घाव हल्के होते हैं और इसकी स्कोरिंग 6 से 15 नंबर के बीच होती है।
  • स्टेज 3 में घाव मॉडरेट होते हैं और इसके अंक 16 से 40 के बीच होते हैं।
  • स्टेज 4 में घाव गंभीर होते हैं और इसमें 40 से ज्यादा नंबर होते हैं।
  • अगर घाव गहरे और बड़े हैं जो कि 3 सेमी से ज्यादा हैं, तो इन्हें 20 अंक दिए जाते हैं।
  • ओवरी और फैलोपियन ट्यूब में गहरे घाव होने पर 16 अंक दिए जाते हैं।
  • अगर सैक पूरी तरह से ब्लॉक है, तो 40 अंक दिए जाते हैं।

2. ENZIAN स्कोरिंग सिस्टम

इसमें डीप इनफिल्ट्रेटिंग एंडोमेट्रियोसिस (DIE) पर फोकस होता है। अगर किसी महिला की सर्जरी करनी होती है, तो इस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल जर्मनी में ज्यादा होता है।

3. एंडोमेट्रियोसिस फर्टिलिटी इंडेक्स (EFI)

यह सिस्टम उन महिला रोगियों के लिए है, जो IVF के बजाय प्राकृतिक तरीके से प्रेग्नेंट होना चाहती हैं। इसमें स्कोर 0 से 10 के बीच में दिया जाता है। सबसे खराब 0 होता है और 10 सबसे अच्छा होता है।

4. अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल लैप्रोस्कोपिस्ट्स (AAGL)

इस सिस्टम को साल 2021 में बनाया गया था, जो सर्जिकल रिस्क के स्तर का बेहतर आकलन करता है। इसमें सर्जिकल मुश्किल को 0 से 10 के पैमाने पर आंका जाता है।

एंडोमेट्रियोसिस का इलाज क्या है?

Mayo Clinic के मुताबिक, एंडोमेट्रियोसिस का इलाज दवा या सर्जरी के जरिए किया जा सकता है। मरीज को दवा देनी है या सर्जरी करनी है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि लक्षण कितने गंभीर हैं और क्या महिला को प्रेग्नेंट होना है। वैसे तो सबसे पहले दवा से एंडोमेट्रियोसिस को कंट्रोल किया जाता है।

1. पेनकिलर दवाएं

इसमें पेनकिलर, एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं दी जा सकती हैं, ताकि पीरियड्स के दौरान दर्दनाक क्रैम्प्स को कम किया जा सके। अगर महिला का प्रेग्नेंसी का प्लान नहीं है, तो पेनकिलर के साथ हार्मोन थेरेपी की भी सलाह दी जा सकती है।

2. हार्मोन थेरेपी

हार्मोनल दवाएं एंडोमेट्रियोसिस के दर्द को कम करने या खत्म करने में मदद करती हैं। पीरियड्स के दौरान हार्मोन्स में बदलाव होने के कारण एंडोमेट्रियोसिस टिश्यू मोटे हो जाते हैं, टूटने लगते हैं और उनसे ब्लीडिंग होती है। हार्मोनल थेरेपी के जरिए टिश्यू की ग्रोथ को धीमा किया जाता है, ताकि जल्दी और देर तक ब्लीडिंग न हो। हालांकि, हार्मोन थेरेपी परमानेंट इलाज नहीं है। जैसे ही हार्मोन थेरेपी बंद कर दी जाती है, वैसे ही लक्षण वापस आ सकते हैं।

  • इसमें आमतौर पर हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स, शॉट्स या वजाइनल रिंग्स दिए जा सकते हैं। यह लगातार एक साल तक या उससे भी ज्यादा समय के लिए दिया जा सकता है।
  • प्रोजेस्टिन थेरेपी में पीरियड्स और एंडोमेट्रियोसिस टिश्यू की ग्रोथ को रोका जाता है। इसमें गर्भाशय में रखी जाने वाली छोटी सी डिवाइस में प्रोजेस्टिन की दवा शामिल होती है।

3. सर्जरी

इसमें यूटेरस और ओवरी को सुरक्षित रखते हुए सिर्फ एंडोमेट्रियोसिस के टिश्यू को हटाया जाता है। अगर कोई महिला प्रेग्नेंट होना चाहती है, तो इस सर्जरी के बाद प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ सकती है और दर्द से राहत मिल सकती है। इसमें आमतौर पर लैप्रोस्कोपिक सर्जरी ज्यादा की जाती है।

  • लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में पेट पर छोटा सा चीरा लगाकर एक पतला कैमरा, जिसे लैप्रोस्कोप कहते हैं, अंदर डाला जाता है। यह चीरा नाभि के आस-पास लगाया जाता है। इसके बाद सर्जिकल डिवाइस की मदद से सभी टिश्यू हटा दिए जाते हैं।
  • दुर्लभ मामलों में स्कार टिश्यू की मोटी परतें होती हैं, जिसमें पेट पर बड़ा चीरा लगाने की जरूरत पड़ सकती है। सर्जरी के बाद दोबारा दर्द न हो, इसके लिए हार्मोनल दवाएं दी जा सकती हैं।

4. फर्टिलिटी ट्रीटमेंट

जिन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस के कारण प्रेग्नेंसी में दिक्कत होती है, उन्हें फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलने की सलाह दी जा सकती है। प्रेग्नेंसी के लिए फर्टिलिटी एक्सपर्ट IVF (In Vitro Fertilization) कराने की सलाह दे सकते हैं। इस प्रोसेस में हार्मोनल दवाओं के जरिए ज्यादा एग्ज बनाकर बाहर निकाले जाते हैं। इसके बाद एग को स्पर्म के साथ मिलाकर एम्ब्रियो तैयार किया जाता है। इसे बाद में महिला के यूटेरस में शिफ्ट कर दिया जाता है।

5. यूटेरस को हटाना (हिस्टेरेक्टॉमी गर्भाशय)

हिस्टेरेक्टॉमी प्रक्रिया में दोनों ओवरी हटा दी जाती हैं और महिला को मेनोपॉज आ जाता है। इससे महिलाओं को दर्द से राहत मिल सकती है, लेकिन सर्जरी के बाद भी अगर एंडोमेट्रियोसिस के कुछ कण रह जाए, तो लक्षण बने रह सकते हैं। हालांकि, अगर यह प्रक्रिया कम उम्र में हुई हो, तो महिलाओं को हार्ट और मेटाबोलिक समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टर इसे अंतिम ऑप्शन के तौर पर देखते हैं। इसलिए इसकी सलाह महिला की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए ही दी जा सकती है।

आमतौर पर पूछे जाने वाले 5 सवाल

एंडोमेट्रोयोसिस को लेकर महिलाओं के मन में कई सवाल होते हैं। ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश की है।

1. सवाल - क्या एंडोमेट्रियोसिस में प्रेग्नेंसी हो सकती है?

जवाब - एंडोमेट्रोयोसिस से पीड़ित महिलाएं समय पर इलाज कराकर इसके लक्षणों को मैनेज करती हैं, तो प्रेग्नेंट हो सकती है। कई मामलों में IVF के जरिए भी प्रेग्नेंसी की सलाह दी जा सकती है।

2. सवाल - क्या एंडोमेट्रियोसिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?

जवाब - फिलहाल ऐसा कोई इलाज नहीं आया है, जिससे एंडोमेट्रियोसिस को पूरी तरह से ठीक किया जा सके। डॉक्टर इसके लक्षणों को मैनेज या कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं।

3. सवाल - क्या एंडोमेट्रियोसिस अपने आप खत्म हो सकता है?

जवाब - बहुत कम मामलों में एंडोमेट्रियोसिस खुद-ब-खुद ठीक हो सकता है। कई बार मेनोपॉज के बाद ऐसा हो सकता है, क्योंकि उस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में कमी आ सकती है। हालांकि, एंडोमेट्रियोसिस के मरीजों को डॉक्टर से इलाज के लिए सलाह जरूर लेनी चाहिए।

4. सवाल - क्या प्रेग्नेंसी से एंडोमेट्रियोसिस पूरी तरह ठीक हो जाता है?

जवाब - नहीं, यह एक आम भ्रम है। प्रेग्नेंसी के दौरान नौ महीने तक पीरियड्स रुकने और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के बढ़ने से एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों और दर्द में कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है। हालांकि, डिलीवरी और पीरियड्स दोबारा शुरू होने के बाद यह बीमारी और इसके लक्षण वापस आ सकते हैं।

5. क्या एंडोमेट्रियोसिस के कारण पेट फूलने की समस्या होती है?

जवाब - इसे आमतौर पर एंडो बैली कहा जाता है। बीमारी के कारण पेट में होने वाली अंदरूनी सूजन और आंतों पर असर पड़ने से पेट फूलना, गैस, दस्त या कब्ज जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

डॉक्टर से कब मिलना जरूरी है?

अगर महिला को हैवी पीरियड्स के साथ कमर और पेल्विक एरिया में बहुत ज्यादा दर्द हो, जिसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो। इसके साथ ही ब्लीडिंग के दौरान खून के बड़े-बड़े थक्के आ रहे हों और पीरियड्स सात या इससे ज्यादा दिन के हो, तो डॉक्टर को दिखाना और इसका इलाज करना बहुत जरूरी है।

निष्कर्ष
एंडोमेट्रियोसिस की समस्या के कारण कई बार महिलाओं को रोजाना के काम करने में भी दिक्कत आ सकती है। इसलिए इस बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर समस्याओं के रिस्क को बढ़ा सकता है। इसमें महिलाओं का प्रेग्नेंट न होना सबसे आम कारण है। इसलिए अगर महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज कराना जरूरी है।

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