उच्‍च वसा वाले आहार के सेवन से सेप्सिस रोग का खतरा: शोध

एक हालिया अध्ययन के अनुसार, उच्‍च वसा और कम फाइबर युक्‍त आहार सेप्सिस रोग को बढ़ावा देते हैं। उच्‍च वसा आमतौर पर पश्चिमी आहारों में देखने को मिलता है। यहां के भोजन में फाइबर की कमी देखी जा सकती है। ऐस

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Feb 13, 2019Updated at: Feb 13, 2019
उच्‍च वसा वाले आहार के सेवन से सेप्सिस रोग का खतरा: शोध

एक हालिया अध्ययन के अनुसार, उच्‍च वसा और कम फाइबर युक्‍त आहार सेप्सिस रोग को बढ़ावा देते हैं। उच्‍च वसा आमतौर पर पश्चिमी आहारों में देखने को मिलता है। यहां के भोजन में फाइबर की कमी देखी जा सकती है। ऐसे भोजन के सेवन से सेप्सिस के विकास में मदद मिलती है जो व्‍यक्ति के लिए खतरनाक हो सकता है। 

 

सेप्सिस दुनिया भर में मौत के सबसे आम कारणों में से एक है। यह एक खतरनाक अवस्‍था है। ये रोग बैक्‍टीरिया के कारण होने वाला संक्रमण है जो एक घातक स्थिति है। बहुत सारे मरीज इस अवस्‍था के निदान में विफल रहते हैं और बहुत लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने के कारण यह समस्‍या जानलेवा भी हो सकती है। 

अध्ययन चूहों पर किया गया था। अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, सामान्य आहार खिलाए गए लोगों की तुलना में पश्चिमी आहार खिलाए जाने वाले चूहों में  सूजन, सेप्सिस की गंभीरता और उच्च मृत्यु दर में वृद्धि हुई थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, चूहों में अधिक गंभीर सेप्सिस था और वे अपने आहार में किसी चीज के कारण तेजी से मर रहे थे। मगर वजन बढ़ने या माइक्रोबायोम इसका कारण नहीं था। 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, "पश्चिमी आहार पर चूहों का इम्‍यून सिस्‍टम देखा गया जो अलग तरह से काम कर रहा था। ऐसा माना जाता है कि उच्‍च वसा वाले आहार इम्‍यून सिस्‍टम में कुछ हेरफेर कर रहे थे ताकि सेप्‍सिस को बढ़ावा मिल सके और जिससे चूहों की मौत हो सके। 

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उन्‍होंने कहा, इन निष्कर्षों से आईसीयू में भर्ती मरीजों के आहार की बेहतर निगरानी में अस्पतालों को मदद मिल सकती है क्योंकि वे आहार में सेप्सिस विकसित करने की सबसे अधिक संभावना को देखते हैं। "यदि आप जानते हैं कि वसा और चीनी में उच्च आहार सेप्सिस के कारणों में वृद्धि कर मृत्यु दर को बढ़ावा देते हैं तो आप आईसीयू में होते हुए अपने आहार में वसा और चीनी के अनुपात को सुनिश्चित करें।

आहार में फाइबर की मात्रा अधिक रखें। अगर आप ICU में रहते हुए आहार में हस्तक्षेप कर सकते हैं, तो इस तरह से उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली में हेरफेर की संभावना कम हो सकती है। 

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शोधकर्ताओं ने पश्चिमी आहार का सेवन करने वाले चूहों में आणविक मार्करों की भी पहचान की, जिन्हें आगे चलकर गंभीर सेप्सिस के रोगियों के लिए बायोमार्कर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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