जून के महीने में बढ़ जाता है हीट स्ट्रोक का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव का तरीका

जून का महीना अपने साथ बढ़ता पारा और कई समस्याओं को साथ लेकर आता है। इस दौरान न केवल बीमारियां बल्कि डीहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।

 
Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: May 30, 2019
जून के महीने में बढ़ जाता है हीट स्ट्रोक का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव का तरीका

जून का महीना अपने साथ बढ़ता पारा और कई समस्याओं को साथ लेकर आता है। हमारी दिनचर्या के साथ-साथ हमारा खाना-पीना भी गर्मी के कारण प्रभावित होता है। इस दौरान न केवल बीमारियां बल्कि डीहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इन सबसे बचने के लिए केवल ढेर सारा पानी पीना या संतुलित आहार लेना ही काफी नहीं है बल्कि इससे बचाव के लिए आपको सावधानी बरतना भी जरूरी है।

जून के महीने में आपको पाचन, यूरिन, स्किन से जुड़ी जैसी कई बीमारियां हो सकती है। महानगरों में बढ़ते प्रदूषण और इस भागदौड़ भरी जिंदगी में आपको जानकारी बढ़ाने की जरूरत है ताकि ये बीमारियां कोई घातक रूप न ले ले। हालांकि कुछ एहतियात के साथ इन बीमारियों से बचाव आसान है।

नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल की  इंटर्नल मेडिसिन सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर जीनत अहमद ने जून के इस महीने तपती गर्मी से होने वाले हीट स्ट्रोक से खुद को सुरक्षित रखने के उपाय सुझाए हैं, जो आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय

  • गर्मी में खूब पानी पीने के अलावा ज्यादा तला भुना खाने से परहेज़ करें। 
  • गर्मी आते ही कोल्ड ड्रिंक्स, आइस-क्रीम का सेवन बढ़ जाता है, जिनके बजाय नारियल पानी, बेल का जूस आदि का सेवन करना चाहिए।
  • धूप या बाहर से आते ही तुरंत एसी, पंखा न चलायें। इसके साथ ही ठंडा पानी न पीएं।
  • घर से बाहर जाते वक्त पानी की बोतल के साथ-साथ ग्लूकोज़, इलेक्ट्रोल, नींबू साथ रखें।
  • सही सनस्क्रीन, फेसवॉश का प्रयोग करें।
  • मौसमी फल, दही, छाछ आदि का सेवन करें।
  • धूप में निकलते समय कला चश्मा और टोपी लगायें।

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गर्मियों में होने वाली बीमारियां

सनबर्न

तेज धूप त्वचा को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाती है, जिसमें से एक सनबर्न। अगर कोई व्यक्ति सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आता है तो उसे यह समस्या हो सकती है। सनबर्न के कारण प्रभावित जगह पर जलन होती है और उस जगह का रंग लाल पड़ जाता है। ऐसी भी कई स्थितियां हैं, जहां यह स्थिति स्किन कैंसर का कारण बन जाती है।

  • बचावः त्वचा को ठंडा रखने क लिए एलोवेरा लोशन, नारियल तेल से मालिश जैसे घरेलू उपचार किये जा सकते हैं

नकसीर फूटना

इस मौसम में कई लोगों की नाक से खून निकलने जैसी दिक्कत हो जाती है। यह स्थिति भले ही खतरनाक न हो लेकिन गंभीर स्वस्थ्य समस्या का एक सूचक है। गर्मियों के दौरान सूखी हवा के कारण नाक की अंदरूनी परत के पास वाली रक्तवाहिनी फट जाती है और नाक से खून आने लगता है। अगर आप भी कभी ऐसी समस्या से दो-चार होते हैं तो नाक के बजाये मुह से सांस लें और  ठंडा पानी अपने सिर पर डालें, जिससे खून बहना बंद हो जाएगा।

  • बचाव के उपायः खून बहते समय सिर को आगे झुकाएं। अगर ऐसा बार-बार होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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टाइफाइड

  • टाइफाइड की समस्या की मूल वजह दूषित पानी पीना है।
  • लक्षणः बुखार, उल्टी, भूख न लगना।
  • बचाव का उपायः  सफाई और साफ पानी की पहुंच का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पीलिया

रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन होता है जब ये कोशिकाएं टूटती हैं तो हीमोग्लोबिन के टूटने से बिलीरुबिन नामक पीले रंग का पदार्थ निकलता है, यह लिवर से फिल्टर होकर निकलता है, लेकिन लिवर में कुछ दिक्कतों के चलते यह प्रक्रिया ठीक से नहीं कर पाता और बिलीरुबिन बढ़ने लगता है और त्वचा का रंग पीला पड़ने लगता है। इस स्थिति को पीलिया कहते हैं।

लक्षण 

  • आंखों के सफेद भाग का पीला होना, बुखार, थकान रहना इसके मूल लक्षण हैं।

बचाव

  • साफ पानी, संतुलित भोजन, नशीले पदार्थों से दूरी।

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीटयूट के यूरोलोजिस्ट सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अतुल गोस्वामी ने गर्मी में होने वाले यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण) के बारे में बताते हुए कहा कि कम पानी पीने से न केवल डिहाइड्रेशन होता है बल्कि आप यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण) जैसे बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं। युवतियों में यूटीआई की शिकायत आम है क्योंकि महिलाएं इससे अधिक प्रभावित होती हैं। यह आपकी किडनी पर भी दुष्प्रभाव डाल सकता है।

लक्षण 

  • पेशाब के दौरान जलन होना, पेशाब में बदबू आना, पीठ या निचले पेट में दबाव या दर्द महसूस होना।

बचाव 

  • ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं।
  • प्रतिदिन कम से कम 7-8 गिलास मिनरल वाटर या साफ पानी पीएं।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। 
  • नियमित व्यायाम करें।

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