शरीर में इन विटामिंस की कमी से होता है बहरापन, आहार में शामिल करें ये फूड

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 06, 2018
Quick Bites

  • शरीर में विटामिन सी, ई और डी की कमी से बहरेपन हो सकता है।
  • एंटीऑक्‍सीडेंट कान के भीतरी ऊतकों को नुकसान पहुंचाने से रोकते हैं।
  • जिंक की स्‍वस्‍थ खुराक कानों के लिए किसी खुराक से कम नहीं है।

बिगड़ा हुआ लाइस्टाइल न सिर्फ हमारी बाहरी स्वास्थ्य बल्कि आंतरिक स्वास्थ्य को भी खराब करता है। आजकल लोगों का लाइफस्टाइल काफी बदल गया है। जिसके चलते लोगों में बहरापन होना भी एक समस्या बन गई है। पहल के जमाने में उम्रदराज लोगों को कानों से संबंधित समस्या होती थी लेकिन आज के समय में छोटे छोटे बच्चे बहरेपन के शिकार हो रहे हैं। आजकल ज्यादा ऊंची आवाज में गाने सुनने, मोबाईल फोन का ज्यादा इस्तेमाल, अधिक शोर वाली जगह पर रहने से भी कानों से संबंधित ये समस्या हो सकती है। इसके अलावा शरीर में किसी विटामिन्स की कमी के कारण भी सुनने की शक्ति कम हो सकती है। डॉक्टर्स की मानें तो शरीर में विटामिन सी, ई और डी की कमी हो जाए तो बहरेपन की समस्या हो सकती है। आज हम आपको कुछ ऐसे आहार के बारे में बता रहे हैं जिनके सेवन से आप सुनने की क्षमता को कम होने से बचा सकते हो। बहरेपन को दूर करने के आहार-

काजू और मूंगफली

नट, विशेष रूप से बादाम, काजू और मूंगफली, साथ ही दही, आलू और केले मैग्नीशियम के बहुत अच्‍छे स्रोत है। अध्‍ययन के अनुसार, यह सुनने की क्षमता कम होने का आम प्रकार यानी शोर प्रेरित सुनने की हानि (एनआईएचएल) को रोकने में मदद करता है।

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समुद्री भोजन

आप जिंक की स्‍वस्‍थ खुराक लेकर, उम्र के कारण होने वाले सुनने की क्षमता में कमी को आसानी से रोक सकते हैं। यह कानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जिंक समुद्री भोजन जैसे कस्‍तूरी, केकड़ा और झींगा और साथ ही पनीर और डार्क चॉकलेट में पाया जाता है।

ग्‍लूटेथियोन और विटामिन

एंटीऑक्सीडेंट की तरह विटामिन सी/ई मुक्त कणों की देखभाल करता है, और आपकी समग्र प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। इस प्रकार से यह कान में होने वाले संक्रमण के जोखिम को कम करता है। यह विटामिन आपको आसानी से सब्जियों (जैसे शिमला मिर्च) और फल (जैसे संतरे) में मिल जायेगें।

ओमेगा-3 फैटी एसिड

सामन, ट्यूना, ट्राउट या सार्डिन में आमतौर पर उच्‍च मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। सुनने की क्षमता कम होने पर इसके अत्यधिक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते है। अध्ययन से पता चला है, कि सप्ताह में दो बार मछली खाने वाले वयस्कों में मछली ना खाने वालों की तुलना में उम्र से संबंधित सुनवाई हानि का सामना 42 प्रतिशत तक कम होता है। शोधकर्ताओं का दावा है, कि ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि ओमेगा-3 फैटी एसिड कान के संवेदी प्रणाली में रक्त वाहिकाओं को मजबूत करती है। मछली आपके कान की अच्‍छी मित्र है। 

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कानों के लिए एंटीऑक्‍सीडेंट

एंटीऑक्‍सीडेंट का नियमित सेवन, विशेष रूप से पालक, शतावरी, सेम, ब्रोकोली, अंडे, जिगर या नट्स में पाया जाने वाला फो‍लिक एसिड सुनने की क्षमता की हानि के जोखिम को कम करते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट कान के भीतरी ऊतकों को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कण को रोकने में मदद करता है।

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