फूड प्वाइजनिंग में कभी ना करें ये गलतियां, खराब हो जाएगा लिवर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 14, 2018
Quick Bites

  • फूड प्वाइजनिंग खानपान से जुड़ी एक सामान्य समस्या है।
  • कई खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिनसे समस्या हो सकती है।
  • खाने में घी और दूसरे आॅयल को भी नजरअंदाज करें।

फूड प्वाइजनिंग एक ऐसी समस्या है जो इंसान को घुटनों के बल बैठा देती है। रोड किनारे पर खाना खाने, मैदायुक्त चीजों का सेवन और अधिक मसाले वाली चीजें खाने से यह रोग होता है। पेट में दर्द होना, उल्टियां आना, चेहरे, होंठ व आंखों में सूजन, खाना निगलने में तकलीफ, सांस लेने में तकलीफ होना, जी मिचलाना और बेचैनी होना इस रोग के मुख्य लक्षण हैं। भोजन पकाते समय साफ-सफाई का ध्‍यान न रखने और सब्जियों और फलों को बिना अच्‍छी तरह साफ किए इस्‍तेमाल करने से भी फूड पॉयजनिंग का खतरा बढ़ जाता हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि ये रोग किस समस्या के चलते होता है और इसमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

फूड प्वाइजनिंग होने पर क्या ना करें 

  • मैदे से बनी चीजों का बिल्कुल सेवन ना करें।
  • मसाले युक्त चीजों से दूर ही रहें।
  • खाने में घी और दूसरे आॅयल को भी नजरअंदाज करें।
  • खाने का एक नियमित समय रखें।
  • एक साथ ज्यादा ना खाएं, बल्कि थोड़ा थोड़ कर के खाएं।
  • ज्यादा गर्म चीजों का सेवन ना करें।
  • कुछ दिन तक मीठी चीजें भी ना लें।

क्यों होती है फूड प्वाइजनिंग

  1. सामान्य रूप से शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र बैक्टीरिया, वायरस या दूसरे विषैले पदार्थो से हमारी रक्षा करता है। लेकिन कुछ लोगों में किसी विशिष्ट खाद्य पदार्थ को खाते ही प्रतिरक्षा तंत्र गड़बड़ा जाता है। जिससे शरीर में विकार उत्पन्न हो जाता है।
  2. फूड प्वाइजनिंग होने के कारणों को अभी तक स्पष्ट नहीं किया जा सका है। लेकिन इसके जो कारण बताए गए हैं उनमें किसी विशिष्ट भोज्य पदार्थ से प्रतिरक्षा तंत्र का एंटीबॉडीज व हिस्टामाइन नामक एंजाइम का पैदा होना है।
  3. जो लोग अधिक फास्ट फूड का सेवन करते हैं या फिर मैदे से बनी चीजें जैसे चाउमीन, मोमोज और मेगी जैसी चीजें खाते हैं उन्हें इस रोग के होने का ज्यादा खतरा रहता है। अधिक मसाले खासकर कि लाल मिर्च खाने से भी फूड प्वाइजनिंग हो सकता है।

फूड प्वाइजनिंग होने पर क्या करें

  • फूड पॉयजनिंग के उपचार में ज्यादा-से-ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया जाना चाहिए कि मरीज के शरीर में पानी की कमी न हो। इसलिए इसके लक्षण नजर आने पर ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, साथ ही, सूप, पतली खिचड़ी, नारियल पानी, चावल का पानी, ग्लूकोल, इलेक्ट्रॉल पाउडर का घोल आदि लेना चाहिए।
  • केला पोटेशियम का एक समृद्ध स्रोत हैं। केला फूड पॉयजनिंग से जल्‍दी रिकवरी और उसके प्रभाव को कम करने का बहुत ही प्रभावशाली उपाय हैं। इसके लिए केला को दही में मैश करके खाएं। इससे दस्त बहुत जल्दी नियंत्रण में आ जाते हैं।
  • फूड पॉयजनिंग में जीरे का इस्‍तेमाल भी बहुत फायदेमंद होता है। जीरा का इस्‍तेमाल पेट की सूजन और पीड़ा को कम करने का बहुत ही गुणकारी घरेलू उपाय है। इसके लिए एक चम्‍मच भून जीरे को पीसकर अपने सूप में मिलाकर कर इस्‍तेमाल करें।
  • अदरक न केवल आपके व्‍यंजन के स्‍वाद को बढ़ाता है, बल्कि लगभग सभी प्रकार की पाचन संबंधी समस्‍याओं के लिए एक शानदार घरेलू उपाय है। एक चम्‍मच शहद में कुछ बूंदे अदरक के रस को मिलाकर लेने से पेट में दर्द और सूजन में आराम मिलता हैं।
  • तुलसी पेट और गले दोनों संक्रमण के इलाज के लिए एक और शानदार घरेलू उपाय है। कुछ तुलसी के पत्तों के रस में एक चम्‍मच शहद मिलाकर लें। इसके इस्‍तेमाल के कुछ घंटों के भीतर ही आपको सकारात्मक परिणाम दिखने लगेगें।
  • नींबू के रस की एसिडिटी फूड पॉयजनिंग के बैक्‍टीरिया समाप्‍त करता है। इसलिए इसे फूड पॉयजनिंग में लाभकारी मानते हैं। 
  • सेब फूड पॉयजनिंग के खिलाफ प्रभावी रूप से काम करता है। सेब बैक्‍टीरिया के विकास को बाधित करने वाले एंजाइमों के रूप में जाना जाता है जो दस्‍त और पेट दर्द का कारण होता है। 

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