बाजार वाले अचार के ज्यादा सेवन से ब्लड प्रेशर और कैंसर का होता है खतरा!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 27, 2018
Quick Bites

  • भारतीय खानों की थाली अचार के बिना अधूरी है।
  • बाजार के अचार में नमक का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है।
  • बाजार वाले सस्ते अचारों में घटिया प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल होता है।

भारतीय खानों की थाली अचार के बिना अधूरी है। हमारे यहां हर मौसम में अलग-अलग फल और सब्जियों से चटपटे और स्वादिष्ट अचार बनाए जाते हैं। आजकल बाजार में भी सैकड़ों तरह के अचार मिलते हैं। नींबू, गाजर, मिर्च, लहसुन, आम, आंवला, अदरक आदि के अचार जो बाजार में मिलते हैं, उन्हें कई लोग चटखारे ले कर खाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि अचार का ज्यादा सेवन आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। आइये आपको बताते हैं कि ज्यादा अचार के सेवन से कौन-कौन सी परेशानियां हो सकती हैं।

ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा

बाजार में मिलने वाले अचार में नमक की मात्रा काफी ज्यादा होती है। नमक चूंकि एक तरह का प्रिजर्वेटिव भी है, जो चीजों को खराब होने से बचाता है इसलिए बाजार के अचार में नमक का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है। नमक का ज्यादा सेवन सेहत के लिए खतरनाक है क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। अगर आप बहुत ज्यादा अचार खाते हैं तो आपके शरीर में नमक की मात्रा बढ़ जाती है और हाइपरटेंशन का खतरा होता है। ब्लड प्रेशर दिल की बीमारियों का कारण बनता है इसलिए इससे दिल की बीमारियों का खतरा भी रहता है।

इसे भी पढ़ें:- मानसून में खाएं ये 6 चीजें, स्वस्थ रहने के साथ इम्यून सिस्टम भी होगा मजबूत

दिमाग की बीमारियां

ज्यादा मात्रा में नमक के सेवन से शरीर में पानी इकट्ठा हो जाता है और रक्तवाहिकाओं में सूजन भी आ जाती है क्योंकि नमक में सोडियम बहुत ज्यादा होता है। सोडियम का ज्यादा सेवन आपके दिमाग के लिए खतरनाक है और क्योंकि इससे दिमाग की नसों में सूजन हो सकती है और आप गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं या आपकी याददाश्त जा सकती है। हालांकि इसकी संभावना बहुत कम होती है मगर लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करने से ऐसा हो सकता है।

पाचन हो सकता है खराब

बाजार के अचार में प्रिजर्वेटिव्स के रूप में कुछ एसिडिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ये लंबे समय तक खराब नहीं होते और इसका स्वाद भी खट्टा-चटपटा होता है। अचार अगर थोड़ी मात्रा में खाया जाए ये आपके पाचन के लिए अच्छा है क्योंकि इसमें कई तरह के आयुर्वेदिक मसालों का प्रयोग किया जाता है मगर ज्यादा मात्रा में अचार का सेवन आपके पाचन को बिगाड़ भी सकता है। दरअसल अचार के ज्यादा सेवन से शरीर में ट्राइग्लिसराइड का लेवल बढ़ जाता है।

दिल की बीमारी का खतरा

बाजार के अचार में तेल की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है ताकि ये अचार लंबे समय तक खराब न हों और सूखें नहीं। तेल में फैट होता है जो आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है इसलिए अचार ज्यादा खाने वालों को दिल की बीमारियों का खतरा भी ज्यादा होता है। चूंकि दिल की बीमारियों की एक बड़ी वजह बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल है इसलिए आपको अचार का सेवन रोज नहीं करना चाहिए और बहुत कम मात्रा में करना चाहिए।

इसे भी पढ़ें:- मांसपेशियों और हड्डियों के लिए फायदेमंद है साबूदाना, ऐसे करें ब्रेकफास्ट में शामिल

कैंसर का खतरा

आपको जानकर हैरानी होगी कि अचार खाने से आपको कैंसर का भी खतरा हो सकता है। दरअसल बाजार में बिकने वाले सस्ते अचारों में घटिया प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो हानिकारक केमिकल्स से बने होते हैं। इसके अलावा इसमें इस्तेमाल होने वाला तेल-मसाला भी घटिया क्वालिटी का हो सकता है। ऐसे में केमिकलयुक्त इन अचारों को खाने से आपको कैंसर का खतरा भी हो सकता है।

कौन सा अचार खाएं

अगर आप अचार के शौकीन हैं, तो अच्छी क्वालिटी का अचार खाएं और रोजाना खाने के बजाय कभी-कभी कम मात्रा में खाएं। कम मात्रा में अचार का सेवन आपके सेहत के लिए फायदेमंद भी है। बेहतर होगा कि आप घर में ही कम तेल-मसाले और नमक वाला अचार बनाएं, जिससे आपको सेहत के लिए स्वाद से समझौता न करना पड़े।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Healthy Eating In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES790 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK