केवल 38.5 डॉक्टर्स रहते हैं अपने पेशे से खुश, जानें वजह

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 08, 2017
Quick Bites

  • कारण है हैरान करने वाले।
  • काम से खुश नहीं हैं डॉक्टर्स।
  • 80% डॉक्टर्स हैं डिप्रेशन के शिकार।

डिप्रेशन यानि कि एक ऐसी चीज है जिसे व्यक्ति खुद अपने ऊपर हावी होने देता है। यानि कि जब व्यक्ति के नकारात्मक स्थिति में सोचने का स्तर हद से ज्यादा बढ़ जाता है तब व्यक्ति डिप्रेशन की चपेट में आ जाता है। आजकल की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में हर तीसरा आदमी डिप्रेशन का शिकार हो जाता जा रहा है। जब भी व्यक्ति को कोई शारीरिक रोग होता है तो हर कोई उसे सीधा डॉक्टर के पास जाने की सलाह देता है। लेकिन जब डॉक्टर भी उसी रोग का शिकार हो स्थिति काफी जटिल हो जाती है। आज हम आपको डॉक्टर्स से संबंधित एक ऐसी सच्चाई बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे।

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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) द्धारा एक रिसर्च में खुलासा किया गया है कि मौजूदा समय में करीब 82.7 प्रतिशत डॉक्टर्स डिप्रेशन के शिकार हैं। मरीजों व तीमारदारों से मारपीट की घटनाओं के कारण डॉक्टरों में डर बैठ रहा है। डॉक्टर्स इस गम में जीते हैं कि अगर किसी मरीज ने बाद में उन पर हमला कर दिया तो क्या होगा? इसके साथ ही मेडिकल के बढ़ते प्रेशर और पर्सनल लाइफ में तालमेल ना बैठा पाने के चलते भी डॉक्टर्स में तनाव बढ़ रहा है। इतना ही नहीं डॉक्टरों को मारपीट व मुकदमेबाजी से संबंधित झमेलों का डर सताता हैै।

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आइएमए का दावा है कि करीब 46.3 प्रतिशत डॉक्टर हिंसा के भय और करीब 24.2 प्रतिशत डॉक्टर्स मुकदमे के भय से तनाव में हैं। जबकि करीब 13.7 प्रतिशत डॉक्टर्स आपराधिक मामले चलाए जाने के डर और 24.7 प्रतिशत डॉक्टर्स अपनी नौकरी से खुश नहीं हैं। यानि कि उन्हें डॉक्टरी का पेश भा नहीं रहा है। रिसर्च में यह भी साफ हुआ है कि करीब 56 प्रतिशत डॉक्टर व्यस्त जिंदगी के चलते अनिंद्रा के शिकार हैं। सर्व में सकारात्मक बात सिर्फ यह सामने आई है कि सिर्फ 36.8 प्रतिशत डॉक्टर्स अपने काम से खुश हैं और 38.5 प्रतिशत डॉक्टर्स को उनका पेशा पसंद है। 

क्या होता है डिप्रेशन में हाल 

जब कोई व्यक्ति डिप्रेशन में होता है और उसकी ये स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो व्यक्ति को अपना जीवन निरूद्देश्य लगने लगता है। तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोन का स्तर बढ़ता जाता है, जिनमें एड्रीनलीन और कार्टिसोल प्रमुख हैं। लगातार तनाव की स्थिति अवसाद में बदल जाती है। अवसाद एक गंभीर स्थिति है। हालांकि यह कोई रोग नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि आपका शरीर और जीवन असंतुलित हो गया है। इससे बचने के लिए व्यक्ति को अपनी सोच को सकारात्मक करना चाहिए। योग के साथ ध्यान करने से भी डिप्रेशन से छुटकारा मिलता है। 

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